MP चुनाव में कांग्रेस का समाजवादी पार्टी को ठेंगा, ये अति उत्साह I.N.D.I.A को ले डूबेगा

नई दिल्ली,

तमाम उम्मीदों के विपरीत मध्यप्रदेश चुनावों में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को भाव नहीं दिया.एमपी में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच पिछले महीने से ही बातचीत चल रही थी, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला है. कांग्रेस की ओर से रविवार को 144 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की गई है. इनमें से करीब 4 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जिन पर समाजवादी पार्टी ने प्रत्य़ाशियों की घोषणा कर रखी थी.सबसे बड़ी बात यह है कि जिस सीट पर 2018 में समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी जीता था वहां से भी कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी खड़ा कर दिया है.

इसका साफ संदेश जाता है कि इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग का कोई फार्मूला तय नहीं हो पाया है. इसके साथ ही यह भी संदेश जा रहा है कि कोई भी राजनीतिक दल इंडिया गठबंधन के लिए अपने हित कुर्बान करने को तैयार नहीं है. आम आदमी पार्टी ने भी मध्य प्रदेश में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. आइये देखते हैं कि वो कौन से कारण हैं जिसके चलते कांग्रेस और समाजवादियों में बात नहीं बनी? क्या इंडिया गठबंधन का भविष्य खतरे में हैं?

1-क्या हुआ एमपी में
अखिलेश यादव चाहते थे कि वे सीट जिन पर पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी कैंडिडेट जीते या दूसरे स्थान पर रहे वहां उनकी पार्टी के नेता चुनाव लड़ें. पर कांग्रेस की लिस्ट आने के बाद समाजवादी पार्टी को लगा कि कांग्रेस उसे भाव नहीं दे रही है. आनन फानन में रविवार को ही समाजवादी पार्टी ने भी 9 उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट जारी कर दी. अभी फिलहाल एमपी में 4 सीटें ऐसी हैं, जिनमें सपा और कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी उतार रखे हैं. भांडेर, राजनगर, बिजावर और कटंगी सीट ऐसी हैं जहां से दोनों पार्टियों के उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं. अब कहा जा रहा है कि कांग्रेस के इस कदम से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इतने नाराज हुए हैं कि उन्होंने मध्य प्रदेश में पूरे दमखम के साथ चुनावी रण में उतरने की तैयारी कर ली है.

2018 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी बिजावर सीट जीतने में कामयाब हुई थी. 6 सीटों पर वह दूसरे नंबर पर रही. समाजवादी पार्टी चाहती थी कि इन 7 सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी चुनाव लडें. अखिलेश यादव और कमलनाथ के बीच फोन पर कई राउंड की बातचीत हुई. फिर तय हुआ था कि कम से कम 5 सीटें समाजवादी पार्टी को मिल सकती हैं.लेकिन मामला क्यों बिगड़ गया ये बात अभी तक सामने नहीं आई है.

कमलनाथ कहते हैं कि हम चाहते हैं कि सपा हमारा साथ दे बीजेपी को हराने के लिए.मैं अखिलेश यादव जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उनका उदेश्य बीजेपी को हराने में है. जहां तक टिकट बंटवारे की बात है हमें भी अपनी स्थानीय स्थिति देखनी होती है. इसमें कुछ पेच फंस जाते हैं. क्योंकि जो कैंडिडेट हैं अगर वो कहते हैं कि हम आपके कैंडिडेट को टिकट देते हैं तो हमारा कैंडिडेट कहता है कि मैं सपा के टिकट पर नहीं लडूंगा, तो क्या करें?

