कला या कोई जादुई शक्ति… प्रयागराज में धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कैसे बताते हैं भविष्य?

प्रयागराज,

बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री ने गुरुवार को तीर्थराज प्रयागराज में डुबकी लगाई और संतो से मुलाकात की. इस दौरान आजतक से खास बातचीत में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पूरा संत समाज एक साथ है. भविष्य बताना कला है या शक्ति? इस सवाल का जवाब देते हुए बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह सिद्धि है.

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, ‘मैं सौभाग्यशाली हूं कि गंगा में डुबकी लगाई. संत समाज अब हिंदू समाज की ओर अग्रसर है.’ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मैं कोई राजनीतिक आदमी नही हूं, ऐसा मिलने का कोई प्लान नहीं है. इसी दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने रामचरितमानस के विरोध पर भी प्रतिक्रिया दी.

‘रामचरितमानस को विरोध करने वाले कैंसर रोगी’
रामचरितमानस जलाने और उसके विरोध पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि ऐसे लोग कैंसर के रोगी हैं, इन्हें भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है. एक बार फिर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अगर हम सब साथ हो तो भारत हिंदू राष्ट्र होगा, भारत हिंदू राष्ट्र की ओर अग्रसर है, मैं संतो से मिला नहीं हूं बल्कि उनका आशीर्वाद लिया है, उनकी चरणों की धूल ली है.

धीरेंद्र शास्त्री ने संगम में किया स्नान
गौरतलब है कि बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री आज प्रयागराज पहुंचे हैं. यहां उन्होंने संगम में स्नान किया और उसके बाद माघे मेले में संतों से मुलाकात की. धीरेंद्र शास्ती आज श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी वायुदेवानांद के शिविर भी जाएंगे. इसके बाद उकने आचार्यबाड़ा में स्वामी राघवाचार्य के शिविर जाने की भी चर्चा है.

कैसे चर्चा में आए धीरेंद्र शास्त्री?
बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री उस वक्त से काफी चर्चा में हैं, जबसे महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने उन पर अंधविश्वास और जादू-टोना को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है. समिति के अध्यक्ष श्याम मानव ने दावा किया था कि धीरेंद्र शास्त्री ‘दिव्य दरबार’ और ‘प्रेत दरबार’ की आड़ में ‘जादू-टोना’ को बढ़ावा देते हैं.

इन आरोपों पर जवाब देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया था कि वो कोई अंधविश्वास नहीं फैलाते और न ही किसी की समस्या दूर करते हैं. धीरेंद्र शास्त्री ने ये भी कहा था कि ‘हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार.’ इसके बाद से धीरेंद्र शास्त्री के दावों को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई थी. कुछ लोग इसे आस्था का मुद्दा बता रहे हैं, तो कुछ लोग अंधविश्वास बताकर धीरेंद्र शास्त्री पर सवाल खड़े कर रहे थे.

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