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मकान खरीदें या किराए पर रहें? 20 साल की बचत भी काफी नहीं, एक्‍सपर्ट ने समझाया पूरा गणित

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नई दिल्‍ली

आजकल भारत में मकान खरीदना बहुत मुश्किल हो गया है। इन्वेस्टमेंट बैंकर सार्थक आहूजा ने लिंक्‍डइन पर एक पोस्ट में बताया कि क्यों शहरों में मकान खरीदना आम आदमी के लिए नामुमकिन होता जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मकान खरीदने की सोच रहे लोग क्या कर सकते हैं। आहूजा लिखते हैं, ‘अगर आप भारत में मकानों के प्राइस टू इनकम(P2I) रेशियो को देखें – यानी मकान खरीदने के लिए आपको अपनी कितने साल की कमाई देनी होगी – तो शहरों में यह औसतन 11 है।’ इसका मतलब है कि आपको 11 साल की पूरी कमाई देनी होगी। अगर आप मानते हैं कि आपकी 50% कमाई खर्चों में चली जाती है तो यह 20 साल से ज्‍यादा की बचत होगी।

आहूजा के अनुसार भारत में मकानों की कीमत आसमान छू रही है। कारण है कि यहां बिल्डिंग के नियम पुराने हैं, डेवलपर्स कृत्रिम रूप से कमी पैदा करते हैं और रियल एस्टेट काले धन को लगाने का एक साधन बन गया है। उनका सुझाव है कि मकान तभी खरीदें जब आप कम से कम 50% डाउन पेमेंट कर सकें और ईएमआई आपकी आमदनी के 35% से कम हो। नहीं तो, किराए पर रहें और अपनी आय बढ़ाएं। मेट्रो शहरों के बजाय टियर 2 शहर बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

आहूजा बताते हैं कि भारत में मकान खरीदना इतना मुश्किल क्यों है। वह कहते हैं कि शहरों में मकान खरीदने के लिए आपको अपनी 11 साल की पूरी कमाई देनी होगी। अगर आपके खर्चे भी हैं तो आपको 20 साल से ज्‍यादा की बचत करनी होगी। उनका कहना है कि भारत का P2I रेशियो न्यूयॉर्क जैसा है, जो दुनिया के सबसे महंगे शहरों में से एक है।

मकान खरीदने में आने वाली मुश्किलों के तीन कारण
1. पुराने बिल्डिंग नियम: भारत में फ्लोर स्‍पेस इंडेक्‍स (FSI) बहुत कम है। ज्‍यादातर मेट्रो शहरों में एफएसआई 1.3 से 3.5 है। इससे बिल्डिंग की ऊंचाई कम रहती है। इसलिए, उतने ही लोगों को रखने के लिए ज्‍यादा जमीन की जरूरत होती है। इसकी तुलना में अमेरिका में औसत FSI 15 है और सिंगापुर में 25 है। FSI का मतलब है कि आप अपनी जमीन पर कितनी ऊंची बिल्डिंग बना सकते हैं।

2. डेवलपर्स का गंदा खेल: आहूजा का कहना है कि प्राइवेट डेवलपर्स एक ‘गंदा खेल’ खेलते हैं। वे 100 यूनिट के प्रोजेक्ट में सिर्फ 5 यूनिट बेचते हैं ताकि कमी दिखाकर कीमतें बढ़ा सकें। फिर वे अगली 5 यूनिट 10% ज्‍यादा कीमत पर बेचते हैं। इससे डिमांड ज्‍यादा होने का दिखावा बना रहता है और कीमतें बढ़ती रहती हैं।

3. रियल एस्टेट में काला धन: आहूजा के अनुसार, भारत में रियल एस्टेट का एक बड़ा हिस्सा काले धन से चलता है। उन्‍होंने कहा, ‘ऐसा कहा जाता है कि मुंबई में 20% जमीन 10 से भी कम परिवारों के पास है। आधी मुंबई 500 परिवारों के पास है।’ इसका मतलब है कि कुछ लोगों के पास बहुत ज्‍यादा जमीन है। इससे कीमतें बढ़ जाती हैं।

मकान तभी खरीदें जब…
आहूजा मकान खरीदने वालों को सलाह भी देते हैं। उनका कहना है कि मकान तभी खरीदें जब आप कम से कम 50% डाउन पेमेंट कर सकें। EMI आपकी आमदनी के 35% से कम हो। अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो किराए पर रहें और अपनी आय बढ़ाएं। उनका यह भी कहना है कि टियर 2 शहर मेट्रो शहरों से ज्‍यादा बेहतर विकल्प हो सकते हैं। टियर 2 शहर छोटे शहर होते हैं जहां मकान खरीदना मेट्रो शहरों से सस्ता होता है।

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