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पश्चिमी ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक पुष्पुनी तिहार का भव्य आयोजन रविवार को हबीबगंज स्थित मधुबन गार्डन में संबलपुरी परिवार सोशियो कल्चरल सोसाइटी द्वारा किया गया। इस अवसर पर संबलपुरी परिवारों ने उत्साह, परंपरा और सामूहिकता के साथ त्योहार मनाया। पुष्पुनी तिहार पश्चिमी ओडिशा का प्रमुख लोक पर्व है, जिसे बसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति के प्रति श्रद्धा के रूप में मनाया जाता है।
इस पर्व में फूलों की पूजा, लोकगीत, पारंपरिक नृत्य, खेल और पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से सांस्कृतिक उत्सव मनाया जाता है। यह पर्व सामुदायिक एकता, नवीनता और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, जिसमें “छेर-छेरा” जैसी पारंपरिक परंपराएं भी प्रमुख हैं।
कार्यक्रम के दौरान संबलपुरी लोकगीतों और नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक खेलों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वहीं, विभिन्न स्टॉलों पर संबलपुरी व्यंजनों ने लोगों को पश्चिमी ओडिशा की यादों से जोड़ दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. डीके सत्पथी ने संबलपुरी परिवार संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने संबलपुरी समाज को एक मजबूत सूत्र में बांधने और उनकी संस्कृति को आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने भविष्य में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। विशिष्ट अतिथि जीएन साहू की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। संस्था के अध्यक्ष बीजी प्रधान ने भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए भोपाल के सभी संबलपुरी परिवारों को संस्था से जोड़ने का आह्वान किया।
सचिव संजीब नंदा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, सदस्यों और परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आगामी कार्यक्रमों में पश्चिमी ओडिशा की कला, संस्कृति, भोजन, परंपरा और भाषा को और व्यापक रूप से प्रस्तुत करने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रदीप माझी, किशोर केरकेट्टा, सुरेश बाग, देबदत्त मेहर, विश्वजीत माझी, सुशेंद्र मिश्रा, राधाकांत मेहर, क्षीरधर सा, दिलीप मिश्रा, महेश्वर किसान, जितेंद्र त्रिपाठी, रमानी रंजन महापात्रा, टिहलू बाग सहित अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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