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तुम्‍हें नौकरी से न‍िकलवा देंगे… रघुराम राजन को कौन दे रहा था धमकी, फ‍िर पूर्व RBI गवर्नर ने क्‍या क‍िया?

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नई दिल्‍ली:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और अब शिकागो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ. रघुराम राजन ने हाल ही में एक इंटरव्‍यू में केंद्रीय बैंक में अपने कार्यकाल के बारे में खुलकर बात की। इसमें उनके सामने आने वाली चुनौतियों, उनकी ओर से लागू की गई नीतियों और उनके जाने से जुड़े विवादों पर चर्चा की गई। राजन के जवाबों से उनकी भूमिका की जटिलताओं और पद पर रहते हुए उनके सामने आने वाले बाहरी दबावों के बारे में जानकारी मिली। राजन ने स्वीकार किया कि उन्हें बदनाम करने के लिए सुनियोजित प्रयास किए गए।

जाने-माने अर्थशास्‍त्री ने कहा, ‘मुझे बदनाम करने के लिए एक तरह का अभियान चलाया जा रहा था। वो वाक्यांशों को संदर्भ से बाहर ले जाते थे। फिर उसे जितना हो सके उतना जोर से आगे बढ़ाते थे।’ उन्होंने कहा कि यह ट्रेंड नया नहीं है। आरबीआई गवर्नर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भी यह प्रचलित था। उन्होंने इन हमलों के लगातार ट्रेंड पर जोर देते हुए कहा, ‘यह तब भी जारी रहा जब मैं आरबीआई का गवर्नर था।’

महंगाई को कंट्रोल करने पर रखा फोकस
राजन के नीतिगत फैसले, खास तौर से महंगाई पर कंट्रोल को लेकर उनका फोकस सराहनीय था। ये नीतिगत फैसले आरबीआई गवर्नर के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण रहे। उन्होंने खुलासा किया कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने के शुरुआती कदमों को प्रभावशाली कारोबारी हस्तियों की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा।

रघुराम राजन ने बताया, ‘शुरू में हम महंगाई को कम करने के लिए ब्याज दरें बढ़ा रहे थे और जिन लोगों ने बहुत अधिक उधार लिया था, उन्हें अचानक इसका असर महसूस होने लगा।’ उनके मुताबिक, यह विरोध बहुत तीखा था। कुछ व्यापारियों ने धमकियां भी दीं।

पूर्व गवर्नर को धमक‍ियां म‍िलने लगीं
उन्होंने बताया, ‘मुझे व्यापारियों से कई धमकियां मिलीं, जिनमें कहा गया कि बेहतर होगा कि आप यह काम कर लें, वरना हम आपको नौकरी से न‍िकलवा देंगे।’ क्या ये प्रभावशाली लोग थे? इसके जवाब में राजन ने कहा, ‘कभी-कभी व्यवसायी लोगों को अपने प्रभाव का अहसास वास्तविकता से कहीं अधिक होता है।’

उन्होंने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा, ‘अगर मैं उनकी धमकियों के आगे झुक गया होता, तो मैं वैसे भी नौकरी से बाहर हो जाता। कारण है कि तब मैं अपना काम बहुत खराब तरीके से करता।’

राजन के उल्लेखनीय योगदानों में से एक बैंकिंग क्षेत्र की सफाई थी, जो बढ़े हुए लोन अकाउंट और एनपीए की बढ़ती दर से जूझ रहा था। इन उपायों में कर्ज चुकौती सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम शामिल थे। राजन ने बताया कि यह कदम कुछ व्यावसायिक हितों के साथ ठीक नहीं था। उन्होंने कहा, ‘हमने बैंकिंग क्षेत्र को साफ करना शुरू किया और लोगों को कर्ज चुकाने के लिए मजबूर किया, लेकिन यह भी अच्छा नहीं रहा।’

हालांकि, ये कदम वित्तीय प्रणाली की सेहत के लिए जरूरी थे। लेकिन, इनसे उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। राजन ने जो जानकारी साझा की है उससे अलग-अलग तरह के बाहरी दबावों और महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों के सामने केंद्रीय बैंक के प्रबंधन की जटिलताओं का पता चलता है।

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