नई दिल्ली,
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने देश भर में बीएड धारी शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे छात्रों में जबरदस्त रोष पैदा कर दिया है. बीएड धारी छात्र सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक अपना विरोध जता रहे हैं. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए प्राइमरी टीचर (PRT) के लिए बीएड (B.Ed) की योग्यता को समाप्त कर दिया. इस फैसले के बाद बीएड डिग्री धारक प्राइमरी शिक्षक के लिए योग्य नहीं होंगे. इसके लिए केवल बीटीसी (BTC- Basic Training Certificate) डिग्री वाले छात्र ही कक्षा पांचवी तक पढ़ाने के लिए पात्र माने जाएंगे. इसके साथ ही यह मामला B.Ed vs BTC हो चला है.
आखिर क्या है ये मामला? सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों किया? इस फैसले से कितने छात्र प्रभावित होंगे? छात्रों की क्या मांग है? इस तरह के कई सवाल सामने आ रहे हैं. इन सवालों के जवाब जानने के लिए चलिए इस मामले को विस्तार से समझते हैं.
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यहां से शुरू हुआ B.ED vs BTC विवाद
दरअसल, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE), जो पूरे देश में शिक्षकों के लिए योग्यता निर्धारित करती है, ने 28 जून 2018 में एक नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसके अनुसार बीएड किए हुए छात्र कक्षा 1 से 5 वीं तक पढ़ाने के लिए योग्य करार दिया गया था. इसके आधार पर कई छात्रों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी.
NCTE के नोटिफिकेशन के बाद राजस्थान सरकार ने भी RTET का नोटिफिकेशन जारी किया. इस नोटिफिकेशन में बीएड के छात्रों को प्राइमरी शिक्षक के लिए अयोग्य बताया गया. यानी बीएड धारक छात्र PRT की परीक्षा में नहीं बैठ सकते थे. इन्हीं दो नोटिफिकेशन के बाद से B.Ed और BTC का विवाद शुरू हुआ.
राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती
B.ED vs BTC उठते ही फैसले को राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी गई. इसके साथ ही एलिमेंट्री एजुकेशन में डिप्लोमा (D.El.ED) धारकों ने भी B.Ed डिग्री धारकों की भर्ती को चुनौती दे दी. राजस्थान सरकार ने इस मामले में D.El.ED छात्रों का समर्थन किया. वहीं हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद 25 नवंबर, 2021 को NCTE के नोटिफिकेशन को खारिज करते हुए BTC और D.El.ED छात्रों के हक में फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि B.Ed डिग्री धारक प्राइमरी टीचर की पोस्ट के लिए पात्र नहीं होंगे.
कितने B.Ed धारक प्रभावित?
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले देवेश कुमार का कहना है कि इस फैसले लगभग 3 करोड़ B.Ed डिग्री धारक छात्र सीध तौर पर प्रभावित होंगे. वहीं छात्रों का दावा है कि लाखों अभ्यर्थी इस डिग्री के साथ KVS, NVS जैसे स्कूलों में शिक्षक पद पर कार्यरत हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर क्या कहा
राजस्थान हाई कोर्ट से निराशा हाथ लगने के बाद B.Ed धारी छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. लेकिन यहां भी उन्होंने निराशा ही हाथ लगी. सभी दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया. कोर्ट ने आर्टिकल 21A का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा के मौलिक के अधिकार में मुफ्त के साथ गुणवत्तापुर्ण शिक्षा भी शामिल है. इसके बिना शिक्षा का कोई मतलब नहीं है. कोर्ट ने आगे कहा कि बीएड धारकों में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए जरुरी स्किल्स और अप्रोच नहीं है. वे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे पाएंगे इसलिए वे इसके लिए अयोग्य माने जाएंगे.
