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Thursday, May 7, 2026
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बिहार में अब तक JDU के 7 मुस्लिम नेताओं का इस्तीफा, वक्फ की आंच में झुलस रही नीतीश की पार्टी

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आरा:

संसद ने वक्फ बिल संशोधन अधिनियम 2025 को पास तो कर दिया, मगर बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया। जेडीयू के सात नेताओं ने इसके विरोध में पार्टी से इस्तीफा दे दिया। केंद्र सरकार का कहना है कि ये मुसलमानों के लिए बहुत फायदेमंद है। इस बिल के पास होने से मुसलमानों को उनकी जमीन और जायदाद वापस मिल सकेगी, जिस पर पुराने कानूनों के कारण कब्जा कर लिया गया था। जेडीयू ने इस बिल का समर्थन किया है, जिसके कारण पार्टी के कई मुस्लिम नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि जेडीयू अब बीजेपी के लिए काम कर रही है।

वक्फ संशोधन पर जेडीयू में बवाल
वक्फ बिल संशोधन अधिनियम 2025 संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है। केंद्र सरकार इस बिल को मुसलमान के लिए काफी फायदेमंद बता रही है। इस संशोधन अधिनियम के पारित हो जाने से मुसलमान भाइयों को काफी फायदा होगा। सरकार का कहना है कि पुराने कानून की वजह से जमीन-जायदाद से लेकर काफी प्रॉपर्टी पर कब्जा किया गया है। इसको मुक्त कराकर वापस किया जाएगा। वहीं, इस बील के संसद के दोनों सदनों में पारित हो जाने के बाद राष्ट्रपति के पास जाएगा, जहां उनकी स्वीकृति मिलने के बाद ये संशोधन बिल पूरी तरह से कानून जाएगा।

आरा के भी जेडीयू नेताओं का इस्तीफा
वक्फ बिल संशोधन अधिनियम 2025 पर केंद्र सरकार का साथ जेडीयू ने भी दिया है। इस अधिनियम के पारित होने को लेकर नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से मुस्लिम नेताओं का त्यागपत्र देने का सिलसिला लगातार जारी है। भोजपुर जिले में भी इस वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के पारित होने के बाद कम से कम सात मुस्लिम नेताओं ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वाले नेताओं ने कहा कि लाखों भारतीय मुसलमानों का जनता दल यूनाइटेड के प्रति अटूट विश्वास था क्योंकि उन्हें यह लग रहा था कि जदयू विशुद्ध रूप से सेक्युलर विचारधारा के तहत काम करने वाली पार्टी है। बिल के पास हो जाने के बाद जदयू के स्टैंड से पार्टी के कुछ मुस्लिम नेताओं में नाराजगी दिख रही है। जिसके कारण कुछ लोगों ने इस्तीफा दिया है।

भोजपुर के दो जेडीयू नेता ने छोड़ी पार्टी
जेडीयू के भोजपुर जिला अध्यक्ष संजय कुमार सिंह को भेजे गए इस्तीफा में आजाद आलम (जिला सचिव जनता दल यूनाइटेड) दिलशाद राइन कई आरोप लगाए हैं। जनता दल यूनाइटेड नेता और फरीदी खान युवा जदयू महासचिव भोजपुर ने कहा कि इस संशोधन अधिनियम के पक्ष में जिस तरह से जेडीयू ने अपना स्टैंड क्लियर करते हुए इसको समर्थन देने का ऐलान किया है, उससे ये लग रहा है कि ये पार्टी पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी के लिए समर्पित हो गई है। इसलिए उन लोगों ने अपना फैसला लेते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके पहले रजू नैयर, तबरेज सिद्दीकी अलीग, मोहम्मद शहनवाज मलिक और मोहम्मद कासिम अंसारी ने भी इस्तीफा दिया था। वहीं, इस संदर्भ में जदयू के जिला अध्यक्ष संजय कुमार सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि अभी उनके पास ऐसी कोई सूचना नहीं आई है। इस्तीफा देने वाले पार्टी के प्राथमिक सदस्य हैं या नहीं ये जांच के बाद ही पता चल पाएगा। इस संदर्भ में अगर कोई पत्र आता है तो इस पर वो कुछ बता सकते हैं।

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