14.3 C
London
Monday, April 20, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयदुनिया की सबसे विवादित मस्जिद बनी अल अक्‍सा, इसकी खातिर अमेरिका ने...

दुनिया की सबसे विवादित मस्जिद बनी अल अक्‍सा, इसकी खातिर अमेरिका ने इजरायल को दी धमकी

Published on

काहिरा/यरुशलम

अल अक्‍सा जिसे किबिल मस्जिद के नाम से भी जानते हैं। यरुशलम में बसी यह मस्जिद काफी विवादित है। इस मस्जिद को टेंपल माउंट की जगह पर बनाया गया है। इसे अल अक्‍सा कंपाउंड या हरम इश शरीफ कहा जाता है। यरुशलम में यूनेस्‍को की तरफ से लिस्‍ट की गई अल अक्‍सा मस्जिद को कई बार बनवाया गया है। पिछले दिनों इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने पूर्वी यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद परिसर के फ्लैशपॉइंट पवित्र स्थल का दौरा किया। उनके इस दौरे पर मध्य पूर्व के मुस्लिम देशों ने विरोध किया है।

फिलिस्तीनी राष्ट्रपति के प्रवक्ता नबील अबू रुदिनेह ने बेन-गवीर की अल-अक्सा की यात्रा की निंदा की। पिछले पांच सालों में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी इजरायली मंत्री ने अल-अक्सा मस्जिद का दौरा कर फिलिस्तीन, अरब देश और अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को एक चुनौती दी है। इसके बाद जॉर्डन ने अम्मान में इजरायल के राजदूत को तलब किया और कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि इजरायल ऐसे सभी उल्लंघनों को तुरंत बंद करे।

अमेरिका ने धमकाया
इजरायली मंत्री नबील अबू रुदिनेह ने आगे कहा, ‘इजरायल के अधिकारियों ने अल-अक्सा में मौजूदा ऐतिहासिक और कानूनी वास्तविकता में बदलाव करने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वह इन प्रयासों में कभी कामयाब नहीं हो सकेंगे।’ उन्होंने चेतावनी दी कि यरूशलेम और इसके पवित्र स्थल एक रेड लाइन हैं, जिसे पार नहीं किया जा सकता।

फिलिस्तीनी प्रधानमंत्री मोहम्मद इश्तेय ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण के साप्ताहिक कैबिनेट को बताया कि इस्लाम में तीसरा सबसे पवित्र स्थल अल-अक्सा मस्जिद परिसर में बेन-गवीर का दौरा फिलिस्तीनी लोगों के लिए एक गंभीर चुनौती है। गाजा पट्टी के सत्तारूढ़ गुट हमास के एक प्रवक्ता हेजेम कासेम ने एक बयान में इजरायली मंत्री की यात्रा की निंदा करते हुए कहा कि फिलिस्तीनी लोग अपने पवित्र स्थानों और अल-अक्सा मस्जिद की रक्षा करना जारी रखेंगे। अमेरिका ने भी कहा है कि अगर इजरायल ने इस मस्जिद की यथास्थिति को बदलने की कोशिशें की तो फिर ठीक नहीं होगा।

सबसे पवित्र जगह
सन् 1948 से, जॉर्डन के एक निकाय, यरुशलम इस्लामिक वक्फ पवित्र स्थल की देखभाव कर रहा है। इजरायल और जॉर्डन के बीच सन् 1967 के एक समझौते के तहत, गैर-मुस्लिम उपासक परिसर में जा सकते हैं, लेकिन वहां प्रार्थना करना प्रतिबंधित है। यरुशलम स्थित यह मस्जिद येनूस्‍को की वर्ल्‍ड हैरिटेज साइट में शामिल हैं। इस मस्जिद को इस्‍लाम में तीसरी सबसे पवित्र जगह माना जाता है।

