नई दिल्ली
राज्यसभा में सोमवार को ‘दिल्ली सर्विस बिल’ पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने बीजेपी पर तीखा हमला किया। इस दौरान उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की ‘रश्मिरथी’ से महाभारत के प्रसंग का जिक्र कर बिल को सरासर फ्रॉड करार दिया। उन्होंने कहा कि 1989 से लगातार भारतीय जनता पार्टी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की वकालत करती रही है। अब वह निर्वाचित सरकार के अधिकारों में कटौती कर ‘सुपर सीएम’ बनाने की कोशिश कर रही है। राघव चड्ढा बोले कि बीजेपी को लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी के सपने को पूरा करना चाहिए। बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की थी। उसे पूरा करना चाहिए।
राघव ने रश्मिरथी की लाइनों – ‘जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है’ – से अपनी बात रखनी शुरू की। सभापति को संबोधित करते हुए वह बोले कि वह न्याय की गुहार उनके पास लाए हैं। अपने हक लेने आए हैं। यह बिल 1977 से लेकर 2015 तक राजनैतिक धोखे की कहानी है । 40 साल का संघर्ष बीजेपी ने दिल्ली में पूर्ण राज्य का दर्जा स्थापित करने के लिए किया। लेकिन, ऐसी कौन सी आपदा आ गई कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए अध्यादेश लेकर आ गए।
आप सांसद बोले कि कांग्रेस की सरकार ने दिल्ली में विधानसभा का गठन किया। लालकृष्ण आडवाणी और मदन लाल खुराना ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए संघर्ष किया। 1999 के घोषणापत्र में बीजेपी ने दिल्ली को संपूर्ण राज्य दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष किया। लाठियां खाईं। वो दिन आया जब वाजपेयी सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का अधिकार देने का बिल लाई। हर्षवर्धन ने बयान दिया था कि जब नरेंद्र मोदी पीएम बनेंगे तो हम दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाएंगे। ये बिल संविधान और देश का अपमान है। ये आडवाणी, खुराना, वाजपेयी का अपमान है। उन्होंने नेहरूवादी नहीं आडवाणीवादी बनने की नसीहत दी। राघव बोले कि पंडित नेहरू ने कहा था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलना चाहिए। केंद्र सरकार इसका हवाला दे रही है। उन्होंने गृहमंत्री से अपील करते हुए कहा कि नेहरूवादी नहीं, आडवाणीवादी भाजपावादी बनिए। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दीजिए।
बताई बिल को लाने की मंशा
राघव चड्ढा ने बिल को लाने की मंशा के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 25 साल में दिल्ली में छह बार विधानसभा के चुनाव हुए। छह के छह चुनाव बीजेपी बुरी तरह से हारी। 2015 और 2020 में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत के साथ AAP की सरकार बनी। चूंकि पिछले 25 साल ये चुनाव नहीं जीत पाए और बीजेपी को पता है कि AAP के होते हुए वह अगले 25 साल भी चुनाव नहीं जीत पाएगी। लिहाजा, उन्होंने सरकार को नष्ट करने का काम किया। न रहेगी सरकार न रहेगा चुनावों का महत्व।
