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पत्नियां जाने लगीं मायके तो पंचायत ने लिया बड़ा फैसला, बिहार की तरह एमपी का यह गांव भी हो गया है शराब मुक्त

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टीकमगढ़

जिले का अंतोरा गांव जो कभी शराब, झगड़ा और पत्नियों के मायके चले जाने को लेकर जिले में ही नही बुंदेलखंड में चर्चित था। आखिरकार इस गांव की पंचायत ने गांव वालों की सहमति से शराब पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया। उस फैसले का असर आज यह है कि अब यह गांव शराब मुक्त हो गया है।

टीकमगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर अंतोरा गांव है जो बड़ा गांव ब्लॉक के अंतर्गत आता है। इस गांव के लोग पिछले कई सालों से शराब बेचते भी थे और शराब पीते भी थे। यह एक परंपरा के तौर पर चल रहा था। इस परंपरा की वजह से कई परिवार टूट गए थे और कई लोगों ने आत्महत्या भी कर लिया। शराब के चलते रोज गांव में झगड़ा- विवाद होता रहता था। इन सबसे परेशान होकर के गांव में एक पंचायत करने का फैसला लिया गया। इस पंचायत में सभी समाज के लोग शामिल हुए। सभी मिलकर यह फैसला लिया कि जो भी व्यक्ति ग्राम पंचायत के अंदर शराब पिएगा या बेचेगा उस पर पंचायत जुर्माना लगाएगी। इस जुर्माने से जो पैसा पंचायत को मिलेगा उससे गांव का विकास किया जाएगा। यह पंचायत आज से करीब दो माह पूर्व गांव में बुलाई गई थी। इस फैसले के बाद गांव शराब मुक्त हो गया है। पिछले 2 महीने से ना तो कोई गांव में शराब पीता है और ना ही शराब बेचता है। अब महिलाएं भी सुखी हैं और उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।

क्यों बुलाई गई पंचायत
अंतोरा गांव में शराब की लगातार घटनाएं बढ़ रही थीं। गांव की रहने वाली अंगूरी बाई ने बताया कि शराब की इतनी घटनाएं हो गई थी कि कई परिवारों की पत्नियां अपने पति और बच्चों को छोड़कर अपने मायके में रहने लगी थीं। कई परिवार टूट गए थे। इस कारण गांव के लोग भी परेशान थे और परिवार में झगड़ा और महिलाओं के साथ मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ रही थी। गांव के रहने वाली आलोक यादव ने बताया कि लगातार घटनाएं होने के कारण कई लोगों ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। जब गांव में लगातार अपराध बढ़ने लगा और पत्नियां मायके जाने लगीं तो सर्व समाज में पंचायत बुलाने का निर्णय लिया गया। गांव के पूर्व सरपंच प्रतिनिधि कैलाश राय ने भी इस बात की पुष्टि की है कि पिछले दो महीने पूर्व लिए गए पंचायत के फैसले के कारण अब गांव में शांति और अमन है। खास करके महिलाओं के चेहरे पर खुशी देखी जा सकती है।

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