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सऊदी अरब में ‘बंधक’ बने 400 भारतीय, समय पर नहीं मिल रहा भोजन और सैलरी, अब PM मोदी से लगाई वतन वापसी की गुहार

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गोपालगंज

बिहार के गोपालगंज सहित कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रमिक खाड़ी देशों में रोज़गार की तलाश में जाते हैं, लेकिन हर बार किस्मत सभी का साथ नहीं देती। इस बार एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सऊदी अरब की एक कंपनी में काम करने गए सैकड़ों भारतीय मजदूरों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी की ओर से न तो समय पर भोजन दिया जा रहा है और न ही वेतन। यहां तक कि उन्हें वतन वापसी की इजाजत भी नहीं दी जा रही है। उनके जरूरी कागज कंपनी ने जमा कर रखे हैं। अब मजदूरों ने पीएम मोदी, सीएम नीतीश कुमार से वतन वापसी के लिए मदद की गुहार लगाई है।

सऊदी में बंधक बने हैं सैकड़ों भारतीय मजदूर
गोपालगंज के दर्जनों मजदूर पिछले वर्ष सऊदी की सेंडन इंटरनेशनल कंपनी लिमिटेड में नौकरी करने गए थे। लेकिन बीते 8-9 महीनों से उन्हें न तो समय पर भोजन मिल रहा है और न ही वेतन। हालात इतने खराब हैं कि कंपनी ने उनकी वतन वापसी पर भी रोक लगा दी है, जिससे वे बंधक जैसी स्थिति में जीने को मजबूर हैं। इन मजदूरों में राजकिशोर कुमार, बलिंदर सिंह, दिलीप कुमार चौहान, शैलेश कुमार चौहान, ओमप्रकाश सिंह, रवि कुमार, राजीव रंजन, हरिंदर चौहान और सीवान के उमेश साह जैसे नाम शामिल हैं।

बिहार, यूपी और बंगाल के मजदूर भी संकट में
यह मामला केवल गोपालगंज तक सीमित नहीं है। बिहार के अन्य जिलों, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के भी लगभग 400 मजदूर इसी कंपनी में बंधक बने हुए हैं। सभी ने वीडियो संदेश भेजकर भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

भारतीय दूतावास से कोई मदद नहीं मिलने का आरोप
मजदूरों का कहना है कि उन्होंने कई बार भारतीय दूतावास से संपर्क किया, मेल और फोन कॉल के माध्यम से अपनी समस्या बताई, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली है। इससे उनके बीच निराशा और भय का माहौल है।

सांसद डॉ. आलोक सुमन ने की मदद की पहल
इस मामले की जानकारी मिलने पर गोपालगंज के सांसद और जदयू के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार सुमन ने हस्तक्षेप किया है। उन्होंने बताया कि कुछ मजदूरों के परिजनों ने उनसे संपर्क कर पूरी जानकारी दी, जिसे उन्होंने विदेश मंत्रालय को भेज दिया है।डॉ. सुमन ने कहा कि बंधक बने मजदूरों से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनकी पहचान और हालात की पुष्टि कर विदेश मंत्रालय आवश्यक कार्रवाई कर सके और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाया जा सके।

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