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सरकार को 95%, अडानी को 17%, लेकिन अंबानी को शून्य! जानिए ये क्या आंकड़ा है

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नई दिल्ली

कर्ज में डूबी बिजली कंपनी लैंको अमरकंटक पावर के देश के दो सबसे बड़े रईस गौतम अडानी और मुकेश अंबानी रेस में थे। लेकिन कंपनी के अधिकांश लेंडर्स ने सरकार के ऑफर के पक्ष में वोट दिया। दो सरकारी कंपनियों पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और आरईसी (REC) ने भी इसके लिए रिजॉल्यूशन प्लान दिया था। कर्ज की वैल्यू के हिसाब से 95% लेंडर्स ने PFC-REC के रिजॉल्यूशन प्लान के पक्ष में वोट दिया जबकि अडानी ग्रुप को केवल 17 फीसदी वोट मिले। वोटर्स के पास एक, ऑल्टरनेटिव या सभी प्लान्स के लिए वोट देने का अधिकार था। रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्लान को कोई भाव नहीं मिला। किसी भी लेंडर ने मुकेश अंबानी की इस कंपनी के प्लान को सपोर्ट नहीं किया।

लैंको अमरकंटक पावर इनसॉल्वेंसी प्रोसेस से गुजर रही है। पीएफसी और आरईसी का इस कंपनी पर कर्ज है। रिजॉल्यूशन प्लान पर वोट देने की अंतिम तारीख सोमवार को थी। रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल सौरभ कुमार तिकमनी ने तीनों रिजॉल्यूशन पर वोटिंग कराई। हालांकि माइनोरिटी सिक्योर्ड क्रेडिटर्स ने प्रॉसीड्स का कहना है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है। उनकी अपील पर एनसीएलटी 18 जनवरी को सुनवाई करेगा। मामले से जुड़े एक एडवाइजर ने कहा कि लेंडर्स ने प्लान के लिए वोट दे दिया है लेकिन रिजॉल्यूशन की प्रक्रिया एनसीएलटी का फैसला आने के बाद ही पूरी होगी।

अंबानी-अडानी ने किया था बॉयकॉट
पीएफसी और आरईसी ने 3,020 करोड़ रुपये अपफ्रंट पेमेंट का ऑफर दिया है। यह लेंडर्स के स्वीकृत दावों के 21 फीसदी के बराबर है। इन दो कंपनियों का लैंको अमरकंटक पावर के कुल कर्ज में 42 फीसदी हिस्सेदारी है। उनके पास कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स के फैसले पर वीटो करने का पावर थी। अडानी ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक दिसंबर को ऑक्शन प्रोसेस में हिस्सा नहीं लिया था। उनका आरोप था कि PFC-REC को फेवर करने के लिए लिए अंतिम क्षणों में बिडिंग प्रोसेस में बदलाव किया गया। इसलिए उनके पहले राउंड के ऑफर को ही वोटिंग के लिए रखा गया था। अडानी ग्रुप ने 2,950 करोड़ रुपये और रिलायंस ने 2,103 करोड़ रुपये अपफ्रंट पेमेंट का ऑफर दिया था।

लैंको अमरकंटक पावर का छत्तीसगढ़ में कोरबा-चांपा राज्य राजमार्ग पर कोल बेस्ड थर्मल पावर प्रोजेक्ट है। इसमें पहले चरण में 300-300 मेगावाट की दो यूनिट से बिजली पैदा की जा रही है। इससे हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को बिजली आपूर्ति की जा रही है। दूसरे चरण में दो यूनिट और बन रही हैं। इनमें से प्रत्येक की क्षमता 660 मेगावाट है। इसमें तीसरे चरण में भी 660 मेगावाट की दो यूनिट बननी हैं। इन पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है।

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