11.5 C
London
Thursday, March 12, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयअमेरिका में भारतीय छात्र क्यों छोड़ रहे पार्ट-टाइम जॉब, ट्रंप सरकार के...

अमेरिका में भारतीय छात्र क्यों छोड़ रहे पार्ट-टाइम जॉब, ट्रंप सरकार के किस ‘आदेश’ से मची खलबली?

Published on

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका में पढ़ने गए भारतीय छात्रों के बीच डर का माहौल है। इमिग्रेशन नीतियों के कड़े होने की चर्चा तेज हो चुकी है और इस डर के मारे कई सारे भारतीय स्टूडेंट्स ने पार्ट-टाइम जॉब्स छोड़ दी हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद भारतीय छात्र डिपोर्ट किए जाने के डर से नौकरियां छोड़ रहे हैं। अमेरिका पढ़ने जाने वाले भारतीय छात्रों के बीच पार्ट-टाइम जॉब काफी ज्यादा पॉपुलर है। इससे उनकी अच्छी कमाई भी हो जाती है, लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं।

अमेरिका में F-1 वीजा पर पढ़ने गए विदेशी छात्रों को कैंपस में 20 घंटे प्रति हफ्ते काम करने की इजाजत होती है। हालांकि, बहुत से छात्र कैंपस के बाहर भी पार्ट-टाइम जॉब करते हैं। कई छात्र रहने-खाने के खर्च को कवर करने के लिए रेस्टोरेंट, गैस स्टेशन और दुकानों में बिना दस्तावेजों के काम करते हैं। ट्रंप सरकार ने संकेत दिए हैं कि इमिग्रेशन नियमों को कड़ा किया जा सकता है और अवैध तरीके से नौकरी करने वालों को डिपोर्ट किया जाएगा। इस वजह से भारतीय छात्र कैंपस के बाहर नौकरी करने से बच रहे हैं या उन्हें छोड़ रहे हैं।

छात्रों ने क्या कहा?
टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए, इलिनोइस में पढ़ रहे एक छात्र ने बताया, “मैं अपने मासिक खर्चों को कवर करने के लिए कॉलेज के बाद एक छोटे से कैफे में काम करता था। मैं प्रति घंटे 7 डॉलर कमाता था और हर दिन छह घंटे काम करता था।” उसने आगे कहा, “यह एक आरामदायक व्यवस्था थी, लेकिन मैंने पिछले हफ्ते यह सुनने के बाद छोड़ दिया कि इमिग्रेशन अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं। मैं कोई जोखिम नहीं ले सकता, खासकर तब जब यहां पढ़ाई करने के लिए मैंने 50,000 डॉलर (लगभग 42.5 लाख रुपये) उधार लिए हैं।”

न्यूयॉर्क में पढ़ रही एक अन्य छात्रा ने भी कुछ ऐसी ही बातें कहीं। उसने बताया, “हमने वर्कप्लेस पर रैंडम चेकिंग के बारे में सुना है। इसलिए, मैंने और मेरे दोस्तों ने अभी के लिए काम करना बंद करने का फैसला किया है। ये मुश्किल है, लेकिन हम डिपोर्ट या अपने स्टूडेंट वीजा को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। मेरे पैरेंट्स ने पहले ही मुझे यहां भेजने के लिए काफी त्याग किया है।” छात्रों ने संकेत दिया है कि अभी वे कुछ महीनों में अपने काम के ऑप्शन देखेंगे, लेकिन वर्तमान में वे गुजारा करने के लिए भारत में दोस्तों और परिवार से मिल रहे पैसे पर निर्भर हैं।

Latest articles

समय पर खर्च करें केंद्रीय निधि, ताकि विकास की गति बनी रहे: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के विकास में केंद्रीय सहायता प्राप्त योजनाओं...

ईरान जंग का असर: देश में रसोई गैस का हाहाकार, ब्लैक में 1800 तक पहुंचा घरेलू सिलेंडर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बाद भारत में रसोई गैस की भारी किल्लत...

शादी के लिए पुजारी का अपहरण कर वसूले 50 हजार, मंडप से गिरफ्तार हुआ गैंग सरगना ‘भूरा हड्डी’

भोपाल जधानी की कोहेफिजा पुलिस ने पुजारी के अपहरण और अवैध वसूली के मामले में...

एमपी में बेटियां आजीवन पूजी जाती हैं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नारी शक्ति के सम्मान और उनके...

More like this

ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने मुजतबा खामेनेई

तेहरान। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को...

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का दावा, ईरानी मीडिया ने दी जानकारी

ईरानी मीडिया तस्नीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने दावा किया है कि ईरान के...