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Monday, May 4, 2026
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क्यों एक बार फिर पीएम मोदी को सीधे निशाना बनाने लगे सीएम केजरीवाल? क्या है रणनीति

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नई दिल्ली,

दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने रविवार को रामलीला मैदान में महारैली की और केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ हुंकार भरी. इस रैली में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने पीएम मोदी को ‘चौथी पास राजा’ बताते हुए कहानी भी सुनाई. ‘चौथी पास’ कहकर एक बार फिर उन्होंने पीएम मोदी की शिक्षा को लेकर निशाना साधा, जैसा कि वह पिछले कुछ महीनों से करते आ रहे हैं.

इससे पहले अरविंद केजरीवाल जब जंतर-मंतर पर पहलवानों के धरने पर पहुंचे थे, तब भी उन्होंने पीएम मोदी का जिक्र करते हुए एक कहानी सुनाई थी और उन पर निशाना साधा था. आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों के लिए बीते दिनों थीम सॉन्ग लॉन्च किया था. गीत जिसके बोल थे ‘केजरीवाल कचरा साफ करेगा’, इसमें जहां आम आदमी पार्टी अपने दिल्ली और पंजाब मॉडल को बहुत अच्छा बता रही थी तो वहीं बिजली माफ-पानी हॉफ जैसी योजनाओं को भी प्रचारित कर रही थी.

इन सबके बीच जो एक बात खास तौर पर ध्यान खींच रही थी, वह थी गाने में पीएम मोदी, सीएम योगी और कमल निशान के झंडे का प्रयोग. थीम सॉन्ग में एक जगह जब ये वाक्य आता है कि ‘भ्रष्टाचारी को हटाना है’ तो स्क्रीन पर पीएम मोदी और सीएम योगी नजर आते हैं. यानी आम आदमी पार्टी ने अपने थीम सॉन्ग में सांकेतिक तौर पर ही सही, लेकिन बाकायदा फोटो लगा कर पीएम मोदी को भ्रष्टाचारी कहा था.

क्या बदल गया है सीएम का रुख?
बीते कुछ महीनों से दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल के राजनीति करने और इस दौरान टीका-टिप्पणी करने के तौर-तरीकों में बदलाव देखा जा रहा है. ये बदलाव खास तौर पर पीएम मोदी के प्रति उनके नए रुख में आया है, जिसमें वह सार्वजनिक मंचों से उनका नाम लेकर कठोर टिप्पणियां करते दिख रहे हैं. मार्च-अप्रैल में जोर-शोर से उठे डिग्री विवाद को ही उदाहरण के तौर पर देखें तो अरविंद केजरीवाल ने कई बार राजनीतिक मंचों और जनसभाओं में पीएम मोदी को सीधे तौर पर घेरा है.

पहले पीएम मोदी का नाम लेने से बचते थे सीएम केजरीवाल
सवाल है कि आखिर सीएम अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी को नाम लेकर घेरना क्यों शुरू किया है? ये सवाल इसलिए, क्योंकि 2019 से 2022 के अंत तक के अरविंद केजरीवाल के रुख को देखें तो वह राजनीतिक सभाओं और यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी पीएम का नाम लेने से बचते थे. यह बदलाव उन्होंने बीजेपी-2.0 कार्यकाल शुरू होने के ठीक बाद किया था. इस दौरान उन्होंने जो भी आरोप लगाए वह केंद्र सरकार पर लगाए. सीधे प्रधानमंत्री या पीएम मोदी शब्द का इस्तेमाल उन्होंने नहीं किया.

पिछले कुछ सालों में नहीं किया सीधा हमला
साल 2022 की फरवरी में अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा था कि ‘ आठ जनवरी को पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा हुई. इसके बाद से अरविंद केजरीवाल अलग-अलग राज्यों में 38 भाषण दे चुके हैं, लेकिन उन्होंने इस दौरान ‘मोदी’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया. यही रिपोर्ट आगे इसकी भी तस्दीक करती है कि,बीते दो सालों में उन्हें सबसे कम बार सीधे तौर पर किसी आलोचना में ‘पीएम मोदी’ शब्द का इस्तेमाल करते देखा गया है. साल 2020 में भी कृषि कानूनों की खिलाफत करते हुए जब सीएम अरविंद केजरीवाल ने सिंधू बॉर्डर पर अपने भाषण दिए, या सोशल मीडिया पर कोई बात की, तो भी उन्होंने ‘मोदी’ शब्द का प्रयोग नहीं किया था.

राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी ने इस रिपोर्ट में केजरीवाल के कदम को सूझ-बूझ भरा बताया था. वह कहती हैं कि ‘केजरीवाल को लगा कि पीएम मोदी पर हमला फ़ायरबैक कर सकता है और मोदी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं. लोग बीजेपी से नाख़ुश हो सकते हैं, लेकिन वे सोचते हैं कि पीएम मोदी अच्छा कर रहे हैं. ऐसे में सीएम अरविंद केजरीवाल पीएम मोदी से सीधे भिड़ना नहीं चाहते.

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