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देशभर की अदालतों में खाली हैं जज के इतने पद, सरकार ने जारी किया चौंकाने वाला आंकड़ा

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नई दिल्ली,

देश भर की जिला अदालतों में अभी भी 5850 जजों के पद खाली हैं. यानी निचली अदालतों में जजों के कुल मंजूर 25,042 पदों में से 19,192 पदों पर ही जज सेवारत हैं. लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने आंकड़ों के जरिए एक जनवरी 2020 से लेकर 19 दिसंबर 2022 यानी लगभग तीन साल का ब्योरा देते हुए बताया कि इस अवधि में सुप्रीम कोर्ट में 12 जजों की नियुक्ति हुई. हालांकि इस दौरान कई जज रिटायर भी हुए. क्योंकि 12 जजों की नियुक्ति के बावजूद आज की तारीख में सुप्रीम कोर्ट में 34 की कुल मंजूर संख्या के मुकाबले 28 जज सेवारत हैं. यानी छह जज कम हैं.

वहीं चार जनवरी को जस्टिस सैयद अब्दुल नजीर भी रिटायर होने जा रहे हैं. हालांकि कॉलेजियम ने हाई कोर्ट्स के पांच चीफ जस्टिस और जजों की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की सिफारिश कर रखी है. हालांकि 2023 में नौ जजों की सेवानिवृत्ति होनी है. जनवरी में जस्टिस अब्दुल नजीर और दिसंबर में जस्टिस संजय किशन कौल रिटायर होंगे. इस बीच सात जज सुप्रीम कोर्ट में अपना सेवाकाल पूरा करेंगे. रिजिजू ने संसद को बताया कि पिछले तीन सालों में देश के 25 हाईकोर्ट्स में 351 जजों की नियुक्ति हुई है. इसके बावजूद जजों के कुल मंजूरशुदा 1108 पदों में से 775 जज सेवारत हैं. यानी यहां भी 333 पद खाली हैं.

बता दें कि कानून मंत्री रिजिजू ने हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया की आलोचना की तो वहीं चीफ जस्टिस और कई बार जस्टिस कौल ने भी पीठ की ओर से कॉलेजियम सिस्टम की हिमायत की और अन्य प्रस्तावित सिस्टम को आड़े हाथों लिया. जजों की नियुक्ति में खामख्वाह की लेट लतीफी को लेकर कार्यपालिका ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से कम नामों की सिफारिश आने की बात कही तो न्यायपालिका ने सरकार पर आरोप लगाए कि वो उनकी सिफारिशों पर बेवजह बिना कोई ठोस वजह बताए कुंडली मार कर बैठी रहती है.

लंबित मुकदमों को लेकर भी सरकार के मंत्रियों ने न्यायपालिका की लंबी छुट्टियों और छोटे-मोटे मुकदमों पर ज्यादा ध्यान देने को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की तो इधर न्यायपालिका भी मौके पर अपनी बात कहने से नहीं चुकी. रिजिजू ने सदन में संविधान का हवाला देते हुए फिर कहा कि उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया सरकार के अधिकार क्षेत्र में ही है, लेकिन कोर्ट यानी चीफ जस्टिस के साथ सलाह मशवरा करने के बाद. लेकिन आज के दिन जजों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका बहुत सीमित कर दी गई है.

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