पन्नू की बात कर मोदी का मन खट्टा तो नहीं करेंगे बाइडेन, डोभाल की वापसी की भी होगी खुन्नस?

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने अभी इटली गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भी वहीं हैं। दक्षिणी इटली के पुगलिया में सम्मेलन का आयोजन किया गया है। माना जा रहा है कि मोदी और बाइडेन की अकेले में मुलाकात भी हो सकती है। तो क्या बाइडेन अपने देश में ‘खालिस्तानी आतंकी’ गुरपतवंत पन्नू की हत्या की साजिश रचे जाने का मामला मोदी के सामने उठाएंगे? बाइडेन के इटली जाने के साथ ही व्हाइट हाउस ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच ‘मुलाकात’ की संभावना है।

वहीं, एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जैक सुलिवन ने भी कहा कि अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ हत्या की नाकाम साजिश ‘अमेरिका और भारत के बीच बातचीत का एक निरंतर विषय होगा, जिसमें बहुत वरिष्ठ स्तर पर भी बातचीत शामिल है।’ राजनयिक सूत्रों ने मोदी-बाइडेन बैठक में इस मुद्दे के उठने की संभावना से इनकार नहीं किया। सितंबर में मोदी के साथ अपनी बैठक के दौरान बाइडेन ने इस मुद्दे को उठाया था। सुलिवन खुद अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। तब वो अमेरिका के आरोपों पर भारत की जांच में प्रगति या उसकी कमी पर चर्चा कर सकते हैं। हालांकि इस यात्रा की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सुलिवन 18 जून को यहां आने वाले हैं।

पन्नू परस्त क्यों है अमेरिका?
दरअसल, खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अमेरिका की नागरिकता ले रखी है और अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर रहता है। जब पन्नू को मारे जाने की साजिश रचने की बात सामने आई तो अमेरिका आग बबूला हो गया। अमेरिकी न्याय विभाग ने इस बात पर रोष जताया कि एक भारतीय अधिकारी ने पन्नू की हत्या के लिए सुपारी किलर की तलाश में एक भारतीय नागरिक से संपर्क किया। दावा है कि इस साजिश का पता अमेरिकी खुफिया विभाग को था, इसलिए पन्नू की जान बच गई। अमेरिका के आरोप पर भारत ने घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। आइए इस मामले से जुड़ी हरेक महत्वपूर्ण बात जानते हैं…

शुरुआती आरोप: अमेरिकी न्याय विभाग ने मैनहट्टन की एक संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि भारत सरकार के एक कर्मचारी ने एक भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या को एक हत्यारे की तलाश करने का काम सौंपा। कथित तौर पर अमेरिकी अधिकारियों ने इस साजिश को नाकाम कर दिया था।

निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी: चेकोस्लोवाकिया सरकार के अधिकारियों ने 30 जून, 2023 को अमेरिका और चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। गुप्ता पर सुपारी किलिंग का आरोप है। इसके लिए अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है।

अमेरिक की आधिकारिक प्रतिक्रिया: अमेरिकी विदेश विभाग ने मामले के बारे में कुछ खास प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। उसने कहा कि जांच की उचित प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जब तक अदालत में आरोप सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक वह कुछ नहीं कहेगा।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया: भारत ने आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें ‘अनुचित और निराधार’ बताया। भारत सरकार ने मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: कथित साजिश ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया। रूस ने अमेरिका की तरफ से उपलब्ध कराए गए साक्ष्य पर सवाल उठाया। उसने कहा कि पन्नू ही हत्या की साजिश में भारतीय नागरिकों को शामिल होने का कोई पुष्ट सबूत नहीं है।

प्रत्यर्पण निर्णय: चेक अदालत ने फैसला सुनाया कि गुप्ता को उनके विरुद्ध आरोपों का सामना करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

अब भी धमकियां देता है पन्नू
यह मामला अभी भी कानूनी रूप से उलझा हुआ है। अमेरिका ने कानूनी-कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए निखिल गुप्ता के खिलाफ जांच जारी रखी है। भारत सरकार कथित साजिश में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार करती रही है और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस मामले में घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं। उधर, आतंकी पन्नू वक्त-वक्त पर वीडियो जारी कर भारत को खुलेआम धमकियां देता है, लेकिन उसकी हरकतों से अमेरिका के कानों पर जूं नहीं रेंगती है। इस बीच नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के रूप में अजित डोभाल का ही कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। सवाल है कि क्या अमेरिका को इस बात से भी खुन्नस खा सकता है। दरअसल, पन्नू हत्या की कथित साजिश के पीछे वह डोभाल का ही हाथ मानता है।

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