25.3 C
London
Saturday, May 30, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयभारतीय मूल की होकर भारत से कैसी नफरत? लाखों छात्रों पर भारी...

भारतीय मूल की होकर भारत से कैसी नफरत? लाखों छात्रों पर भारी पड़ेगा सुएला ब्रेवरमैन का यह नया नियम

Published on

लंदन

ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एक बुरी खबर है। सात समंदर पार घर से दूर रहने वाले जो छात्र अपने परिवार को ब्रिटेन लाना चाहते हैं, वे अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। ब्रिटिश सरकार ने एक नई इमीग्रेशन कार्रवाई की घोषणा की है। सरकार ने मंगलवार को सभी विदेशी छात्रों के लिए एक नई इमीग्रेशन कार्रवाई की घोषणा की जिसका असर हजारों भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है। नया नियम ब्रिटेन के संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के अपने परिवार के सदस्यों को देश में लाने के उनके वीजा अधिकार को प्रभावित करेगा।

ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने हाउस ऑफ कॉमन्स में एक लिखित बयान में कहा कि वर्तमान में रिसर्च प्रोग्राम्स से जुड़े पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ही अपने आश्रितों के रूप में बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता सहित परिवार के सदस्यों को ब्रिटेन लाने की अनुमति दी जाएगी। भारतीय मूल की मंत्री ने कहा कि दिसंबर 2022 में समाप्त हुए वर्ष में छात्रों के आश्रितों को लगभग 1,36,000 वीजा दिए जाने के बाद उपायों का नया पैकेज बेहद जरूरी था।

‘बेईमान’ एजेंटों पर नकेल कसने की तैयारी
उन्होंने कहा कि 2022 के आश्रितों का आंकड़ा 2019 के 16,000 के आंकड़े से आठ गुना ज्यादा है। मंत्री ने ‘बेईमान’ शिक्षा एजेंटों पर नकेल कसने के लिए कदम उठाने का भी वादा किया और कहा कि ऐसे लोग शिक्षा की जगह आव्रजन बेचने के लिए अनुचित साधनों की मदद ले सकते हैं। शैक्षिक क्षेत्र और प्रमुख हितधारकों के साथ परामर्श के बाद नए प्रतिबंध ‘जल्द से जल्द’ लागू होने की उम्मीद है।

भारतीय छात्रों पर पड़ेगा सबसे बड़ा असर
ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला भारतीय मूल की हैं और उनके इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर ही पड़ेगा। ब्रिटेन के उच्च शिक्षा संस्थानों की एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी छात्र ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में सुविधाएं लेने से 10 गुना ज्यादा योगदान कर देते हैं और इनमें भारतीय छात्रों की एक बड़ी संख्या है। भारतीयों ने हाल ही में ब्रिटेन की ओर से सबसे अधिक स्टडी वीजा हासिल कर चीनियों को पीछे छोड़ दिया है। इस वीजा को हासिल करने वाले भारतीय सबसे अधिक संख्या में हैं।

आश्रितों के मामले में दूसरे नंबर पर भारतीय
2020-21 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 87,045 भारतीय छात्र इनरोल हुए थे। यह आंकड़ा चीन (99,965) से कम और नाइजीरिया (32,945) से ज्यादा था। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार अपने साथ आश्रितों को ब्रिटेन लाने वाले सबसे अधिक छात्र नाइजीरिया और भारत के हैं जिनके आश्रितों को 2022 में 1,35,788 वीजा दिए गए जो 2019 से 16,047 ज्यादा थे। छात्रों के साथ आने वाले आश्रितों की संख्या के मामले में नाइजीरियाई छात्र पहले और भारतीय दूसरे नंबर पर हैं।

Latest articles

एनटीपीसी बोंगाईगांव को दोहरा राष्ट्रीय सम्मान: सुरक्षा और सीएसआर में उत्कृष्टता के लिए मिले दो प्रतिष्ठित पुरस्कार, स्वर्ण श्रेणी में मारी बाजी

नई दिल्ली। परिचालन उत्कृष्टता, कार्यस्थल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास के प्रति अपनी...

विधायक सबनानी पहुंचे जनता के द्वार: रोशनपुरा और राहुल नगर बस्ती का किया निरीक्षण, अधिकारियों को दिए जनसमस्याएं तुरंत सुलझाने के निर्देश

भोपाल। दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक भगवानदास सबनानी ने शुक्रवार को अपने क्षेत्र की...

पद्मश्री गोडबोले दंपति से मिले सीएम विष्णुदेव साय: बोले- ‘बस्तर के लिए इनका 4 दशक का समर्पण मानवता की असाधारण मिसाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में बस्तर के...

More like this

नीदरलैंड ने लौटाई विरासत, PM मोदी को सौंपीं चोल राजा की 1 हजार साल पुरानी निशानियां, जानें क्या है इनकी खासियत?

एम्सटर्डम। पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारतीय संस्कृति और सभ्यता के लिए...

सीजफायर तोड़ अमेरिका ने ईरान पर फिर बमबारी की, होर्मुज में 1500 जहाज फंसे

ट्रम्प बोले- डील नहीं की तो और हमले करेंगे तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी सेना ने ईरान...