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Tuesday, April 28, 2026
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मजदूरों के मसीहा पप्पन सिंह गहलोत ने कर ली खुदकुशी, लॉकडाउन में वर्करों को प्लेन से भेजा था बिहार

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नई दिल्ली

लॉकडाउन के समय खेतों में काम करने वाले मजदूरों को अपने खर्चे से प्लेन का टिकट खरीदकर बिहार भेजने वाले पप्पन सिंह गहलोत ने कथित तौर पर खुदकुशी कर ली है। जैसे ही यह खबर मिली, उन्हें जानने वाले लोग सन्न रह गए। बहुत से लोगों ने उनके बारे में खबर पढ़कर जाना था। उन्हें जानने वाले कह रहे हैं कि ऐसा नेक इंसान आत्महत्या कैसे कर सकता है? लोग कई तरह के सवाल भी उठा रहे हैं। बताया जा रहा है कि आज शाम 5 बजे के आसपास उनका शव मिला। वह रोज मंदिर पर 4 बजे आते थे। लेकिन आज मंदिर के पट लगे हुए थे तो पंडित ने अंदर जाकर देखा तो वह रस्सी से लटके मिले। दिल्ली के बख्तावरपुर के तिगीपुर गांव में मशरूम की खेती करने वाले पप्पन सिंह को दो साल पहले अपनी दरियादिली से काफी प्रसिद्धि मिली थी। उनकी स्टोरी बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने भी शेयर की थी। पप्पन ने बाद में हवाई जहाज से ही अपने मजदूरों को दिल्ली बुलाने का भी इंतजाम किया था।

10 मजदूरों पर 68 हजार खर्चे
पप्पन के यहां 10 मजदूर काम करते थे, उन सभी को उन्होंने कोरोना लॉकडाउन में काम बंद होने के बाद अपने पैसे से हवाई जहाज का टिकट खरीदकर घर भेजा था। इसमें उनके 68 हजार रुपये खर्च हुए थे। कुछ प्रवासी मजदूरों ने तो यहां तक कहा था कि मालिक ने टिकट करवा दी, आज प्लेन में बैठकर जाऊंगा। ये मजदूर पहली बार प्लेन का सफर कर रहे थे। दिल्ली के मशरूम किसान की दरियादिली की पूरे देश में तारीफ हुई थी। इन मजदूरों में कुछ तो करीब 20 साल से उनके पास काम कर रहे थे।

कोरोना काल में जब मजदूरों ने अपने घर जाने की इच्छा जताई तो पप्पन ने पहले ट्रेन टिकट करवाने की कोशिश की, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। फिर उन्होंने प्लेन का टिकट खरीदा और मजदूरों को पटना भेजा। यहां तक कि एयरपोर्ट पर पप्पन के भाई निरंजन गहलोत मजदूरों को प्लेन में बैठाने आए थे।

महादेव का भक्त, एक रुपया नहीं काटूंगा
तब पप्पन ने मीडिया से कहा था कि मेरे मजदूर बंधु घर से इतनी दूर आए हैं तो इनके परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी मेरी बनती है। उन्होंने कहा था- कसम है महादेव की, मैं टिकट का एक रुपया इन मजदूरों से नहीं काटूंगा। दरअसल, तब ऐसी अफवाह उड़ी थी कि शायद वह मजदूरों की सैलरी से पैसे काट लें।

एक रिपोर्ट के मुताबिक तिगीपुर के किसान पप्पन सिंह जैविक खेती करते थे और मशरूम उगाते थे। हर साल करीब 1 लाख टन मशरूम उगाते थे। उनका कहना था कि सरकार मशरूम की खेती पर थोड़ा ध्यान दे तो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार दिया जा सकता है।

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