भारतीय रिजर्व बैंक ( आरबीआई ) ने नियमों का पालन न करने की चिंताओं का हवाला देते हुए अपनी यूनिट पेटीएम पेमेंट्स बैंक को अपनी कई गतिविधियों को रोकने का आदेश दिया है, जिसके बाद से दलाल स्ट्रीट पर कई लोग पेटीएम शेयरों को डंप कर रहे हैं. लेकिन इसे पूर्वानुमान कहें या एफआईआई की दूरदर्शिता, विदेशी संस्थागत निवेशकों ( एफआईआई ) को दिसंबर तिमाही में ही फिनटेक प्रमुख के लिए परेशानी का एहसास हो गया था और वे इतने चतुर थे कि उन्होंने पहले ही यह स्टॉक बेच दिया.पेटीएम के अलावा, मारुति सुजुकी और पेट्रोनेट एलएनजी के शेयर भी एफपीआई की फायरिंग लाइन में थे. दोनों काउंटरों पर एफआईआई ने 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे. तिमाही के अंत में मारुति के शेयरों में 3% की गिरावट आई, जबकि इस अवधि के दौरान पेट्रोनेट एलएनजी के शेयरों में 7% से अधिक की गिरावट आई.
तिमाही आधार पर 689 एनएसई लिस्टेड कंपनियों में एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी कम की. एनएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों में मूल्य के हिसाब से उनकी हिस्सेदारी दिसंबर तिमाही के अंत में घटकर 18.19% हो गई, जो सितंबर के अंत में 18.40% थी. हालांकि निवेश किये गए रुपये के संदर्भ में FII की हिस्सेदारी 65.11 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछली तिमाही की तुलना में 12.69% अधिक है. इसका अर्थ यह है कि एफआईआई ने कुछ कंपनियों में अपनी पोज़ीशन हल्की कर ली, लेकिन साथ ही अन्य कंपनियों में अपनी पोज़ीशन बढ़ा भी ली.मुकेश अंबानी की जियो फाइनेंशियल सर्विसेज विदेशी निवेशकों द्वारा बेचा जाने वाला चौथा सबसे अधिक बिकने वाला स्टॉक रहा. दिसंबर तिमाही में स्टॉक से 2,355 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई.
दिलचस्प बात यह है कि जहां एफआईआई ने पेटीएम में मुनाफावसूली की. वहीं 31 जनवरी को आरबीआई की घोषणा के बाद से छोटे निवेशकों को भारी झटका लगा है. खुदरा निवेशकों ने विजय शेखर शर्मा की कंपनी में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई और दिसंबर तिमाही के दौरान काउंटर पर लगभग 2.89 करोड़ शेयर खरीदे.पेटीएम अकेला नहीं है. जियो फाइनेंशियल, सुजलॉन एनर्जी और मारुति सुजुकी भी खुदरा निवेशकों की खरीदारी सूची का हिस्सा थे, जबकि एफआईआई ने उनमें बिकवाली की थी. हालिया आउटफ्लो के बावजूद, पेटीएम (63.72%) और डेल्हीवरी (62.70%) उच्चतम एफआईआई होल्डिंग्स वाली शीर्ष कंपनियों में से एक बनी हुई हैं.
