टीटीपी सिर्फ मोहरा, पाकिस्‍तान पर कब्‍जा करना चाहता है तालिबान, भारत तक पैर फैलाने के खतरनाक इरादे

इस्‍लामाबाद

पाकिस्‍तान की सेना और अफगानिस्‍तान में डेरा जमाए तहरीक-ए-तालिबान आतंकियों के बीच जंग का आगाज हो गया है। राजधानी इस्‍लामाबाद को आत्‍मघाती बम हमले से दहलाने वाले टीटीपी ने पाकिस्‍तान की शक्तिशाली खुफिया एजेंसी आईएसआई के दो शीर्ष अधिकारियों की बर्बर तरीके से हत्‍या कर दी है। टीटीपी की ओर से बहुत दिन बाद आईएसआई पर इतना बड़ा हमला हुआ है। यही नहीं टीटीपी आतंकियों ने अब पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को भी जान से मारने की धमकी दी है। टीटीपी ने चेतावनी दी है कि शहबाज और बिलावल दोनों ही पाकिस्‍तानी सेना के साथ उनकी जंग से दूर रहें।

पीएम शहबाज और बिलावल दोनों ही इन दिनों खुलकर टीटीपी आतंकियों को धमकी दे रहे हैं और अफगानिस्‍तान की तालिबान सरकार को चेतावनी दे रहे हैं। पाकिस्‍तान के गृहमंत्री राणा सनाउल्‍ला ने अफगानिस्‍तान के अंदर घुसकर टीटीपी आतंकियों के खात्‍मे का ऐलान किया है। यही नहीं कहा यह भी जा रहा है कि अमेरिका भी टीटीपी के खिलाफ पाकिस्‍तान को मदद देने जा रहा है। इससे ताल‍िबानी भड़क उठे हैं और अफगानिस्‍तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि हम सीरिया नहीं हैं। किसी भी पाकिस्‍तानी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

टीटीपी आतंकियों के जरिए पाकिस्‍तान पर कब्‍जे की चाल
अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान पर गहरी नजर रखने वाले पत्रकारों और विशेषज्ञों का समूह ‘द खोरासान डायरी’ का मानना है कि तालिबान टीटीपी आतंकियों के जरिए पाकिस्‍तान पर कब्‍जे की चाल चल रहा है। यही नहीं टीटीपी आतंकी भी ठीक उसी तरह की चालें चल रहे हैं जिनके बल पर तालिबानी आतंकी अफगानिस्‍तान में सत्‍ता में आए हैं। अफगानिस्‍तान के तालिबानी आतंकी टीटीपी के जरिए पाकिस्‍तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वा प्रांत के कबायली इलाके में अपने प्रशासनिक ढांचे को स्‍थापित करने में जुट गए हैं।

भारत तक पैर फैलाना चाहता है तालिबान
अफगानिस्‍तान में हिंसा के दौर में तालिबान ने साल 2005 में ही समानांतर गवर्नरों और जिला गवर्नरों की नियुक्ति करनी शुरू कर दी थी। इसके बाद तालिबान ने 18 आयोगों का गठन किया जिन्‍होंने मंत्रालयों के रूप में काम करना शुरू कर दिया। इसमें सेना, वित्‍त और संस्‍कृति मंत्रालय शामिल था। तालिबान का सैन्‍य आयोग सबसे शक्तिशाली था। धीरे-धीरे तालिबान ने अफगानिस्‍तान के नए प्रांतों में भी अपनी पकड़ मजबूत की और वहां समानांतर गवर्नर का ऐलान कर दिया ताकि वे शासन कर सकें।

टीटीपी ने रक्षा से लेकर संस्‍कृति मंत्री तक का ऐलान किया
खोरासान डायरी का मानना है कि तालिबान के अफगानिस्‍तान पर कब्‍जे के बाद अब टीटीपी आतंकी भी इसी रणनीति पर जुट गए हैं। गतवर्ष फरवरी महीने में टीटीपी ने अपने ढांचे के पुर्नगठन का ऐलान किया। पाकिस्‍तान के कबायली इलाके को दो जोन उत्‍तरी और दक्षिणी में बांट दिया। पूरे इलाके को 7 प्रांतों में बांट दिया। प्रत्‍येक प्रांत में एक समानांतर गवर्नर की नियुक्ति कर दी। इसके अलावा खुफिया अधिकारी की नियुक्ति की गई है। इसके ठीक बाद टीटीपी ने अपना पहला जंगी अभियान शुरू कर दिया जिसे उसने तालिबान की तरह से अल बद्र नाम दिया। इसके बाद साल 2022 के अंत में टीटीपी ने अब पाकिस्‍तानी इलाकों के लिए अपने रक्षा से लेकर संस्‍कृति मंत्री तक का ऐलान कर दिया।

टीटीपी के कमांडर नूर वली मेहसूद ने दिसंबर 2021 में कहा था कि टीटीपी पाकिस्‍तान में तालिबान शासन का विस्‍तार है। वहीं पाकिस्‍तान की धमकी के बाद तालिबानी अब दावा कर रहे हैं कि टीटीपी आतंकी पाकिस्‍तान में ही शरण लिए हुए हैं। इस तरह वे टीटीपी के खिलाफ किसी सैन्‍य कार्रवाई से बच रहे हैं। वहीं पाकिस्‍तानी सेना तालिबान को अपनी दोस्‍ती का हवाला देकर टीटीपी के खिलाफ ऐक्‍शन के लिए कह रही है। यही नहीं डूरंड लाइन पर लगातार तालिबानी तोपें पाकिस्‍तानी सेना पर गरज रही हैं। तालिबान डूरंड लाइन को नहीं मानता है। यही नहीं तालिबानी पाकिस्‍तान के पेशावर शहर पर अपना दावा ठोकते हैं। तालिबान ने पाकिस्‍तान की सेना की ओर से लगाई बाड़ को भी निकाल दिया है।

उत्‍तरी भारत को तालिबानी शासन के अंतर्गत दिखाया
खोरासान डायरी ने कहा कि पाकिस्‍तान के भविष्‍य के हालात बहुत ही खराब दिखाई दे रहे हैं। अफगानिस्‍तान सीमा, खैबर पख्‍तूनख्‍वा और बलूचिस्‍तान में हिंसा के साथ अस्थिरता बढ़ सकती है। इसके अलावा इस हिंसा की आग अब पाकिस्‍तान के शहरी इलाकों जैसे इस्‍लामाबाद तक फैल सकती है। टीटीपी के एक आतंकी ने पिछले दिनों पाकिस्‍तानी संसद का एक वीडियो जारी किया था और लिखा था, ‘हम आ रहे हैं।’ इस बीच तालिबान के एक कट्टर समर्थक ने एक नक्‍शा जारी किया है जिसमें पाकिस्‍तान पर पूरी तरह से तालिबान का सफेद झंडा लहरा रहा है। यही नहीं इस नक्‍शे में उत्‍तरी भारत को भी तालिबानी शासन के अंतर्गत दिखाया गया है।

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