कई भूकंप भी नहीं हिला सके
कई भूकंपों ने इस मस्जिद को हिलाया दिया लेकिन मस्जिद की खूबसूरती आज भी बरकरार है। आज भी इस मस्जिद को इस्‍लाम धर्म में सबसे पवित्र जगह माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि पैगंबर मुहम्‍मद रात में सफर करके मक्‍का की अल हरम मस्जिद से यहां पर पहुंचे। यहां से ही उन्‍होंने स्‍वर्ग का रास्‍ता तय किया था। हर शुक्रवार को यहां पर हजारों मुसलमान नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा होते हैं।

इस मस्जिद को सन् 1035 में खोला गया था। अल-अक्सा इस्लाम धर्म में मक्का और मदीना के बाद तीसरा पवित्र स्थल है। यरुशलम पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के जीवनकाल के दौरान और उनकी मृत्यु के तुरंत बाद के वर्षों के दौरान एक दूरदर्शी प्रतीक रहा जैसा कि मुस्लिमों ने इराक और उसके बाद सीरिया को नियंत्रित किया। यरुशलम 640 ईसा में में मुसलमानों के नियंत्रण में आ गया था।

जब खोदी गई मस्जिद
इसके बाद यरुशलम एक मुसलमान शहर बन गया और यरुशलम में अल अक्सा मस्जिद मुस्लिम साम्राज्य में सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक बनी। इस शहर के जटिल और युद्ध के इतिहास के दौरान, अक्सा मस्जिद यरुशलम के लिए संघर्ष स्थल रहा है। मुस्लिम, ईसाई और यहूदी सभी के साथ मस्जिद के नीचे की जमीन को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, जिस कारण इस जमीन के इतिहास को समझने का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। सन् 1967 के युद्ध के बाद टेम्पल माउंट के बाहर खुदाई हुईं। सन् 1970 में, इजरायल के अधिकारियों ने दक्षिणी और पश्चिमी दोनों ओर मस्जिद के बगल में दीवारों के बाहर गहन खुदाई शुरू की थी।

क्‍यों कहते हैं रेड लाइन
हमास के मुखिया ने अल अक्‍सा को ‘रेड लाइन’ के तौर पर करार दिया है। यह दिन सन् 1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्‍जे को लेकर मनाया जाता है। 6 मई 2021 को आखिरी बार रमजान के मौके पर यहां पर बवाल हुआ था। उस समय यह तनाव तब शुरू हुआ जब पूर्वी यरुशलम में स्थित शेख जराह में कई फिलीस्‍तीनी परिवारों को निकाल दिया गया। इसके साथ ही साथ इजरायली अथॉरिटीज ने मस्जिद के सबसे महत्‍वपूर्ण दमिश्‍क गेट प्‍लाजा को भी ब्‍लॉक कर दिया था। यह मस्जिद हमेशा से ही संवेदनशील रही है। इस मस्जिद की दोनों देशों के लिए एतिहासिक और पारंप‍रिक अहमियत है।

Latest articles

भोपाल तमिल संगम ने सफलतापूर्वक किया बीटीएस तमिल उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह और भव्य तमिल नव वर्ष समारोह का आयोजन 

भोपाल। मध्य भारत में तमिल समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से...

नारी शक्ति वंदन विधेयक गिरने के विरोध में भाजपा आज निकालेगी आक्रोश रैली

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने रविवार को...

राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश

वार्ड 68 में 1 करोड़ 37 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन और...

भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर बैरसिया भगवामय, जयघोषों के बीच निकली भव्य विशाल बाइक रैली

राजेन्द्र शर्मा बैरसिया। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर रविवार को नगर बैरसिया भगवान...

More like this

ट्रम्प बोले- इजराइल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर राजी, आज रात 2:30 बजे से लागू होगा

दोनों देशों से बात कर सहमति बनाई तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा...

इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता: लेबनान पर तकरार, तेहरान और अमेरिका अपनी शर्तों पर अड़े!

नई दिल्ली। लगभग छह हफ़्तों तक चले विनाशकारी संघर्ष के बाद अब पूरी दुनिया...