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पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की थी तैयारी, 1 घंटे तक उपद्रवियों से लड़ती रही ‘लेडी सिंघम’… मऊगंज हिंसा की सुनाई आपबीती

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मऊगंज,

मऊगंज जिले के गडरा गांव में 15 मार्च को हुई सनसनीखेज हिंसा में उपद्रवियों ने पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) और दो नागरिकों की हत्या कर दी थी, जबकि तहसीलदार सहित 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए. लेकिन सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDOP) अंकिता शूल्या की साहस और सूझबूझ ने एक बड़े हादसे को टाल दिया. अंकिता 1 घंटे 10 मिनट तक आदिवासी उपद्रवियों के चंगुल में फंसी रहीं और अपनी जान जोखिम में डालकर फर्ज निभाया. हिंसा की शुरुआत और पुलिस पर हमला…

दरअसल, 15 मार्च को शाहपुर थाना इलाके के गडरा गांव में एक युवक की हत्या के बाद उपद्रवियों ने 5 आरोपियों को छोड़ने की मांग को लेकर पुलिस पर हमला बोल दिया. SDOP अंकिता शूल्या उस पुलिस टीम का नेतृत्व कर रही थीं, जो शव को कब्जे में लेने और आरोपियों को हिरासत में लेने गई थी.

एसडीओपी अंकिता ने बताया, “जैसे ही हमने हत्या के आरोपियों को हिरासत में लिया, पूरा गांव धमकाते हुए गाली-गलौज करने लगा. हमारी मांग को ठुकराने पर उपद्रवियों ने मुझे, मेरे बॉडीगार्ड और ड्राइवर को कमरे में बंद कर दिया. वे पेट्रोल-डीजल डालकर हमें जिंदा जलाने की योजना बना रहे थे.”

खौफनाक मंजर में अंकिता ने नहीं हारी हिम्मत
उपद्रवियों ने कमरे में आग लगाने की धमकी दी, लेकिन अंकिता ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने प्रभारी आईजी साकेत पांडे, एसपी रसना ठाकुर और अन्य अधिकारियों से संपर्क बनाए रखा. उपद्रवियों ने आरोपियों को छोड़ने की शर्त रखी, लेकिन अंकिता ने अपनी जान की परवाह न करते हुए ड्यूटी को प्राथमिकता दी. 1 घंटे 10 मिनट तक वह उपद्रवियों से जूझती रहीं. आखिरकार, भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और हवा में फायरिंग कर स्थिति को नियंत्रित किया. इस दौरान अंकिता, उनके बॉडीगार्ड और ड्राइवर को सुरक्षित निकाला गया.

ASI की शहादत, 7 पुलिसकर्मी घायल
हालांकि, इस हिंसा में एक ASI की जान चली गई और तहसीलदार सहित 7 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए. पुलिस के पास हथियार होने के बावजूद किसी सिविलियन पर गोली नहीं चलाई गई, जिससे कोई अतिरिक्त जानहानि नहीं हुई. अंकिता की सूझबूझ ने हालात को और बिगड़ने से रोक दिया. पुलिस ने हत्याकांड में शामिल 20 उपद्रवियों को हिरासत में लिया है और कार्रवाई शुरू कर दी है.

पुलिस में गम और गुस्सा
ASI की मौत और कई पुलिसकर्मियों के घायल होने से पुलिस बल में शोक और गुस्सा है. लेकिन अंकिता शूल्या की बहादुरी की चर्चा हर तरफ हो रही है. उनकी हिम्मत ने न सिर्फ उनकी और उनके साथियों की जान बचाई, बल्कि एक बड़ी तबाही को भी रोक दिया. इस घटना ने पुलिस की संयम और साहस की मिसाल पेश की है.

आगे की जांच जारी
पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हिंसा एक पुराने विवाद से जुड़ी हो सकती है. मऊगंज प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. SDOP अंकिता शूल्या की इस बहादुरी को लेकर प्रशासन और जनता में उनकी तारीफ हो रही है.

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