32.9 C
London
Wednesday, June 24, 2026
Homeराज्यमणिपुर में फिर बिगड़े हालात… घरों को किया आग के हवाले, लगाया...

मणिपुर में फिर बिगड़े हालात… घरों को किया आग के हवाले, लगाया गया कर्फ्यू, 5 दिन के लिए इंटरनेट भी बंद

Published on

नई दिल्ली

मणिपुर में एक बार फिर जमीन पर हालात बिगड़ गए हैं। राजधानी इंफाल के न्यू लाम्बुलेन इलाके में लोगों ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया है। स्थिति को देखते हुए सोमवार को सुबह 6 बजे से कर्फ्यू लगा दिया गया और पांच दिन के लिए इंटरनेट सेवाओं को भी सस्पेंड कर दिया गया है।

इंफाल में बिगड़े हालात, आगजनी
बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह से ही राजधानी इंफाल में कई जगहों पर हिंसक घटनाओं की खबर थी। असल में न्यू चेकॉन इलाके के एक बाजार में मैतई और कुकी समुदाय के बीच मारपीट हो गई। वो मारपीट ही बाद में और ज्यादा हिंसक रूप ले गई और खाली घरों को आग के हवाले कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए एक बार फिर सेना और अर्धसैनिक बल को जमीन पर तैनात कर दिया गया है।

पहले से था अंदेशा, इंटरनेट सस्पेंड
वैसे मणिपुर प्रशासन को पहले इस बात का अहसास था कि राज्य में एक बार फिर स्थिति तनावपूर्ण बन सकती है। इसी वजह से रविवार को ही पांच और दिनों के लिए इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया गया था। उस समय गृह मंत्रालय ने एक जारी बयान में कहा था कि इस बात का अंदेशा है कि कुछ आसामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए हेट स्पीच, हेट वीडियो को बढ़ावा दें जिससे कानून व्यवस्था को चुनौती दी जा सके। अब सोमवार को वैसी ही स्थिति ब गई, हिंसा हुई, आगजनी हुई और कर्फ्यू भी फिर लगाना पड़ गया। अभी के लिए पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

मणिपुर में इस साल सबसे पहले हिंसा 3 मई को भड़की थी। तब तोरबंग इलाके में आगजनी हुई थी और जमकर बवाल काटा गया था। उसके बाद कई दिनों तक जमीन पर हालात बेकाबू रहे थे, राज्य सरकार को गोली मारने का आदेश भी जारी करना पड़ गया था। उस समय सेना को भी मदद के लिए बुला लिया गया था। उस हिंसा में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

मणिपुर में हिंसा का क्या कारण?
अब इस बार की हिंसा को तभी ठीक तरह से समझा जा सकता है, जब मणिपुर के बैकग्राउंड को भी समझ लिया जाए। असल में मणिपुर में तीन समुदाय सक्रिय हैं- इसमें दो पहाड़ों पर बसे हैं तो एक घाटी में रहता है। मैतेई हिंदू समुदाय है और 53 फीसदी के करीब है जो घाटी में रहता है। वहीं दो और समुदाय हैं- नागा और कुकी, ये दोनों ही आदिवासी समाज से आते हैं और पहाड़ों में बसे हुए हैं। अब मणिपुर का एक कानून है, जो कहता है कि मैतेई समुदाय सिर्फ घाटी में रह सकते हैं और उन्हें पहाड़ी क्षेत्र में जमीन खरीदने का कोई अधिकार नहीं होगा। ये समुदाय चाहता जरूर है कि इसे अनुसूचित जाति का दर्जा मिले, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है। हाल ही में हाई कोर्ट ने एक टिप्पणी में कहा था कि राज्य सरकार को मैतेई समुदाय की इस मांग पर विचार करना चाहिए। उसके बाद से राज्य की सियासत में तनाव है और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है।

 

Latest articles

लापरवाह ठेकेदारों पर कसेगा शिकंजा, तीन दिन में काम पूरा न होने पर होंगे ब्लैक लिस्ट : राज्यमंत्री कृष्णा गौर

भोपाल। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने विकास...

भेल में यूनियन चुनाव की बढ़ी चुनौती, 20 प्रतिशत वोट के बिना नहीं मिलेगी मान्यता

भोपाल। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) भोपाल में मान्यता प्राप्त यूनियन के आगामी चुनाव...

भेल के शीर्ष अधिकारियों ने आम कर्मचारियों की तरह कतार में खड़े होकर किया भोजन, कैंटीन व्यवस्था का लिया जायजा

भोपाल। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल), भोपाल की प्लांट कमेटी की बैठक में हेस्टू...

मध्य प्रदेश में 52% कम बारिश, मानसून की देरी से आधा सूखा जून, 4 जिलों में लू, 30 में बारिश का अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक में हो रही देरी का असर बारिश...

More like this

सोमनाथ मंदिर राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान, सांस्कृतिक...

जिला आधारित विकास मॉडल विकसित राजस्थान का आधार : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जिला आधारित विकास मॉडल विकसित राजस्थान की...

विकसित भारत शिक्षा अधिनियम विधेयक-2025 पर सीएम भगवंत मान की आपत्ति, केंद्र से पुनर्विचार की मांग

चंडीगढ़। भगवंत मान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर प्रस्तावित ‘विकसित...