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पुरानी संसद में आखिरी दिन बार-बार आया अटल का नाम, पक्ष-विपक्ष दोनों के सांसदों ने किया याद

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नई दिल्‍ली

मंगलवार का दिन जितना ऐतिहासिक होगा उतना ही सोमवार था। यह पुरानी संसद में कार्यवाही का आखिरी दिन था। मंगलवार को नए संसद भवन में लोकसभा की कार्यवाही 1.15 बजे और राज्‍यसभा की 2.15 बजे शुरू होगी। यह नए संसद भवन में कार्यवाही का पहला दिन होगा। पुरानी संसद में आखिरी दिन एक नाम बार-बार जुबान पर आया। वह नाम था पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्‍ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसदों ने उनके नाम का जिक्र किया। संसद के विशेष सत्र के पहले दिन की कार्यवाही के दौरान अटल जी को याद किया जाना यूं नहीं था। पूर्व प्रधानमंत्री उन चंद नेताओं में रहे जिनके प्रशंसक सिर्फ उनकी पार्टी तक सीमित नहीं थे। अपने खास अंदाज के कारण वह अपनी पार्टी में जितने लोकप्रिय थे, दूसरे दल के नेता भी उन्‍हें उतना ही सम्‍मान देते थे। यहां तक देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी उनकी खास शैली बहुत पसंद आती थी।

लोकसभा में ‘संविधान सभा से शुरू हुई 75 सालों की संसदीय यात्रा’ विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार अटल जी का नाम लिया। अटल की ऐतिहासिक स्‍पीच को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने इसी सदन में कहा था कि सरकारें आएंगी-जाएंगी। पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी। लेकिन, यह देश रहना चाहिए। पीएम मोदी बोले कि इसी सदन के सामर्थ्य से वाजपेयी ने सर्वशिक्षा अभियान शुरू किया। आदिवासी कार्य मंत्रालय और पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय के सृजन जैसे निर्णय लिए। मोदी ने परमाणु परीक्षण के लिए भी अटल को याद किया। कहा कि वाजपेयी ने परमाणु परीक्षण करके दुनिया को देश की ताकत दिखाई। मोदी बोले कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के शासनकाल में तीन नए राज्य उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ बनने पर हर तरफ उत्सव का माहौल था। साथ ही याद दिलाया कि इसी सदन में एक वोट से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरी थी। पूर्व प्रधानमंत्री ने सत्ता गंवाने की चिंता किए बिना लोकतंत्र की गरिमा को बढ़ाया था।

छत्तीसगढ़वासियों के लिए यादगार
बीजेपी के अरुण साव ने कहा कि यह भवन उन जैसे सभी छत्तीसगढ़वासियों के लिए यादगार होगा। कारण है कि इसी भवन से अविभाजित मध्य प्रदेश दो राज्यों में विभक्त हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि वाजपेयी जानते थे कि छत्तीसगढ़ में विपक्षी दल (कांग्रेस) की सरकार बनेगी। लेकिन, इसके बावजूद उन्होंने करोड़ों लोगों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ के गठन का फैसला लिया था।

मल्लिकार्जुन खरगे की जुबान पर भी आया नाम
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने विशेष सत्र के पहले दिन अपने भाषण की शुरुआत एक कविता से की। सरकार को सलाह दी कि अगर वह कुछ नहीं कर सकती तो कुर्सी छोड़ दे। इस दौरान उनकी जुबान पर भी अटल का नाम आया। खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह का नाम लिया। उन्‍होंने कहा कि वाजपेयी ने अलग-अलग विषयों पर संसद में 21 बार बयान दिए। मनमोहन सिंह ने 30 बार ऐसा किया। मौजूदा प्रधानमंत्री ऐसे हैं जो सदन में नौ सालों में ‘कस्टमरी बयानों’ को छोड़ केवल दो बार बोले हैं।

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