12.3 C
London
Wednesday, March 11, 2026
Homeराजनीतिदेशभर की अदालतों में खाली हैं जज के इतने पद, सरकार ने...

देशभर की अदालतों में खाली हैं जज के इतने पद, सरकार ने जारी किया चौंकाने वाला आंकड़ा

Published on

नई दिल्ली,

देश भर की जिला अदालतों में अभी भी 5850 जजों के पद खाली हैं. यानी निचली अदालतों में जजों के कुल मंजूर 25,042 पदों में से 19,192 पदों पर ही जज सेवारत हैं. लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने आंकड़ों के जरिए एक जनवरी 2020 से लेकर 19 दिसंबर 2022 यानी लगभग तीन साल का ब्योरा देते हुए बताया कि इस अवधि में सुप्रीम कोर्ट में 12 जजों की नियुक्ति हुई. हालांकि इस दौरान कई जज रिटायर भी हुए. क्योंकि 12 जजों की नियुक्ति के बावजूद आज की तारीख में सुप्रीम कोर्ट में 34 की कुल मंजूर संख्या के मुकाबले 28 जज सेवारत हैं. यानी छह जज कम हैं.

वहीं चार जनवरी को जस्टिस सैयद अब्दुल नजीर भी रिटायर होने जा रहे हैं. हालांकि कॉलेजियम ने हाई कोर्ट्स के पांच चीफ जस्टिस और जजों की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की सिफारिश कर रखी है. हालांकि 2023 में नौ जजों की सेवानिवृत्ति होनी है. जनवरी में जस्टिस अब्दुल नजीर और दिसंबर में जस्टिस संजय किशन कौल रिटायर होंगे. इस बीच सात जज सुप्रीम कोर्ट में अपना सेवाकाल पूरा करेंगे. रिजिजू ने संसद को बताया कि पिछले तीन सालों में देश के 25 हाईकोर्ट्स में 351 जजों की नियुक्ति हुई है. इसके बावजूद जजों के कुल मंजूरशुदा 1108 पदों में से 775 जज सेवारत हैं. यानी यहां भी 333 पद खाली हैं.

बता दें कि कानून मंत्री रिजिजू ने हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया की आलोचना की तो वहीं चीफ जस्टिस और कई बार जस्टिस कौल ने भी पीठ की ओर से कॉलेजियम सिस्टम की हिमायत की और अन्य प्रस्तावित सिस्टम को आड़े हाथों लिया. जजों की नियुक्ति में खामख्वाह की लेट लतीफी को लेकर कार्यपालिका ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से कम नामों की सिफारिश आने की बात कही तो न्यायपालिका ने सरकार पर आरोप लगाए कि वो उनकी सिफारिशों पर बेवजह बिना कोई ठोस वजह बताए कुंडली मार कर बैठी रहती है.

लंबित मुकदमों को लेकर भी सरकार के मंत्रियों ने न्यायपालिका की लंबी छुट्टियों और छोटे-मोटे मुकदमों पर ज्यादा ध्यान देने को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की तो इधर न्यायपालिका भी मौके पर अपनी बात कहने से नहीं चुकी. रिजिजू ने सदन में संविधान का हवाला देते हुए फिर कहा कि उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया सरकार के अधिकार क्षेत्र में ही है, लेकिन कोर्ट यानी चीफ जस्टिस के साथ सलाह मशवरा करने के बाद. लेकिन आज के दिन जजों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका बहुत सीमित कर दी गई है.

Latest articles

गौ संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य में आएगी ‘गौ सेवा नीति’— मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में गौ संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा को...

टीईटी निर्णय के विरोध में शिक्षक-कर्मचारी एकजुट, 13 मार्च को जिलों में ज्ञापन

भोपाल मध्य प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी एवं पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टीईटी परीक्षा को...

लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराने पर 6 निजी अस्पतालों को नोटिस — 31 मार्च के बाद संचालित पाए जाने पर होगी कार्रवाई

भोपाल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने लाइसेंस और पंजीयन का नवीनीकरण नहीं...

कमला नगर में युवक ने फांसी लगाकर की खुदकुशी

भोपाल राजधानी के कमला नगर थाना क्षेत्र स्थित मांडवा बस्ती में एक 24 वर्षीय युवक...

More like this

गौ संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य में आएगी ‘गौ सेवा नीति’— मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में गौ संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा को...

राष्ट्रीय स्तर के हारमोनियम वादक ने फांसी लगाकर दी जान

भोपाल राजधानी के बिलखिरिया थाना क्षेत्र में एक राष्ट्रीय स्तर के हारमोनियम वादक द्वारा आत्मघाती...

राजधानी में 55.50 लाख की सनसनीखेज लूट

भोपाल भोपाल के श्यामला हिल्स थाना क्षेत्र में एक प्रॉपर्टी डीलर से हुई 55 लाख...