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संसद में बीजेपी पर नरम, कांग्रेस पर गरम, जानिए क्या है मायावती का 2024 का प्लान

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लखनऊ

पुराने संसद भवन के आखिरी सत्र में चर्चा के दौरान कई ऐसे पल आए, जिसने देश को चौंका दिया। देश की सबसे बड़ी पंचायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण की विपक्ष ने तारीफ की, क्योंकि उन्होंने पहली बार जवाहर लाल नेहरू की प्रशंसा की। सभी राजनीतिक दल के नेता अपनी पार्टी लाइन पर बोलते नजर आए। बहस के दौरान नगीना के बीएसपी सांसद गिरीश चंद्र ने भी संसद और संविधान पर अपनी राय रखी और कांग्रेस पर निशाना साधा। इससे पहले संसद के विशेष सत्र के लिए बसपा प्रमुख मायावती ने नरेंद्र मोदी और सरकार को बधाई दी थी। बीएसपी के इस बदले रवैये से यूपी की राजनीति में कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है।

बीएसपी अभी बीजेपी के विरोध के मूड में नहीं
सोमवार को पुराने संसद भवन में हो रही आखिरी चर्चा के दौरान नगीना के बीएसपी सांसद गिरीश चंद्र ने कहा कि कांग्रेस ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को सम्मान नहीं दिया। अपने 40 साल के शासन के दौरान बाबा साहेब को भारतरत्न नहीं दिया। मंडल कमीशन की रिपोर्ट को कांग्रेस ने दबाए रखा। उन्होंने दावा कि काशीराम के कारण वी पी सिंह 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर सहमत हुए। उन्होंने राजस्थान में दलित की हत्या पर भी सवाल उठाया। इस दौरान वह बीजेपी पर नरम ही दिखे। उन्होंने दलित उत्पीड़न के लिए मध्यप्रदेश की सरकार की चर्चा की। मायावती ने रविवार को ही नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामना देकर यह साफ कर दिया था कि बीएसपी अभी बीजेपी के विरोध के मूड में नहीं है। I.N.D.I.A. गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि मायावती सीबीआई और ईडी के डर के कारण बीजेपी के लिए नरम रवैया रखती हैं।

संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर भी दिया था साथ
ऐसा नहीं है कि मायावती ने केंद्र सरकार को नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर विपक्ष के हमलों से बचाया था। 28 मई 2023 को नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से नहीं कराने पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने नरेंद्र मोदी की आलोचना की थी। I.N.D.I.A. के दलों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। उस समय मायावती के एक बयान ने ढाल का काम कर दिया। मायावती ने ट्वीट कर उद्घाटन समारोह के बहिष्कार को अनुचित बताया था। तब मायावती ने बयान जारी कर कहा था कि सरकार ने इसको बनाया है इसलिए उसके उद्घाटन का उसे हक है। इसको आदिवासी महिला सम्मान से जोड़ना भी अनुचित हैं। विपक्ष को द्रौपदी मुर्मू के विरुद्ध उम्मीदवार खड़ा करते वक्त सोचना चाहिए था।

बुरे दौर में भी बीएसपी को यूपी में मिले 12 फीसदी वोट
बीएसपी प्रमुख के बदले तेवर I.N.D.I.A. के लिए शुभ संदेश नहीं कहा जा सकता है, खासकर 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य यूपी में विपक्ष के लिए अच्छा शगुन नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि मायावती लोकसभा चुनाव में बीजेपी से गठबंधन करेगी, यह धारणा गलत है। यूपी में बहुजन समाज पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। मायावती पहले भी कई बार साफ कर चुकी हैं कि वह न तो I.N.D.I.A. के साथ हैं और न ही एनडीए के साथ। ऐसे में I.N.D.I.A. की हर सीट पर वन टु वन फाइट वाले प्लान की धज्जियां उड़ सकती है। यूपी में करीब 3 करोड़ दलित वोटर हैं, हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को 12.9 प्रतिशत वोट मिला था। पार्टी को एक करोड़ 18 लाख 73 हजार वोट मिले थे। 2023 में हुए यूपी निकाय चुनाव में बीएसपी को 12 फीसदी वोट मिले थे, जिसे पार्टी का सबसे बुरा दौर माना जाता है। 2019 में पार्टी को 19.43 प्रतिशत वोट मिले थे। मायावती अगले लोकसभा चुनाव में अकेले चुनाव में उतरती हैं तो 12 फीसदी वोट का फैक्टर I.N.D.I.A. पर भारी और बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

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