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श्रीलंका है भारत का हिस्सा… श्रीलंकाई पर्यटन मंत्री ने क्‍यों दिया बयान, हिंदुस्‍तान की जमकर तारीफ

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कोलंबो

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कुछ दिनों पहले श्रीलंका को प्रमोट किया था। उन्होंने कहा था कि लोग अपनी छुट्टियां मनाने के लिए श्रीलंका जाएं। उन्होंने कहा था कि जब श्रीलंका आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब मदद के लिए भारत आया। अब इसे लेकर श्रीलंका के पर्यटन मंत्री हरिन फर्नांडो ने बड़ा बयान दिया है। मुंबई में उन्होंने बोलते हुए कहा कि भारत के विदेश मंत्री ने भारतीयों को श्रीलंका जाने के लिए प्रोत्साहित किया था, क्योंकि श्रीलंका भारत का एक हिस्सा है। दरअसल वह श्रीलंका को भारत का हिस्सा बताकर दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत को दिखाना चाह रहे हैं।

मुंबई में एक कार्यक्रम में बोलते हुए फर्नांडो ने श्रीलंका में भारत की बढ़ती भागीदारी का खुलासा किया। इसमें श्रीलंका में 3 हवाई अड्डों में संभावित निवेश प्रमुख है। श्रीलंका के मंत्री ने कहा कि श्रीलंकाई अधिकारी देश के हवाई अड्डों के प्रबंधन के लिए भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी ग्रुप के साथ काम करने की योजना बना रहे हैं। वर्तमान में बातचीत चल रही है और तीन प्रमुख हवाई अड्डों की पेशकश की जा रही है, जिसमें कोलंबो का बंदरनायके इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शामिल है।

बताया टूरिस्ट का आंकड़ा
इसके अलावा उन्होंने कहा कि श्रीलंका में मुंबई के मुकाबले काफी कम पैसे में जीवन संभव है। मजाक में उन्होंने कहा कि अगर मैं आपकी जगह होता तो मुंबई में सबकुछ बेचकर श्रीलंका चला जाता। उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है मुंबई बहुत महंगा है। यहां रियल एस्टेट का दाम बहुत ज्यादा है। लेकिन श्रीलंका ने भी अपने लिए बड़े टार्गेट बनाए हैं। पिछले साल मुझ पर लोग हंसे जब मैंने टार्गेट बनाया कि श्रीलंका में 15 लाख टूरिस्ट आएंगे। फिलहाल अभी तक 14 लाख का आंकड़ा पार हो गया है। पंद्रह लाख के आंकड़े में सिर्फ 11 हजार की कमी है। 2024 में हम 25 लाख टूरिस्ट का टार्गेट रख रहे हैं।’ उन्होंने यहां लोगों से निवेश की मांग की।

क्या बोले थे भारतीय विदेश मंत्री
फरवरी की शुरुआत में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि भारतीय अगली छुट्टी मनाने के लिए श्रीलंका जाएं। डॉ. जयशंकर ने कहा था, ‘आप सामान्य लोगों से मिलें और उनसे पूछें कि वह भारत के बारे में क्या सोचते हैं। मैं विश्वास से कह सकता हूं आप अपने आपको बढ़ता हुआ महसूस करेंगे। पेट्रोल की लंबी-लंबी लाइनों और खाने की कमी के बीच पूरी दुनिया ने श्रीलंका को अपनी पीठ दिखाई थी। तब हमने श्रीलंका की मदद की थी।’

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