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‘सीएम योगी हमारे अभिभावक’, माता-पिता की जेल से रिहाई के बाद बोले अमनमणि त्रिपाठी

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को शुक्रवार को जेल से रिहा कर दिया। हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे अमरमणि को अच्छे आचरण के चलते समय से पहले रिहाई का आदेश जारी किया गया था। समय से पहले जेल से रिहा किए जाने के एक दिन बाद उनके बेटे और पूर्व निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना अभिभावक और मार्गदर्शक बताया।

एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमनमणि त्रिपाठी ने कहा कि महाराजगंज जिले में उनके निर्वाचन क्षेत्र नौतनवा के लोग उनके माता-पिता की रिहाई को होली और दिवाली के त्योहार की तरह मना रहे थे। उन्होंने कहा, ”जिस तरह 14 साल के वनवास के बाद जब भगवान श्री राम अयोध्या आए थे, तब पूरी अयोध्या रोशनी से नहाई थी। ठीक वैसा ही माहौल नौतनवा में भी है।

कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे 66 वर्षीय अमरमणि त्रिपाठी और 61 वर्षीय मधुमणि को उनकी सजा पूरी होने से पहले शुक्रवार शाम रिहा कर दिया गया था। उत्तर प्रदेश जेल विभाग ने गुरुवार को राज्य की 2018 की छूट नीति का हवाला देते हुए उनकी समय से पहले रिहाई का आदेश जारी किया, क्योंकि उन्होंने अपनी सजा के 16 साल पूरे कर लिए हैं। दंपति फिलहाल गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अमनमणि त्रिपाठी ने कहा, ”मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमारे अभिभावक और मार्गदर्शक हैं। मैं उनसे मिलता रहता हूं और उनका आशीर्वाद लेता हूं… मैं राजनीति में सक्रिय हूं और पारिवारिक मामलों में भी नियमित रूप से उनकी सलाह लेता हूं। मुख्यमंत्री से हमारा रिश्ता राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिवारिक है।’

इस दौरान अमनमणि त्रिपाठी ने यह भी कहा कि उन्हें और उनके माता-पिता को रिहाई आदेश के बारे में पहले से पता नहीं था। उन्होंने कहा, “पहले तो मुझे इस आदेश पर विश्वास नहीं हुआ। मैंने इसे कई बार पढ़ा और यहां तक कि मैंने अपने वकीलों से भी सलाह ली… मेरे पिता को कोई जानकारी नहीं थी और रिलीज़ पेपर्स पर हस्ताक्षर करते समय उन्होंने मुझसे इसके बारे में पूछा और मैंने उन्हें बताया कि यह रिलीज़ ऑर्डर है।”

कवयित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला द्वारा अमरमणि त्रिपाठी के रिहाई आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर अमनमणि ने कहा, “हर कोई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र है। हमें भारतीय संविधान पर पूरा भरोसा है। त्रिपाठी ने कहा कि मां को मनोरोग संबंधी समस्याएं हैं और पिता न्यूरोलॉजिकल रोग से पीड़ित हैं। उनके रीढ़ की हड्डी की समस्याएं है जो उनकी चलने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। न्यायिक हिरासत के कारण डॉक्टर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर करने में सक्षम नहीं थे, लेकिन अगर वे सुझाव देते हैं तो हम निश्चित रूप से उन्हें वहां ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता कहीं और जाने की स्थिति में नहीं हैं, वे अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल से छुट्टी मिलने पर वे निश्चित रूप से सीधे घर आएंगे।”

नौतनवा विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित अमरमणि त्रिपाठी 2001 में राज्य की भाजपा सरकार में और 2002 में बनी बसपा सरकार में भी मंत्री थे। वह समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं।बता दें, कवयित्री मधुमिता जो गर्भवती थीं। उनकी 9 मई, 2003 को लखनऊ के पेपर मिल कॉलोनी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अमरमणि त्रिपाठी को सितंबर 2003 में मधुमिता हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, जिसके साथ वह कथित तौर पर रिश्ते में थे। देहरादून की एक अदालत ने अक्टूबर 2007 में मधुमिता की हत्या के लिए अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में नैनीताल और सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा। मामले की जांच सीबीआई ने की थी।

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