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भव्य राम मंदिर अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा और शुभ मुहूत्र का ज्योतिष विश्लेषण

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भोपाल।

शुभ मुहूत्र का आंकलन पंचांग के तत्वों को सज्ञान में लेकर और ग्रहों की वर्तमान में स्थिति तथा मुहूर्त लग्न कुंडली के निर्माण से होता है । वैदिक शास्त्र के अनुसार, शुभ मुहूर्त दिन का वह विशेष समय होता है, जब सौरमंडल में ग्रह और नक्षत्र की स्थिति विशिष्ठ कार्य के लिए शुभ होती है. माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य से संबंधित विषय में विशेष लाभ मिलता है।

देश के नामी गिरामी पंडितों द्वारा अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूत्र समय है 22 जनवरी 2024 को 12 बजकर 29 मिनट और 8 सेकंड से 12 बजकर तीस मिनट्स और 32 सेकण्ड्स तक है । वैदिक दिन सोमवार है, मृगसिरा नक्षत्र है , योग इंद्रा हैं तथा तिथि शुक्ल द्वादशी हैं और करना बलवा है ।

मुहूर्त समय की कुंडली में चंद्र वृषभ राशि में उच्च का है अर्थात सोमवार दिन ठीक है परंतु यह दूसरे भाव में है जो कि चंद्र की श्रेष्ठ स्थिति नहीं है ।मृगशिरा नक्षत्र मृदु नक्षत्र की श्रेणी में आता है जबकि ध्रुव नक्षत्र या क्षिप्र और अतिवृत्ति नक्षत्र प्राण प्रतिष्ठा के लिए उपयुक्त माने जाते हैं । तैत्रयी ब्राह्मण ग्रंथ के अनुसार इस नक्षत्र को भगवान ब्रह्मा के स्वरूप में भी देखा जाता है औऱ क्योंकि ब्रह्मा जी की पूजा वर्जित है इसलिए मृगशिरा भी दूषित नक्षत्र माना जाता है जो चंचलता औऱ अस्थिरता का प्रतीक भी है ।

ज्ञात रहे कि भगवान श्री राम ने रावण युद्ध के लिये दूसरे अतिवृत्ति नक्षत्र हस्त ही चुना था।तिथि शुक्ल द्वादशी है जो कि किसी भी शुभ कार्य मुहूर्त के लिए नहीं चुनी जाती हैं क्योंकि यह ज्योतिष में दग्ध योग जैसे फल देती हैं औऱ भद्रा तिथि है,पर कुछ ज्योतिष आचार्य का मानना है कि यह तिथि सूर्य के सवितर रूप की है इसलिए यह दोष मुक्त है ।

अब अगर पौष मास जिसे खर या मलमास भी कह्ते हैं, ही क्यों चुना गया और क्यों नहीं माघ मास इसका कारण तो वहीं साधू संत बता सकते हैं जिन्होंने यह मुहूर्त चुना है । मुहूर्त के समय बनाई कुंडली बहुत श्रेष्ठ है जिसमें लग्नेश भाग्य स्थान में और भाग्येश लग्न में सुन्दर योग का निर्माण कर रहे हैं । नवाँशा चार्ट में भी लग्र स्वामी गुरु नवमें भाव में केतु के साथ अग्नि राशि में है जो धर्म के विस्तार के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा ।

राम अवतार धर्माधिपति के लिए जाना जाता और उनकी कुंडली में नवम भाव का स्वामी अनेक वर्ग में स्वाग्रही या उच्च भाव में स्थित है इसी तरह वर्तमान में मुहूर्त कुंडली में भी यही योग दिख रहे हैं जो कि अति उत्तम है । कुल मिलाकर मुहूर्त पंचांग तत्वों के अनुसार सटीक नही माना जा सकता है जो कि अल्पावधि मैं प्रशासन और सरकार को कुछ दिक्कतों मैं डाल सकता है परंतु दीर्घकालीन नजरिये से अयोध्या का श्रीराम मंदिर सनातन धर्म की रक्षा करने और विश्व पटल पर धार्मिक पर्यटन का मुख्य केंद्र बनने में बहुत सफल होगा । यह एक ज्योतिष लेख हैं और इसको किसी अन्य अर्थ में नहीं लेना चाहिए ।
सुभाष सक्सेना
ज्योतिष आचार्य

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