PM किसान सम्मान निधि योजना में फिर घोटाला, बिहार-झारखंड के लोगों के खाते में जा रहा पलवल का पैसा

फरीदाबाद

हर‍ियाणा के पलवल में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में फिर से घोटाला सामने आया है। पलवल के घुड़ावली गांव में रहने वाले 22 किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की राशि फर्जी दस्तावेज से हड़प ली गई। रकम पलवल के किसानों के नाम जारी हो रही थी, जबकि बिहार और झारखंड के लोगों के खाते में जा रही थी। इन लोगों ने फर्जी डॉक्यूमेंट्स के जरिए पलवल के किसानों के खातों के स्थान पर अपने बैंक अकाउंट को सम्मान निधि योजना से कनेक्ट करा लिया था। पलवल के किसानों को पांच से छह महीने तक रकम न मिली तो उन्होंने शिकायत की। जांच में पता चला कि रकम उनके नाम से हर महीने जारी हो रही है, लेकिन जिन अकाउंट में वह जा रही है वह इनके नहीं, बल्कि बिहार और झारखंड आदि राज्यों के रहने वाले हैं। आर्थिक अपराध शाखा की जांच के आधार पर कैंप थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।

कैंप थाना पुलिस इंचार्ज इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने बताया कि हथीन थाना के तहत गांव घुड़ावली निवासी नियाज मोहम्मद, हारूण, मोहम्मद साबिर, कृष्ण कुमार व शाहरुख सहित 22 लोगों ने 12 जनवरी को एसपी को शिकायत दी। कहा गया कि उनके नाम से जारी प्रधानमंत्री किसान सम्मान राशि को दूसरे खातों में जमा करवाया जा रहा है। योजना के तहत पांच-छह किस्त दूसरे खातों में जमा करवाई जा चुकी है।

कृषि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है। एसपी राजेश कुमार ने जांच 18 जनवरी को आर्थिक अपराध शाखा इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर जवाहर सिंह को दी। सब-इंस्पेक्टर ने बताया कि जांच के कृषि विभाग अधिकारियों से रिपोर्ट ली गई। कृषि विभाग अधिकारी रिपोर्ट देने में बार-बार मामले को लटकाते रहे। नोटिस देने की बात कहने के बाद रिपोर्ट दी गई। पाया गया कि जिन किसानों के नाम से राशि दूसरे खातों में जमा करवाई गई है, उनमें बिहार, झारखंड और दूसरे राज्यों के मोबाइल नंबर अपलोड हैं। बैंक अकाउंट भी अलग-अलग नामों से दर्ज है।

कैसे हड़पा किसानों का मुआवजा
पुलिस के मुताबिक किसानों के फर्जी दस्तावेज बनाकर, फर्जी लंबरदार व फर्जी पटवारी की मुहर बनवाकर किसानों का मुआवजा हड़पा गया है। जिन लोगों के नाम पर राशि की जारी की गई है, न तो उनके हस्ताक्षर और न ही उनके अंगूठे का निशान है। बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर भी अलग-अलग हैं। किसानों ने शंका जताई है कि इस मामले में स्थानीय नागरिक और कृषि विभाग के अधिकारियों की संलिप्त है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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