भारत को बड़ा झटका! चाहकर भी नहीं मना पाया रूस को

नई दिल्ली,

भारत और रूस के बीच रुपये में व्यापार को लेकर चल रही बातचीत विफल रही है. महीनों तक चली बातचीत के बाद भी भारत रूस को अपने खजाने में रुपया रखने पर राजी नहीं कर पाया जिसके बाद द्विपक्षीय व्यापार को रुपये में निपटाने के प्रयासों को निलंबित कर दिया गया है. इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो भारतीय अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी दी है. अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच रुपये में व्यापार के प्रयास असफल रहे हैं.

भारत के लिए बड़ा झटका
यह रूस से सस्ता तेल और कोयला खरीदने वाले भारतीय आयातकों के लिए एक बड़ा झटका होगा. भारत के ये आयातक इस बात का इंतजार कर रहे थे कि भारत-रूस के बीच स्थायी रुपया भुगतान तंत्र स्थापित हो जाए जिससे उनकी मुद्रा रूपांतरण लागत कम हो.

भारत और रूस के बीच व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है. पहले भारत रूस से जितनी मात्रा में हथियारों की खरीद करता था, उतने ही मूल्य की अपनी चीजों को रूस को निर्यात करता था. लेकिन यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से रूस से भारत का आयात 400 फीसद बढ़ गया है जबकि निर्यात लगभग 14 फीसद कम हो गया है. इस व्यापार घाटे को पाटने के लिए दोनों देशों ने रुपये में व्यापार के लिए बातचीत शुरू की थी लेकिन अब यह नाकाम हो गया है.

रूस के बैंकों में पड़े हैं भारत के अरबों रुपये
एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि रूस का मानना है कि अगर भारत के साथ रुपये में भुगतान तंत्र को अपनाया जाए तो हर साल रूस के पास 40 अरब डॉलर से अधिक रुपया जमा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि रूस का मानना है कि इतना ज्यादा रुपया जमा करना रूस के लिए किसी काम का नहीं है.

भारतीय रुपये को पूरी तरह से दूसरे देशों की मुद्रा में नहीं बदला जा सकता है. वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी महज 2 फीसद है जिस कारण देश भारतीय रुपये को अपने पास नहीं रखना चाहते हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक ने जुलाई 2022 में रुपये में भुगतान तंत्र की घोषणा की थी. इसके बाद से भारत ने रूस से व्यापार के लिए कई बार रुपये में भुगतान किया भी है. इस कारण रूस के बैंकों में भारत के अरबों रुपये पड़े हुए हैं. रूस उस पैसे को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता क्योंकि पश्चिम ने उस पर प्रतिबंध लगाए हैं. ऐसे में उसके बैंकों में पड़े रुपये अपना मूल्य खोते जा रहे हैं. भारत और रूस ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार को सुविधाजनक बनाने को लेकर बात की लेकिन दिशानिर्देशों को औपचारिक रूप नहीं दिया गया.

भारत रूस से अपने अधिकतर व्यापार के लिए डॉलर के भुगतान करता है. लेकिन अब संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा दिरहम में भी व्यापार के कुछ हिस्से का भुगतान किया जा रहा है. दूसरे भारतीय अधिकारी ने कहा कि रूस अपने बैंकों में रुपये नहीं रखना चाहता. वो चाहता है कि भारत उसे चीनी मुद्रा युआन या अन्य मुद्राओं में भुगतान करे.

‘रुपये में व्यापार तंत्र नहीं कर रहा काम’
मामले से परिचित एक तीसरे सूत्र ने बताया, ‘हम रुपये में व्यापार के भुगतान को और आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं, यह तंत्र अभी काम नहीं कर रहा है. भारत ने बहुत कोशिश की कि रुपये में भुगतान तंत्र पर रूस से बात बन जाए, लेकिन सभी प्रयास असफल रहे हैं.

एक अन्य भारतीय अधिकारी ने बताया कि पिछले साल 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से, रूस से भारत का आयात 5 अप्रैल तक बढ़कर 51.3 अरब डॉलर हो गया है. पिछले साल की समान अवधि में यह आयात 10.6 अरब डॉलर था.

पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस ने भारत को भारी छूट पर कच्चा तेल बेचा जिस कारण युद्ध शुरू होने के बाद से 5 अप्रैल तक की अवधि में तेल का आयात बारह गुना बढ़ गया था. भारतीय अधिकारी ने कहा कि इसी अवधि में भारत से निर्यात पिछले वर्ष के 3.61 अरब डॉलर से थोड़ा कम होकर 3.43 अरब डॉलर रह गया है.एक अन्य अधिकारी ने कहा कि रुपये में भुगतान तंत्र नाकाम होने के बाद दोनों देशों ने अन्य विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है. हालांकि, अधिकारी ने इसका ब्योरा नहीं दिया.

रुपये में भुगतान तंत्र फेल लेकिन व्यापार पर नहीं कोई असर
सूत्रों ने कहा है कि प्रतिबंधों और भुगतान संबंधी मुद्दों के बावजूद रूस के साथ व्यापार जारी है. एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘अभी हम दिरहम और अन्य मुद्राओं में कुछ भुगतान कर रहे हैं, लेकिन अभी भी सबसे अधिक व्यापार डॉलर में ही हो रहा है. व्यापार के लिए भुगतान अलग-अलग तरीकों से हो रहा है, तीसरे पक्ष के देशों का भी उपयोग किया जा रहा है.’अधिकारियों ने कहा कि भारत फिलहाल तीसरे देश के जरिए भी में रूस के बाहर कुछ व्यापार भुगतान कर रहा है.

दूसरे अधिकारी ने कहा, ‘रूस के साथ व्यापार भुगतान करने के लिए तीसरे पक्ष का इस्तेमाल किया जा रहा है. स्विफ्ट (इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम) ने रूस की तरह अन्य देशों के साथ लेन-देन करने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाए हैं. इसलिए तीसरे देश को भुगतान किया जा रहा है जो रूस के साथ अपने व्यापार के लिए इसे इस्तेमाल कर सकते हैं.’ अधिकारी से जब यह पूछा गया कि क्या रूस को व्यापार भुगतान चीन के जरिए भी किया जा रहा है, अधिकारी ने कहा, ‘हां, चीन भी इसमें शामिल है.’

 

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