11.3 C
London
Saturday, May 2, 2026
Homeराज्यमणिपुर में फिर बिगड़े हालात… घरों को किया आग के हवाले, लगाया...

मणिपुर में फिर बिगड़े हालात… घरों को किया आग के हवाले, लगाया गया कर्फ्यू, 5 दिन के लिए इंटरनेट भी बंद

Published on

नई दिल्ली

मणिपुर में एक बार फिर जमीन पर हालात बिगड़ गए हैं। राजधानी इंफाल के न्यू लाम्बुलेन इलाके में लोगों ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया है। स्थिति को देखते हुए सोमवार को सुबह 6 बजे से कर्फ्यू लगा दिया गया और पांच दिन के लिए इंटरनेट सेवाओं को भी सस्पेंड कर दिया गया है।

इंफाल में बिगड़े हालात, आगजनी
बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह से ही राजधानी इंफाल में कई जगहों पर हिंसक घटनाओं की खबर थी। असल में न्यू चेकॉन इलाके के एक बाजार में मैतई और कुकी समुदाय के बीच मारपीट हो गई। वो मारपीट ही बाद में और ज्यादा हिंसक रूप ले गई और खाली घरों को आग के हवाले कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए एक बार फिर सेना और अर्धसैनिक बल को जमीन पर तैनात कर दिया गया है।

पहले से था अंदेशा, इंटरनेट सस्पेंड
वैसे मणिपुर प्रशासन को पहले इस बात का अहसास था कि राज्य में एक बार फिर स्थिति तनावपूर्ण बन सकती है। इसी वजह से रविवार को ही पांच और दिनों के लिए इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया गया था। उस समय गृह मंत्रालय ने एक जारी बयान में कहा था कि इस बात का अंदेशा है कि कुछ आसामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए हेट स्पीच, हेट वीडियो को बढ़ावा दें जिससे कानून व्यवस्था को चुनौती दी जा सके। अब सोमवार को वैसी ही स्थिति ब गई, हिंसा हुई, आगजनी हुई और कर्फ्यू भी फिर लगाना पड़ गया। अभी के लिए पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

मणिपुर में इस साल सबसे पहले हिंसा 3 मई को भड़की थी। तब तोरबंग इलाके में आगजनी हुई थी और जमकर बवाल काटा गया था। उसके बाद कई दिनों तक जमीन पर हालात बेकाबू रहे थे, राज्य सरकार को गोली मारने का आदेश भी जारी करना पड़ गया था। उस समय सेना को भी मदद के लिए बुला लिया गया था। उस हिंसा में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

मणिपुर में हिंसा का क्या कारण?
अब इस बार की हिंसा को तभी ठीक तरह से समझा जा सकता है, जब मणिपुर के बैकग्राउंड को भी समझ लिया जाए। असल में मणिपुर में तीन समुदाय सक्रिय हैं- इसमें दो पहाड़ों पर बसे हैं तो एक घाटी में रहता है। मैतेई हिंदू समुदाय है और 53 फीसदी के करीब है जो घाटी में रहता है। वहीं दो और समुदाय हैं- नागा और कुकी, ये दोनों ही आदिवासी समाज से आते हैं और पहाड़ों में बसे हुए हैं। अब मणिपुर का एक कानून है, जो कहता है कि मैतेई समुदाय सिर्फ घाटी में रह सकते हैं और उन्हें पहाड़ी क्षेत्र में जमीन खरीदने का कोई अधिकार नहीं होगा। ये समुदाय चाहता जरूर है कि इसे अनुसूचित जाति का दर्जा मिले, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है। हाल ही में हाई कोर्ट ने एक टिप्पणी में कहा था कि राज्य सरकार को मैतेई समुदाय की इस मांग पर विचार करना चाहिए। उसके बाद से राज्य की सियासत में तनाव है और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है।

 

Latest articles

बरगी क्रूज हादसे में सीएम की बड़ी कार्रवाई, पायलट समेत 3 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त, मैनेजर निलंबित

भोपाल। बरगी जलाशय में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई...

‘बगिया के विष्णु’ का विकास विज़न : सुशासन से जन-जन तक पहुँचती सरकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीते लगभग ढाई वर्षों में शासन की कार्यशैली ने विकास की...

जनगणना 2027 का महा-अभियान शुरू: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वयं भरी अपनी जानकारी, नागरिकों से की खास अपील

जयपुर। राजस्थान में 'जनगणना 2027' के पहले चरण 'मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना'...

युवाओं को पेपरलीक से मिली मुक्ति, अब विदेशी भाषाओं के हुनर से वैश्विक मंच पर भरेंगे उड़ान : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रदेश के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर...

More like this

‘बगिया के विष्णु’ का विकास विज़न : सुशासन से जन-जन तक पहुँचती सरकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीते लगभग ढाई वर्षों में शासन की कार्यशैली ने विकास की...

जनगणना 2027 का महा-अभियान शुरू: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वयं भरी अपनी जानकारी, नागरिकों से की खास अपील

जयपुर। राजस्थान में 'जनगणना 2027' के पहले चरण 'मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना'...

युवाओं को पेपरलीक से मिली मुक्ति, अब विदेशी भाषाओं के हुनर से वैश्विक मंच पर भरेंगे उड़ान : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रदेश के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर...