देश में कांग्रेस की जरूरत, चीन के लिए नेहरू दोषी नहीं… मोदी सरकार के इन मंत्रियों के बयान के क्या मायने ?

नई दिल्ली

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कांग्रेस और नेहरू को लेकर जो बयान दिया वो गौर करने वाला है। कारगिल दिवस के मौके पर राजनाथ सिंह जम्मू में थे। ये कार्यक्रम था उन भारतीय जांबाजों की वीरता, शहादत और साहत को नमन करने का, जिन्होंने असंभव को संभव कर दिया था। मगर इस कार्यक्रम में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को लेकर राजनाथ सिंह ने जो बयान दिया उसपर बहस छिड़ी हुई है। भाजपा का सपना कांग्रेस मुक्त भारत का है। भाजपा इस मिशन में काफी आगे भी बढ़ती जा रही है। मगर उसी कांग्रेस के लिए बीजेपी के दिग्गज नेताओं का दिल भी पसीज रहा है। अब यहां पर लोग असमंजस में पड़े हुए हैं एक ओर बीजेपी कांग्रेस और नेहरू की नीतियों की आलोचना करती है तो दूसरी ओर बड़े मंत्रियों के ऐसे बयान क्यों?

कारगिल विजय समारोह में राजनाथ सिंह का बयान
जम्मू कश्मीर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे राजनाथ सिंह ने 1962 में चीन की कार्रवाई का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि बहुत सारे लोग जवाहर लाल नेहरू की आलोचना करते हैं। मैं भी एक विशेष राजनैतिक दल से आता हूं, मैं भारत के किसी भी प्रधानमंत्री के आलोचना नहीं करना चाहता। साथ ही मैं किसी भी प्रधानमंत्री की नीयत पर सवालिया निशान नहीं लगाना चाहता। उन्होंने कहा कि नीयत में किसी की खोट नहीं हो सकता है। सिंह ने कहा कि आज भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है।

बीजेपी के निशाने पर रहे हैं पं नेहरू
बीजेपी के तमाम नेता अक्सर किसी न किसी मसले को लेकर कांग्रेस और उनके नेताओं पर दोष मढ़ते हैं। चाहे गरीबी हो, चाहे विकास हो या फिर चीन से लाइन ऑफ एक्च्यूल कंट्रोल का मामला। चीन के साथ सीमा विवाद का कारण भी 1962 का युद्ध बताया जाता है और उस वक्त देश के पीएम जवाहर लाल नेहरू ही थे। इस युद्ध से ठीक पहले चीनी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा होती है और फिर दोनों नेता (भारत-चीन) ने गर्मजोशी से मुलाकात की। इस दौरान हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा दिया गया और फिर भारत के पीठ पर वार करके हमारे इलाकों पर चीन का कब्जा हो गया था। ये तो रही इतिहास की पुरानी बात। मगर आज राजनाथ सिंह ने कहा कि इसके लिए वो नेहरू को दोषी नहीं मानते।

गडकरी ने भी दिया था बयान
कुछ ही दिनों पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र के लिए कांग्रेस का मजबूत होना जरूरी है। लगातार चुनावों में हारने वाली कांग्रेस फिर मजबूत बने और पार्टी के नेता निराश होकर पार्टी ना छोड़ें। यही मेरी इच्छा है। कांग्रेस पार्टी कमजोर हो रही है, इसीलिए देश की मुख्य विपक्षी पार्टी की जगह लेने के लिए क्षेत्रीय पार्टियां आगे आ रही हैं। देश के लिए यह शुभ लक्षण नहीं हैं।’

कांग्रेस ने की थी गडकरी की तारीफ
उन्होंने कहा, ‘जिनका कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास है, उनका विश्वास डगमगाना नहीं चाहिए। उन्हें पार्टी के साथ पूरी मजबूती से खड़े रहना चाहिए। हार से हताश होने की बजाए काम करते रहें। हार है आज तभी कल हो सकती जीत है।’ इस दरम्यान उन्होंने बीजेपी का वो दौर याद किया जब संसद में सिर्फ दो सीटें हुआ करती थीं। लेकिन उन्होंने कहा, ‘कार्यकर्ताओं की मेहनत से समय बदला और अटल बिहारी वाजपेयी के रूप में हमें अपना प्रधानमंत्री मिला। इसलिए ऐसी हालत में निराश होकर विचारधारा ना छोड़ें।

गडकरी शॉफ्ट हिंदुत्व नेता
गडकरी की गिनती शॉफ्ट नेताओं के तौर पर होती है। हर पार्टी के लोग उनकी इज्जत करते हैं और उनके कामों को भी सराहा जाता है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस से पूछा गया कि आपके फेवरेट नेता कौन हैं। तो उन्होंने बिना सोचे नितिन गडकरी का नाम लिया था। इसके अलावा ओवैसी, अजित पवार, अशोक गहलोत सहित तमाम नेता उनके फैन हैं। गडकरी के बयान की विपक्षियों ने खूब तारीफ की थी मगर बीजेपी की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। अब राजनाथ सिंह ने उसी से मिलता-जुलता बयान दिया है।

मोदी सरकार के एक और मंत्री का बयान
मोदी सरकार के एक और मंत्री हैं हरदीप सिंह पुरी। पुरी ने बीजेपी, कांग्रेस और मोदी सरकार को लेकर बयान दिया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) नहीं चाहती कि कांग्रेस पूरी तरह से गायब हो जाए क्योंकि विपक्ष की जरूरत है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने यह भी कहा कि अगर हमारे पास विपक्ष है, तो यह विपक्ष को तय करना है कि इसका नेतृत्व राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल या शरद पवार किसके द्वारा किया जाना चाहिए। मोदी सरकार के तीन-तीन बड़े मंत्री कांग्रेस को फिर से खड़ा करने की बात क्यों कह रहे हैं, ये तो नेता ही जान सकते हैं। मगर सवाल ये उठता है कि अचानक कांग्रेस मुक्त भारत से कांग्रेस युक्त भारत की बात कैसे होने लगी। खैर, ये सियासत है जनाब। इसको समझने के लिए शकीन बदायुनी का शेर मुकम्मल है।

काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ

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