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देश हित के लिए सैन्य ही नहीं ‘सिविलियन आर्मी’ की भी जरूरत : जस्टिस सूर्यकांत

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत का मानना है कि भारत को सेना के साथ सिविलियन आर्मी की भी जरूरत है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आर्थिक, राजनीतिक, कानून के शासन और सुशासन क्षेत्र में आगे बढ़ रहे राष्ट्र को न केवल सेना की आवश्यकता है, बल्कि विशेषज्ञों की एक सिविलियन आर्मी की भी जरूरत है। ये एक्सपर्ट देश के हितों की देखभाल करेंगे। उन्होंने ये बातें रविवार को राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में संबोधन के दौरान कही।

जस्टिस सूर्यकांत ने क्या कहा
राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी में लॉ स्टूडेंट्स की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के समापन सत्र को संबोधित करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यहां छात्रों को कानून के जटिल क्षेत्रों का अनुभव मिलता है। वे अंतरराष्ट्रीय कानून, वैश्विक सुरक्षा, साइबर आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर काम करते हैं। उन्होंने आर्थिक और वित्तीय अपराधों में बढ़ोतरी को देखते हुए छात्रों को रिसर्च में प्रशिक्षित होने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

सिविलियन आर्मी का जिक्र क्यों
जस्टिस सूर्यकांत ने इस दौरान कहा कि देश जिस तरह से विकास कर रहा ऐसे में भारतीय सेना के साथ-साथ एक्सपर्ट्स की एक सिविलियन आर्मी भी जरूरी है। ये सिविलियन आर्मी देश के अंदर और बाहर दोनों जगह राष्ट्र के हितों की लगन और बुद्धिमत्ता से देखभाल करे। कानून का क्षेत्र पूर्णता नहीं बल्कि दृढ़ता, जिज्ञासा और निष्पक्षता और समानता के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता की मांग करता है।

‘लॉ क्षेत्र में लगन, जिज्ञासा, निष्पक्षता जरूरी’
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि चाहे आप लॉ ग्रेजुएट्स हों, आपराधिक कानून या अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ हों, चाहे आप प्रोफेसर हों या वैज्ञानिक या इंजीनियर हों, या किसी अन्य जिम्मेदार पद पर हों। आप उस सिविलियन आर्मी का हिस्सा बन जाते हैं जो बहुत सावधानी से, बुद्धिमानी से और लगन से राष्ट्र के भीतर और बाहर हितों की देखभाल करती है। जस्टिस कांत ने कानून के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए लगन, जिज्ञासा और निष्पक्षता को जरूरी बताया।

जस्टिस सूर्यकांत ने किन मुद्दों पर जताई चिंता
जस्टिस कांत ने भारत जैसे देशों में बढ़ते आर्थिक और वित्तीय अपराधों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने छात्रों को इस क्षेत्र में रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कानूनी विशेषज्ञों की जरूरत होगी। इसलिए छात्रों को अभी से इस क्षेत्र में खुद को तैयार करना चाहिए।

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