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बरेली की दुल्हनिया बनीं स्वरा भास्कर, फहाद अहमद के बारे में जानते हैं आप?

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बरेली

फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर अब बरेली की दुलहनिया बन गई हैं। उन्होंने फहाद अहमद से शादी की। स्वरा भास्कर अपने एक्टिंग करियर के साथ-साथ विभिन्न मुद्दों पर बेबाकी से राय रखने के लिए खासी चर्चित रही हैं। केंद्र सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर उन्होंने बेबाक राय रखी है। सोशल मीडिया पर वह हमेशा चर्चा में बनी रहती हैं। अभी उनकी शादी की खबरों ने चर्चा को गरमा दिया है। 9 अप्रैल 1988 को दिल्ली में जन्मी स्वरा को बरेली का छोरा भाया। 34 वर्षीय स्वरा भास्कर ने 31 वर्षीय फहाद से शादी कर सोशल मीडिया पर चर्चा के बाजार को गरमा दिया है। चर्चा उनके पति बने फहाद की हो रही है। हर कोई उनके बारे में जानना चाहता है। आइए हम आपको फहाद अहमद के बारे में बताते हैं।

विचार मिले और जीवनसाथी बन गए
मशहूर एक्टर के जीवनसाथी को लेकर खासी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है। उन्होंने जिस शख्स से शादी की है, उनका नाम फहाद अहमद है। फहाद और स्वरा के राजनीतिक विचार एक समान हैं। इसी ने दोनों को करीब लाने में बड़ी भूमिका निभाई। 16 फरवरी को दोनों ने शादी कर ली।

बरेली के रहने वाले हैं फहाद
फहाद अहमद उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के मूल निवासी हैं। उनका जन्म 2 फरवरी 1992 को बहेड़ी में हुआ था। बहेड़ी बरेली जिला मुख्यालय से करीब 48 किलोमीटर पड़ता है। फहाद राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता जिरार अहमद अलीगढ़ में समाजवादी पार्टी के नेता हैं।

एएमयू से स्नातक, टिस से एमफिल
फहाद अहमद ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से स्नातक तक की पढ़ाई की है। इसके बाद टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से उन्होंने सोशल वर्क में एमफिल किया। टिस में पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा। टिस स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव पद पर वे वर्ष 2017 और 2018 में चुने गए।

डिग्री विवाद को लेकर चर्चा में आए थे फहाद
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज में डिग्री विवाद में भी फहाद अहमद खासे चर्चित रहे। दरअसल, फहाद ने यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन एस. रामादोराई के हाथों से दीक्षांत समारोह में एमफिल की डिग्री लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद टिस ने उनके पीएचडी में रजिस्ट्रेशन से वंचित कर दिया। टाटा इंस्टीट्यूट ने फहाद के निर्णय को विश्वविद्यालय का अपमान करार दिया था।

सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर बनाई पहचान
फहाद ने मुंबई में अपनी पहचान सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर बनाई। एससी, एसटी और ओबीसी स्टूडेंट्स के फीस माफी के मुद्दे को उन्होंने छात्र नेता के तौर पर उठाया था। एंटी सीएए प्रोटेस्ट के दौरान उन्होंने कई रैलियों को संबोधित किया था। भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच के दौरान वानखेड़े स्टेडियम के बाद मूक प्रदर्शन का वे हिस्सा रहे थे। अगस्त क्रांति मैदान में दिसंबर 2019 में हुए आंदोलन का भी नेतृत्व किया था। वर्ष 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी ज्वाइन की। अबु आजमी और रईस शेख की मौजूदगी में पार्टी का दामन था। उन्हें समाजवादी पार्टी युवजन सभा का मुंबई और महाराष्ट्र का अध्यक्ष बनाया गया है।

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