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Saturday, March 14, 2026
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ED डायरेक्टर की नियुक्ति पर झटके के बाद भी शाह खुश क्यों हैं? SC के फैसले की हर बात समझिए

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) निदेशक संजय कुमार मिश्रा को मिले एक्सटेंशन रद्द कर दिए हैं। ईडी डायरेक्टर एसके मिश्रा का कार्यकाल दो-दो बार साल भर के लिए बढ़ाया गया था। SC ने केंद्र सरकार के दोनों फैसलों को ‘अवैध’ करार दिया है। हालांकि, मिश्रा को जनहित में 31 जुलाई तक पद पर बने रहने की मोहलत दी गई है। एसके मिश्रा का कार्यकाल नवंबर में खत्म होने वाला था। SC ऑर्डर से इसमें चार महीने कम हो गए हैं। जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने कहा कि 2021 और फिर 2022 में एक्सटेंशन देना SC के सितंबर 2021 वाले आदेश के खिलाफ था। उस आदेश में SC ने केंद्र को मिश्रा का कार्यकाल और न बढ़ाने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विजिलेंस कमिशन (CVC) एक्ट और दिल्‍ली पुलिस स्‍पेशल इस्टैब्लिशमेंट एक्‍ट में संशोधनों को बरकरार रखा। इन बदलावों के जरिए सरकार को सीबीआई और ईडी का कार्यकाल एक-एक साल करके तीन बार बढ़ाने की ताकत मिली।

‘अमित शाह ने कहा, ज्यादा खुश न हों’
SC के ताजा फैसले का मतलब यह है कि अब केंद्र किसी अधिकारी को पांच साल तक ED, CBI के निदेशक के पद पर रख सकता है। फैसले को केंद्र के लिए झटके की तरह देखा गया। ईडी प्रमुख संजय कुमार मिश्रा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बाद शाह ने कहा, ‘इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी मना रहे लोग विभिन्न कारणों से भ्रम में हैं।’ शाह ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने संसद से पारित सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) अधिनियम में संशोधन को बरकरार रखा है। भ्रष्ट और कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने के लिए ईडी की शक्तियां पहले जैसी हैं, क्योंकि यह ऐसी संस्था है जो किसी व्यक्ति विशेष से परे है और यह अपने मुख्य मकसद – यानी मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन के अपराधों की जांच करती रहेगी।’

शाह पर उखड़ गई कांग्रेस, कहा- SC का फैसला सरकार के मुंह पर तमाचा
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने शाह के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘गृह मंत्री उस एजेंसी पर टिप्पणी क्यों कर रहे हैं जो तकनीकी रूप से वित्त मंत्रालय को रिपोर्ट करती है? क्या इससे यह नहीं पता चलता कि दो लोगों को छोड़कर बाकी मंत्रिमंडल बेरोजगार है? यदि ईडी का निदेशक कौन है, इससे आपके लिए कोई फर्क नहीं पड़ता, तो वर्तमान पदाधिकारी को दो बार सेवा विस्तार क्यों दिया गया और आपकी सरकार तीसरे विस्तार के लिए क्यों लड़ रही है?’

केंद्र सरकार ने ED निदेशक का कार्यकाल बढ़ाने के लिए कई वजहें गिनाई थीं। इनमें फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क (FATF) का रिव्यू भी शामिल था। केंद्र की दलील थी कि मिश्रा का विकल्प तय करने में समय लगेगा। इसपर अदालत ने 31 जुलाई तक का वक्त दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला विपक्षी दलों के नेताओं की याचिकाओं पर सुनाया है।

ईडी डायरेक्टर की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘मिश्रा का कार्यकाल विस्तार पूरी तरह से अवैध है, यह सुप्रीम कोर्ट कह रहा है। यही बात कांग्रेस पार्टी पहले दिन से कह रही थी। इसलिए, कांग्रेस का रुख आज साबित हो चुका है कि ईडी निदेशक का कार्यकाल अवैध तरीकों से बढ़ाने का मकसद क्‍या था, इसलिए यह फैसला वास्तव में यह सरकार के चेहरे पर एक स्पष्ट तमाचा है।’

कौन हैं संजय कुमार मिश्रा?
ईडी के डायरेक्टर 63 वर्षीय संजय कुमार मिश्रा 1984 बैच के IRS अफसर हैं। उन्हें सबसे पहले अक्टूबर 2018 में तीन महीने के लिए ED का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया था। फिर दो साल का पूरा कार्यकाल मिला। वह आर्थिक विशेषज्ञ हैं और कहा जाता है कि उन्होंने इनकम टैक्स के कई हाई प्रोफाइल मामलों की शानदार ढंग से जांच की है। यही कारण है कि उन्हें ईडी का प्रमुख नियुक्त किया गया था।

अपनी नियुक्ति से पहले, संजय कुमार मिश्रा दिल्ली में इनकम टैक्स के चीफ कमिश्नर थे। केंद्र सरकार ने संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाकर 18 नवंबर 2023 तक कर दिया था। वह पहले ऐसे शख्स है जिन्हें डायरेक्टर के रूप में सेवा अवधि के बाद तीन बार अतिरिक्त विस्तार मिला है। जब वह IRS बने थे तो उस वक्त अपने बैच के सबसे कम उम्र के अफसर थे।

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