उधार के 60 लाख वापस न करना पड़े, मकान मालिक ने PHD छात्र को मार डाला, शव के टुकड़े कर गंगनहर में फेंका

गाजियाबाद

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक पीएचडी स्कॉलर की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, मकान मालिक ने अपने यहां रहने वाले पीएचडी के छात्र की हत्या कर उसके शव के चार टुकड़े किए और उसे गंगनहर में फेंक दिया। मृतक छात्र के दोस्तों ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी समेत 6 लोगों को हिरासत में लिया है। पूछताछ की जा रही है।

अंकित खोखर नाम का पीएचडी का छात्र उमेश नाम के शख्स के यहां किराये पर रहता था। उमेश ने अंकित से बिजनस के लिए 60 लाख रुपये लिए थे। आरोप है कि पैसे लौटाने न पड़ें, इसलिए उमेश ने अंकित की हत्या कर दी और उसके शव के चार टुकड़े कर गंगनहर में फेंक दिया। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि अंकित अस्पताल में कंपाउंडर उमेश के साले प्रदीप का दोस्त था। उमेश ने अंकित की पहले गला घोंटकर हत्या की गई और फिर उसके टुकड़े किए गए। उमेश और उसकी पत्नी समेत 6 लोग मामले में हिरासत में लिए गए हैं, जिनसे पूछताछ की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, अंकित खोखर बागपत के मुकुंदपुर गांव का रहने वाला था और लखनऊ के बाबा साहेब अंबेडकर विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहा था। तीन महीने पहले ही उसने अपनी फाइल यूनिवर्सिटी में सबमिट की थी और गाजियाबाद आया था। यहां वह उमेश शर्मा के यहां किराये के मकान में रह रहा था। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। बताया गया कि अंकित ने अपनी पुश्तैनी प्रॉपर्टी बेचकर डेढ़ करोड़ रुपये खाते में ट्रांसफर कराए थे। 7 अक्टूबर को वह लापता हुआ और दो महीने तक कुछ पता नहीं लगा तो दोस्तों ने लापता रिपोर्ट थाने में लिखवाई।

दोस्तों ने बताया कि दो महीने से अंकित का कोई सुराग नहीं लगता था। उसका फोन ऑन था लेकिन कॉल रिसीव नहीं होता था। मैसेज के जवाब आते थे लेकिन लैंग्विज उसकी नहीं होती थी। उसके फोन नंबर के जरिए पुलिस ने पता लगाया कि अंकित के खाते से पैसे भी निकाले गए हैं। पुलिस ने बताया कि उमेश को अंकित के खाते में करोड़ों रुपये होने की जानकारी थी। सितंबर में उसने अंकित से बिजनस के लिए 60 लाख रुपये का कर्ज लिया था। उमेश को पता था कि अंकित के परिवार में कोई बचा नहीं था। ऐसे में अगर उसे मार दिया जाए तो पैसा वापस नहीं करना पड़ेगा।

अंकित की हत्या करने के बाद भी उमेश उसके खाते से पैसे निकालता रहा। अंकित का फोन उसके पास था, जिसमें नेट बैंकिंग चालू था। अक्टूबर से दिसंबर तक उसने अंकित के खाते से 40 लाख रुपये निकाले थे।

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