500 रुपये की पेंशन दिला दो साहब… खुद को जिंदा साबित करने को भटक रहे बुजुर्ग

गोंडा

दो बुजुर्ग जिंदा होने के बावजूद कागजो में मर चुके हैं, जिससे उनकी पेंशन बंद हो गई है। दोनों अधिकारियों की चौखट पर दुहाई देते-देते थक गए, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। 92 साल के भगौती प्रसाद और 70 वर्षीय जगदीश अज्ञात कारणों से कागजों में मृत घोषित कर दिए गए हैं। इससे 500 रुपये महीना मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन मिलनी बंद हो गई। मुख्य विकास अधिकारी गौरव कुमार ने कहा दोनों बुजुर्गों के मामले संज्ञान में आए हैं, जांच कराई जा रही है। इनकी पेंशन तत्काल प्रभाव से प्रभावी की जाएगी, ताकि इनको परेशानी न हो। वहीं जो भी कर्मचारी इसके लिए दोषी होगा, उस पर भी विभागीय कार्यवाही की जाएगी।

जिले के वजीरगंज ब्लाक के नियामतपुर के 92 साल के भगौती प्रसाद का कहना है कि मैं अभी जिंदा हूं, लेकिन कागज में पता नहीं कैसे मरा घोषित कर दिया। इससे करीब 3 साल से पांच रुपये मिलने वाली पेंशन बंद हो गई है। अगर सरकार मुझे कागज पर जिंदा कर दे तो पेंशन मिलने लगे और हमे किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। दूसरी तरफ नियामतपुर गांव के भीटिया मजरे के 70 वर्षीय जगदीश भी अभी जिंदा है और अज्ञात कारणों से कागजों में मर चुके है। इससे एक साल से इनकी भी पेंशन बंद हो गई है। दोनों बुजुर्गों की कही कोई सुनवाई नहीं हुई। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि दोनों बुजुर्गों के मामले संज्ञान में आए है और जांच कराई जा रही है। इनकी पेंशन तत्काल प्रभाव से प्रभावी की जाएगी ताकि इनको पेंशन मिल सके।

लापरवाह कर्मचारियों से होगी वसूली
उन्होंने यह भी कहा कि जो भी कर्मचारी इसके लिए दोषी होगा, उसके ऊपर कठोर से कठोर विभागीय कार्यवाही की जाएगी। सीडीओ से जब पूछा गया कि जब से पेंशन बंद हुई है, तब से मिलेगी। साथ ही बताया कि जांच के बाद जब कार्रवाई तय हो जाएगी, जिस कर्मचारी का दायित्व है उससे वसूली भी की जाएगी।

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