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अमेरिकी राजदूत के सीक्रेट PoK दौरे पर मचा बवाल, भारत में US एंबेसडर ने दी सफाई

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नई दिल्ली,

पाकिस्तान में अमेरिका के राजूदत डोनाल्ड ब्लोम के पीओके दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. वह पिछले हफ्ते गुपचुप तरीके से पीओके के गिलगित बाल्टिस्तान गए थे. लेकिन इस मामले पर अब बवाल मचने के बाद भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने प्रतिक्रिया दी है. भारत में अमेरिका के राजदूत गार्सेटी ने कहा है कि हमारे प्रतिनिधिमंडल ने भी G20 बैठकों के दौरान कश्मीर का दौरा किया था. ब्लोम का पीओके का दौरा बिल्कुल अलग था. यह दो देशों का मसला है, जिसे द्विपक्षीय तरीके से ही सुलझाया जाना चाहिए.

इंडो अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत में राजदूत गार्सेटी से ब्लोम के गिलगित बाल्टिस्तान के गुपचुप दौरे के बारे में सवाल पूछा गया था. इसके बारे में जवाब देते हुए गार्सेटी ने कहा कि फिलहाल यहां इस मसले पर बात करना ठीक नहीं होगा. अमेरिकी राजदूत वहां पहले भी गए हैं. G20 बैठकों के दौरान हमारा प्रतिनिधिमंडल भी कश्मीर गया था.

भारत और पाकिस्तान मिलकर अपने मुद्दे सुलझाएं
कश्मीर पर अमेरिका के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है और इसे द्विपक्षीय तरीके से ही सुलझाया जाना चाहिए. इसे भारत और पाकिस्तान के बीच ही सुलझाया जाना चाहिए और अमेरिका सहित किसी तीसरे पक्ष को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

गार्सेटी ने यह बयान पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत ब्लोम की गिलगित-बाल्टिस्तान के दौरे से जुड़े सवाल पर दिया. ब्लोम ने पिछले हफ्ते गिलगित बाल्टिस्तान का दौरा किया था. भारत पीओके को भारत का अभिन्न अंग मानता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजदूत ब्लोम ने गिलगित बाल्टिस्तान में कई जगहों का दौरा किया था. वह वहां यूएनडीपी के कई प्रोजेक्ट्स का जायजा लेने भी गए थे. इतना ही नहीं गिलगित बाल्टिस्तान असेंबली की डिप्टी स्पीकर सादिया दानिश और असेंबली की सदस्य रानी सनम फरयाद ने भी ब्लोम से मुलाकात की थी.

यह कोई पहला मौका नहीं है, जब अमेरिकी राजदूत ने पीओके का दौरा किया है. अक्टूबर 2022 में राजदूत डोनाल्ड ने मुजफ्फराबाद का भी दौरा किया था और पाकिस्तान की ओर से नियुक्त प्रधानमंत्री तनवीर इलियास से मुलाकात की थी. ब्लोम ने 2005 भूकंप में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि 75 सालों की हमारी साझेदारी में अमेरिका हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लोम की इस यात्रा को सरकार और दूतावास दोनों ने गुप्त रखा था और मीडिया को इसे लेकर किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई थी.

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