2-कांग्रेस अति उत्साह में
दरअसल कांग्रेस अति उत्साह में है.उसे लगता है हम पांचों राज्यों में विधानसभा जीत रहे हैं. इस उत्साह में वह अपने शर्तों पर गठबंधन करना चाहती है. पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि दरअसल कांग्रेस अभी चाहती ही नहीं है कि एमपी-राजस्थान और छ्त्तीसगढ़ में किसी से सीट शेयर करें. कांग्रेस को लगता है कि इस बार यूपी में भी उसको अच्छी सीटें मिल सकती हैं.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार मध्य प्रदेश समाजवादी पार्टी अध्यक्ष रामायण सिंह पटेल कहते हैं कि कांग्रेस के साथ गठबंधन की सभी संभावनाएं खत्म हो चुकी हैं.कांग्रेस नेतृत्व से जो थोड़ी बहुत बात हुई थी, सब रविवार को खत्म हो गया. कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश में करीब 30 से 35 सीटों पर उम्मीदवारों को उतारने की तैयारी में है. सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा नाराजगी बिजावर सीट के लिए है. जहां से कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के एक कद्दावर नेता के भतीजे को टिकट देकर गठबंधन की शूचिता को भी खत्म कर दिया है. बिजावर से चरण सिंह यादव को टिकट दिया है कांग्रेस ने. चरण सिंह समाजवादी पार्टी के नेता दीप नारायण यादव के भतीजे हैं.

3-यूपी में कांग्रेस बड़ी तैयारी में
यूपी में भी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का नजरिया इंडिया गठबंधन के लिए स्वस्थ नहीं दिख रहा है. दोनों पार्टियां अति महत्वाकांक्षा और ओवरकॉन्फिडेंस में दिख रही हैं. कांग्रेस पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष संभालने के बाद अजय राय कुछ ज्यादे ही उत्साह में हैं. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. पार्टी को लगता है 2009 की तरह करीब 20 से अधिक सीटें जीत सकती है. अभी तक की जो तस्वीर बन रही है उससे लगता नहीं है कि कांग्रेस लोकसभा चुनावों में यूपी में 20 सीटों से कम पर नहीं मानेगी.

दरअसल 2019 के लोकसभा चुनावों में सपा और बीएसपी के बीच जो गठबंधन हुआ उसमें बीएसपी बड़ी भूमिका में थी.गठबंधन में बसपा को 38 तो सपा को 37 सीट मिले थे. 5 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ीं गईं थीं. कांग्रेस का मानना है कि सपा के लिए 2019 में जो स्थिति थी वैसी ही स्थिति अभी भी है. यही हाल समाजवादी पार्टी का भी है उसे भी लगता है कि कांग्रेस का यूपी में वोट बैंक हवा हवाई है. सूत्रों का कहना है कि अखिलेश कांग्रेस के लिए 5 सीटों की बात तो करते हैं पर अधिक से अधिक 10 सीटों तक जा सकते हैं. इससे अधिक तो कभी नहीं दे सकते.

4-कांग्रेस की यूपी में अखिलेश के वोट बैंक पर कब्जे की तैयारी
कांग्रेस ने यूपी में समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर ली है.पार्टी नेताओं का दावा है कि प्रदेश में मुस्लिम समुदाय का वोट इस बार कांग्रेस को वोट करने वाला है. समाजवादी पार्टी इस तरह को दावों को कांग्रेस पार्टी की ओर से समाजवादी पार्टी पर हमले के रूप में ले रही है.आग में घी डालने का काम किया है पश्चिम उत्तर प्रदेश के तीन जमीन से जुड़े नेताओं का कांग्रेस में शामिल होना. पहले समाजवादी फिर बसपा होते हुए इमरान मसूद ने कांग्रेस में वापसी कर ली है.बागपत जिले के कद्दावर चेहरा रहे पूर्व मंत्री कोकब हमीद के पुत्र हमीद अहमद ने कांग्रेस ज्वॉइन की है. तीसरे हैं सहारनपुर के सपा नेता फिरोज आफताब जो अखिलेश की पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आ गए हैं.

कांग्रेस यूपी में दलित वोटबैंक के लिए भी लगातार काम कर रही है. कांशीराम की पुण्यतिथि पर नौ अक्तूबर से दलित गौरव संवाद कार्यक्रम शुरू हुआ है.80 के दशक तक कभी दलित वोटबैंक कांग्रेस का हुआ करता था.कांशीराम के उभार के बाद कांग्रेस से छिटक गया था. कांग्रेस लगातार दलितों के नए नेता के रूप में जगह बना रहे चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण पर भी डोरे डाल रही है.

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