केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ AAP को मिला KCR का साथ, बोले- आज आपातकाल से भी बदतर हालात

नई दिल्ली,

दिल्ली सरकार के खिलाफ लाए गए केंद्र के अध्यादेश को लेकर सीएम केजरीवाल समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं. इसी सिलसिले में उन्होंने शनिवार को केसीआर से मुलाकात की. दिल्ली के सीएम केजरीवाल महाराष्ट्र के बाद अब तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद पहुंचे हैं. यहां केसीआर और केजरीवाल ने मुलाकात के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान केसीआर ने केजरीवाल को अध्यादेश के खिलाफ समर्थन दिया, साथ ही कहा, केंद्र सरकार को ये अध्यादेश वापस लेना चाहिए. इस मौके पर पंजाब सीएम भगवंत मान भी मौजूद रहे.

केसीआर ने कही ये बात
प्रेस कॉन्फ्रेंस में केसीआर ने कहा कि, ‘पीएम मोदी को अध्यादेश वापस लेना चाहिए, हम इसकी मांग करते हैं. यह समय आपातकाल के दिनों से भी बदतर है, आप (केंद्र) लोगों द्वारा चुनी गई सरकार को काम करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं.तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने इस दौरान यह भी कहा कि केंद्र गैर भाजपा सरकारों को काम नहीं करने दे रही है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी बहुत लोकप्रिय है.

मोदी सरकार ने किया दिल्ली की जनका का अपमानः केसीआर
पार्टी ने नगर निगम चुनाव जीता. बीजेपी ने उनके कामकाज में अड़ंगा लगाया और आखिर में दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिकारियों को दिल्ली सरकार के तहत काम करना चाहिए, न कि राज्यपाल के निर्देश पर. अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कोई सम्मान नहीं है, तो यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसा कि आपातकाल का समय था. इस तरह बीजेपी और इंदिरा गांधी सरकार में क्या फर्क है. केसीआर ने कहा कि ‘हम नरेंद्र मोदी से अध्यादेश वापस लेने की मांग करते हैं. हम सब अरविंद केजरीवाल का समर्थन करते हैं. मैं साफ कह सकता हूं कि मोदी सरकार ने आज दिल्ली की जनता का अपमान किया है. यह जनादेश का अपमान है. केंद्र को अध्यादेश वापस लेना चाहिए, नहीं तो हम एकजुट होकर लड़ेंगे. ‘

अरविंद केजरीवाल ने उठाए सवाल
सीएम केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, 8 साल दिल्ली के लोगों को अपंग करके रखा. 8 साल की लड़ाई के बाद 11 मई को सुप्रीम कोर्ट की कांस्टीट्यूशन बेंच ने बहुमत से दिल्ली के लोगों के हक में फैसला दिया. 8 साल बाद दिल्ली के लोगों को न्याय मिला था. हमें 8 साल लगा उस नोटिफिकेशन को कैंसिल कराने में लेकिन उसके 8 दिन के अंदर ही सरकार ने ऑर्डिनेंस लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया.

दिल्ली सीएम ने कहा कि, ‘देश के लोग कह रहे हैं जो देश का प्रधानमंत्री सुप्रीम कोर्ट और उसके आदेश को नहीं मानता तो न्याय लेने के लिए लोग कहां जाएंगे. अगर देश का प्रधानमंत्री कहता है कि मैं सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानता हूं और अध्यादेश लाकर कानून पलट देता है तो न्याय के लिए कहां जगह बच जाएगी. ऐसे देश कैसे चलेगा यह तो बिल्कुल गलत है.’

इस दौरान, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि, हमने बजट सत्र बुलाया था, लेकिन राज्यपाल ने मना कर दिया. फिर हमने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. राज्यपाल बीजेपी के स्टार प्रचारक बन गए हैं, वे लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और संघीय ढांचे को बिगाड़ रहे हैं. भगवंत मान ने तंज कसते हुए कहा कि आज नीति आयोग की बैठक थी, हम वहां जाकर क्या करते, फोटो क्लिक करें? पिछले साल जो मांगा गया था वह नहीं दिया गया तो हम वहां जाकर क्या करेंगे.

शरद पवार और ठाकरे से भी मिल चुके हैं केजरीवाल
गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर केंद्र सरकार के अध्यादेश के विरोध में विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए मुहिम छेड़े हुए हैं. दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने मुंबई पहुंचकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी.

नीतीश ने की थी केजरीवाल से मुलाकात
वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी सरकार में डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के साथ दिल्ली के सीएम हाउस पहुंचकर अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी. नीतीश कुमार ने केंद्र के अध्यादेश को लेकर अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया था. नीतीश ने इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से भी मुलाकात की थी.

केंद्र सरकार लाई थी अध्यादेश
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर कमीशन के गठन का प्रावधान कर दिया था. अध्यादेश में ये भी साफ किया गया था कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामलों में अंतिम निर्णय का अधिकार उपराज्यपाल के पास ही होगा. केंद्र की ओर से अध्यादेश जारी किए जाने के बाद केजरीवाल ने अलग-अलग दलों के नेताओं से मुलाकात कर इस अध्यादेश के विरोध में समर्थन जुटाने का ऐलान किया था.

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