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यूरोप में चल रही तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी! रूस से लड़ने के लिए चुपके से ताकत बढ़ा रहा नाटो, अब तक क्या-क्या किया?

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मॉस्को

रूस और यूक्रेन का युद्ध पूरे यूरोप में फैल सकता है। नाटो और उसके सदस्य देश रूस के साथ युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। यह तीसरे विश्वयुद्ध के खतरे को बढ़ाने वाला है। रूसी सेना की ओर से आने वाले भविष्य में उसकी सीमा के करीब के देशों पर हमले की चेतावनी दी जा रही है। इस कारण यूरोप के देशों में रक्षा से जुड़े उपायों की झड़ी लग गई है। जर्मनी की विदेशी खुफिया सेवा के प्रमुख ब्रूनो कहल ने नवंबर के अंत में कहा, ‘रूस पश्चिमी देशों के साथ युद्ध की तैयारी कर रहा है।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नाटो के कारण यह एक बड़ा हमला नहीं करेगा।

नाटो पूर्ण युद्ध और गठबंधन के सदस्यों को कमजोर करने के लिए उठाए गए कदम के लिए तैयारी में जुटा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक नाटो एकजुट है या नहीं, इसका टेस्ट करने के लिए रूस के पास कई स्पष्ट तकनीकें हैं। इसमें रूस की सीमित भूमि पर कब्जा भी शामिल है। यूरोपीय संघ के रक्षा आयुक्त एंड्रियस कुबिलियस ने सितंबर में कहा था कि रक्षा मंत्री और नाटो कमांडर इस बात पर सहमत है कि पुतिन छह से आठ वर्षों में नाटो और यूरोपीय संघ के साथ टकराव के लिए तैयार हो सकते हैं।

रूस से बचने की तैयारी
नाटो के पूर्वी सदस्य, जैसे पोलैंड और बाल्टिक देश अपनी सुरक्षा को बढ़ा रहे हैं। एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया ने रूस और उसके सहयोगी बेलारूस से संभावित घुसपैठ के खिलाफ सीमा सुरक्षा बढ़ाने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा जर्मनी दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान के अपने बंकरों को फिर से बेहतर बनाने में लगा है।

वह ऐसे एप तैयार कर रहा है, जिससे लोगों को हमले के दौरान करीबी बंकर के बारे में पता लग सकें। बेलारूस और रूस के कलिनिनग्राद एक्सक्लेव के साथ सीमा साझा करने वाला पोलैंड अपनी ‘ईस्ट शील्ड’ परियोजना में भारी निवेश कर रहा है।

रूस के डर से बढ़ा रहे सुरक्षा
यूरोपीय देश सैन्य ही नहीं नागरिक सुरक्षा प्रयासों में भी तेजी ला रहे हैं। नाटो के सबसे नए सदस्य स्वीडन और फिनलैंड ने नागरिकों की संकट की तैयारियों और युद्ध के समय जिम्मेदारी बताने के लिए पर्चे छापे हैं। लिथुआनिया में, निकासी योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। नाटो के लिए एयर डिफेंस एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता बनी हुई है।

बाल्टिक देशों और हंगरी ने संभावित हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए नई फैसिलिटी की घोषणा की है। हालांकि इन तैयारियों में भी फूट देखी जा रही है। पूर्वी यूरोप के देश जो रूस के करीब हैं वह जितनी तेजी से तैयारी कर रहे हैं, पश्चिमी यूरोप के देश उनसे काफी पीछे हैं।

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