नोएडा
बहुचर्चित निठारी कांड में बड़ी खबर आई है। सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 मामलों में आरोपी सुरेंद्र कोली और मनिंदर पंढेर की फांसी की सजा रद्द कर दी है। दोनों को फांसी की सजा के खिलाफ अपीलों पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। कोली पर आरोप है कि वह पंढेर की कोठी का केयरटेकर था और लड़कियों को लालच देकर कोठी में लाता था। निठारी गांव की दर्जनों लड़कियां गायब हो गई थीं। पंढेर के घर के पास नाले में कई कंकाल मिले थे। बता दें कि सुरेंद्र कोली को 10 से अधिक मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। वहीं, पंढेर को तीन मामलों में फांसी की सजा मिली थी। इन दोनों ने फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं लगाई थीं। न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति सैयद आफताब हुसैन रिजवी की पीठ ने यह फैसला सुनाया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2006 में निठारी गांव की कोठी नंबर डी-5 से नरकंकाल मिला था। वहीं, कोठी के पास नाले से बच्चों के अवशेष बरामद किए गए थे। निठारी कांड का खुलासा लापता लड़की पायल की वजह से हुआ था। चर्चाओं में आने के बाद यह पूरा मामला देशभर के लोगों के बीच फैल गया। यहां से मानव शरीर के हिस्सों के पैकेट मिले थे। नरकंकालों को नाले में फेंका गया था। उत्तराखंड का रहने वाला सुरेंद्र कोली डी-5 कोठी में मोनिंदर सिंह पंढेर का नौकर था। परिवार के पंजाब चले जाने के बाद दोनों कोठी में रह रहे थे।
निठारी गांव वालों का आरोप- पंढेर की कोठी से शरीर के अंगों का व्यापार होता था
दोनों आरोपियों ने दो मामलों में अपनी फांसी की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। आरोपियों ने कोर्ट में कहा था कि इन घटनाओं का कोई चश्मदीद नहीं मौजूद है। उन्हें सिर्फ वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर ये सजा सुनाई गई है। आरोप है कि कोठी से गुजरने वाले बच्चों को पकड़कर सुरेंद्र कोली उनके साथ दुष्कर्म करता था और उनकी हत्या कर उन्हें नाले में फेंक देता था। निठारी गांव के लोगों का यह भी कहना था कि पंढेर की कोठी से शरीर के अंगों का व्यापार होता था। कोली और पंढेर बच्चों को मारकर उनके अंग निकाल लेते थे। इन्हें विदेश में बेचा जाता था।
