‘फडणवीस की वजह से जीता चुनाव’, BJP को क्रेडिट देने वाले MVA प्रत्याशी सुधाकर अड़बाले कौन?

नागपुर

नागो गनार ने भाजपा के समर्थन से महाराष्ट्र राज्य शिक्षक परिषद से चुनाव लड़ा था लेकिन, उन्हें सत्ता विरोधी लहर का झटका लगा। पहले राउंड की समाप्ति पर सुधाकर अड़बाले को 14069 वोट मिले जबकि नागो गानार को 6366 वोट मिले। सुधाकर अड़बाले विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता है। वह मूलता चंद्रपुर जिले के हैं। गणित के टीचर अड़बाले शुरू से कांग्रेस विचारधारा वाले विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ से जुड़े थे। अड़बाले को एनजी गानार से दो गुना वोट मिले हैं। पुरानी पेंशन को लेकर वो आवाज बुलंद करते रहे हैं। अड़बाले को 14 हजार 61 वोट मिले हैं जबकी एनजी गानार 6 हजार 309 वोट मिले हैं। हाल में हुए नागपुर में शीतकालीन अधिवशेन में पुरानी पेंशन को लेकर मोर्चा निकाला था।

देवेंद्र फडणवीस के POS वाले बयान की चर्चा
अड़बाले की जीत के पीछे एनजी गाना के प्रति बढ़ रही एंटी इंक्यूबेंसी अहम वजह बताई जा रही है। नागपुर संभाग में प्रतिष्ठित शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट जीतने के बाद अड़बाले सातवें आसमान पर दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि अपनी जीत का श्रेय राज्य विधानसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान को जाता है, जिसमें उन्होंने पुरानी पेंशन योजना की वापसी से इनकार किया था। अड़बाले ने कहा, ‘फडणवीस के बयान ने महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों और शिक्षकों को निराश किया था, जिसने लोग मेरे पक्ष में झुक गए। सभी संगठनों, विशेष रूप से एमवीए घटक – कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (यूबीटी) के सामूहिक प्रयासों ने भी शानदार जीत में योगदान दिया। मैं उन शिक्षकों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझे वोट दिया। मैं पिछले 12 साल से विभिन्न मंचों पर उनके मुद्दों को उठा रहा था। सरकार के खिलाफ शिक्षकों में बड़ा आक्रोश है, जिसे उन्होंने मेरी जीत सुनिश्चित कर दर्ज कराया है।’

बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है नागपुर शिक्षक संघ
नागपुर शिक्षक संघ को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। जिसमे उन्होंने सेंध लगाई है। इसके अलावा नागपुर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस का गृह जिला भी है। विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ की स्थापना 1946 में हुई थी। कांग्रेस ने एक साल पहले सुधाकर अड़बाले को काम शुरू करने का आदेश दिया था। हालांकि माविया की सभा में यह सीट शिवसेना के खाते में चली गई। नासिक में, निर्वाचन क्षेत्रों की अदला-बदली की गई क्योंकि सुधीर तांबे ने कांग्रेस से आवेदन दायर नहीं किया। इसमें शिवसेना ने नागपुर सीट से अपना उम्मीदवार वापस ले लिया। माविया ने सुधाकर अड़बाले को अपना समर्थन देने की घोषणा की।

2018 में टीचर पद से रिटायर हुए सुधाकर अड़बाले
चंद्रपुर निवासी अड़बाले ने बीएससी (गणित) और बीएड करने के बाद 2018 में सेवानिवृत्त होने तक घुगस स्थित जनता विद्यालय में शिक्षक के रूप में काम किया। वह 2013 से शिक्षकों, विशेषकर पुरानी पेंशन योजना के मुद्दों को उठाते रहे हैं। उन्होंने 2015 में चंद्रपुर में गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में अतिरिक्त वर्गों की मंजूरी की मांग को लेकर ‘जेल भरो आंदोलन’ में लगभग 1,000 शिक्षकों का नेतृत्व किया था।

पिछले साल निकाला था विशाल मार्च
अड़बाले ने कहा, ‘यह एमवीए की जीत है और इसका पूरा श्रेय अड़बाले को है जो डेढ़ साल से चुनाव की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कई लोगों को अपने संगठन में लाया, पिछले साल दिसंबर में एक लाख से अधिक शिक्षकों का एक बड़ा विरोध मार्च विधानसभा में उनकी मांगों के लिए निकाला। यह जीत एमवीए के ढाई साल के शासन को मतदाताओं की स्वीकृति का भी प्रमाण है।’

नागो गाणार ने बीजेपी पर फोड़ा ठीकरा
जनादेश को स्वीकार करते हुए, बीजेपी प्रत्याशी ने ‘पुरानी पेंशन योजना’ सहित कई कारकों को अपने नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बड़ी संख्या में मतदाताओं ने मुझे खारिज कर दिया। हमारे महाराष्ट्र राज्य शिक्षा परिषद (MRSP) से लेकर भाजपा के सदस्यों तक, सभी ने मेरे अभियान के दौरान कड़ी मेहनत की। मैं शिक्षकों के अधिकारों के लिए लड़ना जारी रखूंगा और मेरी सेवानिवृत्ति का कोई सवाल ही नहीं है। मैं अड़बाले की भी पूरी मदद करूंगा, जो अब इस क्षेत्र के शिक्षकों के प्रतिनिधि हैं।’

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