कन्नौज/लखनऊ:
लोकसभा चुनाव 2024 के समापन के बाद अब राजनीतिक गुणा-गणित और बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है। कन्नौज लोकसभा सीट से अखिलेश यादव के हाथों हारकर सांसदी गंवाने वाले सुब्रत पाठक ने यादवों और मुसलमानों का पूरा कैलकुशन बताया है। पूर्व सांसद सुब्रत ने यह भी बताया कि आखिर पीएम नरेंद्र मोदी ने क्यों किसी मुस्लिम को अपनी सरकार में मंत्री नहीं बनाया।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रायः देखा है कि अधिकतम लोग अपनी अपनी जाति को वोट करते हैं चाहे उनकी जाति का प्रत्याशी किसी भी दल से लड़ रहा हो। इसी प्रकार से भाजपा के विचार से जुड़ा हुआ कोई भी मतदाता कमल के निशान पर राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के लिए ही वोट करता है। फिर चाहे सामने वाला प्रत्याशी भले ही अपनी जाति का ही क्यों ना हो?
और सोचा है कभी कि यादव जाति के अधिकतम लोगों ने उत्तर प्रदेश में किसी आम यादव को टिकट नहीं मिलने के बाद भी समाजवादी पार्टी को ही वोट क्यों किया? इसलिए कि वो जानते हैं सरकार में आने के बाद पूर्व में रहीं सपा सरकारों के कारण से सरकारी नौकरी, ठेका जमीन आदि में इनके कब्जे होते थे एक बार फिर इन्हें संरक्षण मिल जाएगा।
और रही बात मुसलमानों की तो उनके लिए कहा जाता था कि पहले भाई फिर भाजपा हराई के नाम पर वोट करते हैं। लेकिन इस बार अन्य दल से मुस्लिम प्रत्याशी होने के बाद भी अपने लोगों को वोट न देकर भाजपा हराने के नाम पर अन्य समाज के लोगों को वोट देने का आख़िर कारण क्या है? जबकि मोदी जी ने इनके साथ कोई भेदभाव नहीं किया और सभी सरकारी योजना का लाभ भी इन्हें दिया।
दरअसल कट्टरपंथियों का पूरी दुनिया पर शरिया कानून लागू करने के मिशन के तहत हिंदुस्तान को पाकिस्तान की तर्ज पर गजवा ए हिंद बनाने के उनके लक्ष्य में भाजपा ही बाधा है। और भाजपा के रहते हिंदुस्तान को इस्लामिक राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता है। यही कारण है कि ना मुस्लिम भाजपा को वोट देते हैं और इसी लिए भाजपा इनको टिकट ही नहीं देती है। लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग राग अलाप रहे हैं कि मोदी जी ने किसी मुस्लिम को अपनी सरकार में मंत्री क्यों नहीं बनाया? अब बताओ इन्हें कौन समझाए कि जब टिकट ही नहीं मिली तो मंत्री कैसे बनते?
