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मनमोहन को हमेशा याद रखेंगे… ‘झेलम के बेटे’ के जाने से दुख में डूबे पाकिस्‍तानी, बताया कैसे पाकिस्‍तान को दी थी मात

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इस्‍लामाबाद

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्‍टर मनमोहन सिंह का 92 साल की अवस्‍था में दिल्‍ली में निधन हो गया है। मनमोहन सिंह ने एम्‍स में अंतिम सांस ली। पाकिस्‍तान में जन्‍मे मनमोहन सिंह के जाने से पाकिस्‍तानी भी बहुत दुखी है। उनका कहना है कि पाकिस्‍तान हमेशा झेलम के बेटे को याद रखेगा। पाकिस्‍तान के पूर्व मंत्री और पीटीआई नेता फवाद चौधरी ने कहा कि डॉक्‍टर मनमोहन सिंह का जाना वाकई बहुत दुखद खबर है। उन्‍होंने कहा कि भारत आज जिस आर्थिक स्थितरता का आनंद ले रहा है, वह डॉक्‍टर मनमोहन सिंह की दूरदर्शी नीतियों का नतीजा है। उन्‍होंने कहा कि डॉक्‍टर सिंह का पाकिस्‍तान के झेलम इलाके में गाह गांव में जन्‍म हुआ था जो अब पाकिस्‍तानी पंजाब के चकवाल इलाके में पड़ता है। डॉक्‍टर सिंह झेलम के बेटे थे और हमेशा यहां के लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत रहेंगे।

पाकिस्‍तानी विश्‍लेषक कमर चीमा ने कहा कि डॉक्‍टर मनमोहन सिंह का भारत के लिए सबसे बड़ा योगदान अमेरिका से परमाणु डील है। इससे भारत का परमाणु अलगाव खत्‍म हो गया और एटमी तकनीक तक उसकी पहुंच हो गई। परमाणु परीक्षणों के बाद लगे प्रतिबंध भी खत्‍म हो गए। इसके बाद से ही भारत और अमेरिका के बीच रिश्‍ते हमेशा के लिए नई ऊंचाई की ओर बढ़ गए। भारत एनपीटी का सदस्‍य नहीं है और इसके बाद भी अमेरिका ने नई दिल्‍ली के साथ नागरिक परमाणु डील किया। इसका पूरा क्रेडिट मनमोहन सिंह को जाता है।

मनमोहन ने भारत को दिलाई बढ़त, आज भी पिछड़ा पाक
कमर चीमा ने कहा कि पाकिस्‍तान इसका विरोध करता रहा लेकिन आज तक उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। पाकिस्‍तान के पास आज भी इन परमाणु तकनीकों तक पहुंच नहीं हो पाई है। अमेरिका ने मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ विदेशी रिश्‍ते बहुत मजबूत हो गए। आज भारत को कहा जाता है कि वह एक जिम्‍मेदार परमाणु ताकत है। इससे भारत को पश्चिमी देशों और जापान के साथ रक्षा तकनीकें आसानी से मिल जा रही हैं। कमर चीमा ने कहा कि मनमोहन ने पाकिस्‍तान के प्रति सख्‍त रुख रखा और पीएम रहने के दौरान कभी आए नहीं।

पाकिस्‍तानी विश्‍लेषक ने कहा कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच जब संबंध खराब हुए तो उन्‍होंने बातचीत को फिर से शुरू किया था। पाकिस्‍तानी सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने डॉक्‍टर सिंह से जुड़ा वाकया शेयर किया। कुरैशी इसमें कह रहे हैं कि जब मैं 90 के दशक में भारत में डॉक्‍टर सिंह के घर गया तो उनकी पत्‍नी ने चाय बनाया और मनमोहन सिंह जी खुद ही उसे अपने हाथ में लेकर आए। डॉक्‍टर मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों के पाकिस्‍तानी विशेषज्ञ भी मुरीद थे।

‘पाकिस्‍तान के पास मनमोहन सिंह नहीं’
पाकिस्‍तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवन्‍यू के पूर्व चेयरमैन शब्‍बार जैदी ने कुछ समय पहले डॉक्‍टर मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों की जमकर तारीफ की थी। उन्‍होंने कहा था कि पाकिस्‍तान को किसी फौजी या राजनेता ने बर्बाद नहीं किया बल्कि उन वित्‍तीय विशेषज्ञों ने बर्बाद किया जिन्‍होंने अपनी नौकरी को बचाने के लिए, फायदे के लिए तानाशाहों की अल्‍पकालिक नीतियों को ही आगे बढ़ाते रहे। वे गंभीर नहीं थे। हमारे पास मनमोहन सिंह नहीं थे। डॉक्‍टर मनमोहन सिंह का जन्‍म 26 सितंबर 1932 को हुआ था।

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