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IAS अफसरों को पीएम मोदी ने क्यों कहा, राजनीतिक दलों पर रखो ध्यान नहीं तो देश लुट जाएगा

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नई दिल्ली

पीएम मोदी सिविल सेवा दिवस के अवसर पर कुछ देर में देश की सबसे बड़ी सेवा के अधिकारों को संबोधित कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ही पीएम ने सीबीआई के अधिकारियों से भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐक्शन लेने की अपील की थी। माना जा रहा है कि सिविल सेवा के अधिकारियों से भी पीएम मोदी ने बड़ी अपील की है।

पीएम मोदी ने कहा कि देशवासियों की उम्मीदों को पूरी करने के लिए तेजी से निर्णय लेने होंगे। हमें उन्हें पूरा करना होगा। हमें पूरा सामर्थ से जुटना होगा, तेजी से निर्णय होंगे, उन निर्णयों को उतने ही तेजी से लागू करना होगा। भारत का समय आ गया है। ऐसी स्थिति में भारत की नौकरशाही को एक भी पल गंवाना नहीं है, भारत की हर ब्यूरोक्रेसी से चाहे वो राज्य में हो या केंद्र में। मैं आग्रह कहता हूं देश ने आपपर बुहत भरोसा किया है, उस भरोसे को कायम रखिए। आपकी सेवा में आपके निर्णयों का आधार देशहित होना चाहिए। मुझे विश्वास हैं कि आप इस कसौटी पर भी खरा उतरेंगे।

साथियों किसी भी लोकतंत्र में राजनीतिक दांव का बहुत महत्व होता है। लेकिन एक ब्यूरोक्रेट के तौर पर एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर आपको हर निर्णय में सवालों का जरूर ध्यान रखना होगा। जो राजनीतिक दल सत्ता में आया है वो देश के टैक्सपेयर्स का पैसा कहां इस्तेमाल कर रहा है, उसका ध्यान आपको रखना ही होगा। वो राजनीतिक दल अपना वोट बैंक बनाने के लिए सरकारी धन लुटा रहा है, या सभी का जीवन आसान बनाने के लिए काम कर रहा है, वो राजनीतिक दल पैसे से प्रचार कर रहा है। ये देखना होगा। सरदार पटेल जिस ब्यूरोक्रेसी को स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया कहते थे, उसे पूरा करना है, ब्यूरोक्रेसी से चूक हुई तो देश का धन लुट जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा कि आज की सरकार की प्राथमिकता है वंचितों को वरीयता। आज की सरकार देश के सीमावर्ती गांवों को आखिरी गांव न मानकर उन्हें फर्स्ट विलेज मानते हुए काम कर रही है। हमें इससे भी अधिक मेहनत की और खोजपरक समाधान की जरूरत होगी। प्रशासन का बहुत बड़ा समय, एनओसी, प्रमाण पत्र और क्लियरेंस में चला जाता है, हमें इसका समाधान निकलना होगा। तभी इज ऑफ डूइंग बढ़ेगी और इज ऑफ बिजनेस बढ़ेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि लास्ट माइल डिलीवरी अगर ठीक नहीं हो तो काम पूरा नहीं होगा। पहले के सिस्टम की देन थे जिसमें देश में 4 करोड़ से ज्यादा गैस कनेक्शन था, 4 करोड़ से ज्यादा फर्जी राशन कार्ड, एक करोड़ काल्पनिक महिलाओं और बच्चों को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की सहायता जा रही थी। अल्पसंख्यक मंत्रालय 30 लाख फर्जी युवाओं को लाभ देता रहा था। मनरेगा के तहत देश में लाखों ऐसे फर्जी अकाउंट बने जिनका अस्तित्व ही नहीं था। जिनका कभी जन्म ही नहीं हुआ, वो सिर्फ कागजों में ही पैदा हुआ, ऐसे लाखों-करोड़ों फर्जी नामों के साथ एक ऐसा ही सिस्टम भ्रष्टाचार में जुटा था।

पीएम मोदीबीते साल 15 अगस्त को मैंने पंच प्रण लक्ष्य का जिक्र किया है। पंच प्रण की प्रेरणा से जो ऊर्जा निकलेगी वो हमारे देश को वो ऊंचाई देगी, जिसका वो हमेशा हकदार रहा है। मुझे देखकर ये अच्छा लगा कि आप सभी ने सिविल सेवा दिवस थीम को विकसित भारत रखी है। इसके सोच के पीछे क्या है ये उस पुस्तक में दिखता है जिसका विमोचन किया गया है। विकसित भारत के लिए आवश्यक है भारत का सरकारी सिस्टम हर देशवासी को मदद करे। भारत का हर सरकारी कर्मचारी देशवासियों के सपने को पूरी करने में मदद करे। बीते दशकों में सिस्टम के साथ जो निगेटिविटी बदली थी, उसको पॉजिटिविटी में बदले।

पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के मुकाबले आज देश में 10 गुना ज्यादा तेजी से रेल लाइनों का इलेक्ट्रिफिकेशन हो रहा है। 2014 के मुकाबले आज देश में दोगुनी रफ्तार से नेशल हाइवे का निर्माण हो रहा है। 2014 के मुकाबले आज देश में एयरपोर्ट की संख्या भी दोगुना से ज्यादा हो गए हैं। आज यहां जो पुरस्कार दिए गए हैं जो देश की सफलता में आपकी इसी भागीदारी को प्रमाण करते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पास समय कम है लेकिन सामर्थ भरपूर है, हमें पहाड़ जैसी ऊंचाई भले ही चढ़नी है लेकिन इरादे आसमान से ज्यााद ऊंची है। पिछले 9 वर्षों में भारत आज जहां पहुंचा है देश में सिविल सेवा वही है अधिकारी कर्मचारी वही है लेकिन परिणाम बदल गए हैं। पिछले 9 साल में भारत जो विश्व भूमिका में आया है, उसमें आप सबका सहयोग अटल रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि ये ऐसा समय है जब देश ने अपनी आजादी का 75 साल पूरे किए हैं। देश ने अगले 25 वर्षों के लिए लक्ष्य प्राप्त करने के लिए तेजी से कदम बढ़ाना शुरू किया है। आजादी के अमृतकाल में युवा अधिकारियों की भूमिका अधिक है जो अगले 15-20 साल इस सेवा में रहने वाले ।

पहली बार 2006 में हुआ था कार्यक्रम
हर साल 21 अप्रैल को भारत में राष्ट्रीय सिविल सर्विस डे मनाया जाता है। विज्ञान भवन में यह कार्यक्रम पहली बार 21 अप्रैल 2006 को आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम देश के कई सार्वजनिक विभागों में काम कर रहे सभी अधिकारियों की सराहना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, जो भारत की प्रशासनिक मशीनरी को चलाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं।

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