नई दिल्ली,
एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार और उसके के अधिकारियों से 4 तीर्थस्थलों पर दुर्घटना के मामले में जिम्मेदारी किसकी है यह बताने के कहा. एनजीटी ने राज्य के सचिव, पर्यावरण विभाग को 12 सितंबर को वर्चुअल मोड के माध्यम से अदालत में पेश होने को कहा है.
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्य के पर्यावरण विभाग के सचिव से यह बताने को कहा है कि इस मामले में किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा. एनजीटी केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री और गोमुख के तीर्थ मार्गों पर घोड़ों के गोबर और उनके शवों सहित कचरे के अनियमित डंपिंग के बारे में एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
तीर्थयात्रियों के लिए कोई वहन क्षमता तय नहीं
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि 10 मई, 2022 के राज्य सरकार के परिपत्र के अनुसार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए तीर्थयात्रियों की वहन क्षमता क्रमशः 16,000, 13,000, 8,000 और 5,000 निर्धारित की गई थी. एनजीटी ने कहा कि आज तक, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की पटरियों पर तीर्थयात्रियों के लिए कोई वहन क्षमता तय नहीं है, और उनके संबंध में कोई प्रतिबंध नहीं है.
संभावित दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी?
राज्य सरकार के वकील के मुताबिक, चारों तीर्थ स्थलों पर वहन क्षमता के बारे में रिपोर्ट हासिल करने में एक साल का समय लगेगा और इस तरह याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया था कि तीर्थयात्रियों की अनियंत्रित संख्या की वजह से दुर्घटना हो सकती है और किसी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
एनजीटी ने कहा, “इन परिस्थितियों में, हम पर्यावरण विभाग के सचिव को अगली सुनवाई की तारीख पर वर्चुअल मोड के माध्यम से उपस्थित होने और वहन क्षमता के अभाव में किसी भी असामयिक दुर्घटना के बारे में आवेदक के वकील के तर्क के संबंध में अपना रुख बताने का निर्देश देते हैं और ऐसे मामले में नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी और इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
