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अब आतंकवादियों के जनाजे का जुलूस नहीं निकलता… अमित शाह ने संसद में बताया कश्मीर में क्या कुछ बदला है

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नई दिल्ली

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को राज्यसभा को संबोधित किया। उन्होंने देश की आतंरिक सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने की रणनीति, विकास कार्य समेत अन्य मुद्दों का जिक्र किया। अमित शाह ने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद दम तोड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पहले कश्मीर में आतंकवादियों के जनाजे का जुलूस निकलता था, लेकिन अब जहां आतंकी मरते हैं वहीं दफना दिया जाता है। घाटी में किसी भी आतंकी का जुलूस नहीं निकलता। उन्होंने कहा कि हमने आतंकवाद और आतंकवादी दोनों के समर्थकों की भी कमर तोड़ दी।

‘अब आतंकियों का जुलूस नहीं निकलता’
अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा कि पहले कैसे आतंकवादियों के जनाजे का जुलूस निकलता था। पहले भी आतंकवादी मारे जाते थे हमारे समय में अधिक मारे जाते हैं। लेकिन एक भी जुलूस नहीं निकलता है। जहां मरते हैं वहीं दफना दिया जाता है। कोई आतंकवादी बन जाता था पहले तो उसके परिवारजन मौज से सरकारी नौकरी करते थे। हमने ढेर सारे आतंकवादियों के परिवारवालों को नौकरी से बाहर निकालने का काम किया।

‘भारत मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार’
गृहमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत हुई है। नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक साथ सभी समस्याओं पर वार किया। गृह मंत्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद उरी और पुलवामा में हमले हुए। हालांकि, 10 दिनों के भीतर ही भारत ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करके मुंहतोड़ जवाब दिया। केवल दो देश, अमेरिका और इजरायल, अपनी सुरक्षा और सीमाओं के लिए खड़े होते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को भी इस सूची में शामिल कर लिया।

‘आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति’
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीर में आए दिन, पड़ोसी देश से आतंकवादी घुसकर बम धमाके करते थे। एक भी त्योहार ऐसा नहीं होता था, जो चिंता के बगैर मनाया जाता था, लेकिन केंद्र सरकार का रवैया लचीला होता था, बोलने में डर लगता था, चुप्पी साध जाते थे, वोट बैंक का डर था। पीएम मोदी के आने के बाद आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई।

‘कश्मीर में ये तीन नासूर थे’
अमित शाह ने कहा कि ये तीन नासूर थे- जम्मू कश्मीर में आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद और उत्तर पूर्व का उग्रवाद। इन समस्याओं के कारण चार दशक में देश के करीब 92 हजार नागरिक मारे गए। इसके बावजूद इन समस्याओं के संपूर्ण उन्मूलन के लिए एक सुनियोजित प्रयास कभी नहीं हुआ था, जो नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद हुआ।

सदन को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने सबसे पहले देश की आजादी के बाद, देश की आंतरिक सुरक्षा को और देश की सरहदों को सुरक्षित करने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले राज्य पुलिस और सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स के हजारों शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इनके बलिदान से ही देश आजादी के 76 साल पार कर विश्व में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मैं बलिदानियों के परिवारजनों को भी मनपूर्वक धन्यवाद करता हूं। उनके सर्वोच्च बलिदान को ये देश, ये सदन कभी भूला नहीं पाएगा।

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