मैं झुकूंगा नहीं… संजय राउत का आरोप, ‘लोगों को मार-पीटकर झूठे कागज बनाए जा रहे’

मुंबई

पात्रा चॉल भूमि घोटाले मामले में हिरासत में लिए जाने के बाद संजय राउत ने आरोप लगाया कि शिवसेना को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि संजय राउत झुकेगा नहीं और न ही शिवसेना छोड़ेगा। ईडी ने रविवार को तकरीबन 9 घंटे तक छापेमारी के बाद संजय राउत को हिरासत में लिया। ईडी की तरफ से संजय राउत को 27 जुलाई को नोटिस जारी किया गया था लेकिन संसद सत्र का हवाला देते हुए वह पेश नहीं हुए थे।

ईडी की ओर से हिरासत में लिए जाने के बाद संजय राउत ने मीडिया में कहा, ‘जिस प्रकार झूठी कार्रवाई, झूठे कागज, झूठे सबूत लोगों को मार-मारकर पीट-पीटकर बनाए जा रहे हैं, केवल महाराष्ट्र और शिवसेना को कमजोर करने के लिए है। लेकिन शिवसेना और महाराष्ट्र कमजोर नहीं होगा। संजय राउत झुकेगा नहीं और न ही शिवसेना छोड़ूंगा।’

हिरासत में जाने के बाद राउत का ट्वीट
संजय राउत ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘आप उस व्यक्ति को हरा नहीं सकते जो कभी हार नहीं मानता। झुकेंगे नहीं। जय महाराष्ट्र।’ ईडी के अधिकारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के कर्मियों के साथ रविवार सुबह सात बजे राउत के भांडुप उपनगर स्थित आवास ‘मैत्री’ पहुंचे और छापेमारी शुरू की थी। राउत ने कुछ भी गलत करने से इनकार किया और आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध लेने के लिए निशाना बनाया जा रहा है।

‘जांच एजेंसियों से बचाने के लिए बगावत की थी’
संजय राउत ने बागी विधायकों पर भी निशाना साधा। राउत ने कहा कि उन्हें ईमानदारी पूर्वक यह स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों से खुद को बचाने के लिए पार्टी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह किया था। राउत ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित साप्ताहिक लेख ‘रोखठोक’ में कहा, ‘विद्रोही समूह को यह कहना बंद करना चाहिए कि उन्होंने इसलिए पाला बदला क्योंकि शिवसेना ने हिंदुत्व को छोड़ दिया था। हिंदुत्व को बेवजह बदनाम क्यों कर रहे हैं? ईमानदारी दिखाते हुए कहिए कि सभी प्रवर्तन निदेशालय से खुद को बचाने के लिए भागे थे।’

‘गवली के करीबी को ईडी ने छोड़ दिया’
राउत ने दावा किया कि शिवसेना के नेता अर्जुन खोतकर ने ईमानदारी पूर्वक स्वीकार किया है कि वह दबाव में थे और यही कारण था कि वह विद्रोही गुट में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि ईडी ने शिवसेना सांसद भावना गवली के करीबी सहयोगी रईस खान को गिरफ्तार किया, लेकिन शिवसेना के खिलाफ गवली के विद्रोह करते ही खान को छोड़ दिया गया और गवली की जब्त संपत्ति पर से रोक हटा ली गई।

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