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Akash Prime missile: भारत की वायु रक्षा में नया मील का पत्थर DRDO ने ‘आकाश प्राइम सिस्टम’ का सफल परीक्षण किया, दुश्मन के ड्रोन और विमानों को देगा मुंहतोड़ जवाब

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Akash Prime missile:ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की वायु रक्षा प्रणाली की चर्चा पूरे विश्व में हुई थी. भारत ने चीन और तुर्की के ड्रोनों को चुनिंदा रूप से मार गिराया था. यह कारनामा रूसी निर्मित S-400 और स्वदेशी आकाश प्रणाली ने मिलकर किया था. अब भारत ने एक और स्वदेशी रक्षा प्रणाली विकसित कर ली है. DRDO ने सतह से हवा में मार करने वाली ‘आकाश प्राइम सिस्टम’ को विकसित किया है. बुधवार को इसका परीक्षण किया गया.

15000 फीट की ऊँचाई पर सफल परीक्षण

भारतीय सेना ने बुधवार को ‘आकाश प्राइम सिस्टम’ का सफल परीक्षण किया. सेना की वायु रक्षा इकाई ने DRDO अधिकारियों के सहयोग से लद्दाख में 15000 फीट से ज़्यादा की ऊँचाई पर यह परीक्षण किया. बताया गया कि परीक्षण के दौरान, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों ने अत्यधिक ऊँचाई वाले क्षेत्र में तेज़ रफ़्तार वाले विमानों पर दो हमले किए. ये हमले पूरी तरह से सफल रहे. सेना इस प्रणाली की तीसरी और चौथी रेजिमेंट का गठन करेगी.

ऑपरेशन सिंदूर में आकाश मिसाइल की भूमिका

पहलगाम हमले के बाद, भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इसमें भारत ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया था. इससे नाराज़ होकर पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन हमले किए थे. भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने उन ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया था. इस दौरान, आकाश मिसाइलों ने बड़ी भूमिका निभाई थी. अब DRDO ने इसके प्राइम संस्करण का परीक्षण किया है.

आकाश प्राइम सिस्टम’ की ताकत

आकाश मिसाइल को 2009 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था. आकाश की एक बैटरी में चार लॉन्चर होते हैं, जिनमें से प्रत्येक में तीन मिसाइलें होती हैं. प्रत्येक बैटरी 64 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और 12 लक्ष्यों पर हमला कर सकती है. मिसाइल में 60 किलोग्राम का उच्च विस्फोटक लगा होता है. आकाश प्रणाली पूरी तरह से मोबाइल है और वाहनों के चलते काफिले को भी सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है. यह प्रणाली 2,000 वर्ग किमी के क्षेत्र के लिए वायु रक्षा सुरक्षा प्रदान करती है.

यह भी पढ़िए: बीएचईएल हरिद्वार ने डिस्पैच किया 800 मेगावाट सुपर क्रिटिकल जनरेटर स्टेटर

भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता

‘आकाश प्राइम सिस्टम’ का सफल परीक्षण भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है. यह दर्शाता है कि भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए स्वदेशी तकनीकों पर कितना भरोसा कर रहा है. यह प्रणाली भविष्य में भारतीय वायुसेना और सेना दोनों के लिए एक मज़बूत सुरक्षा कवच प्रदान करेगी.

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