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आरएसएस से जुड़ी मराठी पत्रिका में बीजेपी से सवाल, महायुति के अंगने में अजित पवार का क्या काम है?

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मुंबई:

महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना की महायुति में एनसीपी (अजित पवार) की एंट्री के बाद से भगवा दल में घमासान मचा है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद एनसीपी के खिलाफ कार्यकर्ता मुखर नजर आए। अब आरएसएस से जुड़ी साप्ताहिक मराठी पत्रिका विवेक में एनसीपी और बीजेपी की दोस्ती पर सवाल खड़े किए गए हैं। विवेक में लिखे गए आलेख में बताया गया है कि बीजेपी के कार्यकर्ता हार के लिए एनसीपी के साथ गठबंधन को जिम्मेदार बता रहे हैं, इसका मतलब है कि उन्हें यह गठबंधन पसंद नहीं आ रहा है। बीजेपी के नेता भी इस बात को जानते हैं। शिवसेना से गठबंधन का समर्थन करते हुए बताया गया है कि हिंदुत्व पर आधारित गठबंधन बीजेपी और कार्यकर्ताओं के लिए सहज था, मगर एनसीपी के साथ ऐसा नहीं है। लोकसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद पार्टी और नेताओं ने मंथन किया था कि आखिर गलती कहां हुई? इसका जवाब खोजना जरूरी है।

आर्गेनाइजर में भी की गई थी अजित से गठबंधन की मुखालफत
बता दें कि इससे पहले आरएसएस की पत्रिका आर्गेनाइजर में भी एनसीपी के साथ गठबंधन पर टिप्पणी की गई थी। रतन शारदा ने अपने आलेख में कहा था कि महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ गठबंधन का फैसला सही नहीं था, इसलिए लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ब्रांड बैल्यू कम हो गई। इस कारण यह पार्टी विद डिफरेंस नहीं रही। उधर, कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अजित पवार से रिश्ते के कारण पार्टी का कैडर वोटिंग के लिए बाहर नहीं निकले और चुनाव में पार्टी की हार हुई। अगर बीजेपी विधानसभा चुनाव में गठबंधन जारी रखती है तो कार्यकर्ता निष्क्रिय हो सकते हैं और पार्टी की हार हो सकती है। हाल के एक सर्वे में सामने आया कि चुनाव हुए बीजेपी की सदस्यों की संख्या 100 के नीचे चली जाएगी और वह सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगी।

अजित खेमे में भी कुलबुलाहट, विधायक शरद के पास जाने को तैयार
दूसरी ओर, लोकसभा चुनाव के बाद अजित पवार की एनसीपी में कुलबुलाहट शुरु हो गई है। छगन भुजबल के अलावा पार्टी के कई बड़े नेताओं ने अजित से दूरी बनाने के संकेत दिए हैं। हाल ही में छगन भुजबल फिर शरद पवार से मिले। इसके बाद एनसीपी के चार कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। महायुति में विधानसभा में सीटों के बंटवारे को लेकर भी पेच फंसा है। सूत्रों के अनुसार, 288 सदस्यों वाली विधानसभा में एनसीपी ने 100 सीटों पर दावेदारी की थी, मगर बीजेपी और शिवसेना सिर्फ 55 सीट देने को राजी है। चर्चा है कि अजित पवार भी बीजेपी के इस प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। एनसीपी के नेता अमोल मितकारी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी का गठबंधन टूट सकता है।

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