नई दिल्ली,
भारत और चीन के सैनिकों के बीच अरुणाचल प्रदेश में हुई झड़प की खबरों के बीच चीन लगातार अपना आक्रामक रुख दिखा रहा है. खबर है कि बीते 24 घंटे में चीन ने ताइवान के हवाई रक्षा क्षेत्र में परमाणु क्षमता वाले 18 बमवर्षक (H-6 Bomber Aircraft) विमान भेजे हैं.
ताइवान के रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस दौरान चीन के कुल 21 विमानों ने ताइवान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की, जिनमें 18 न्यूक्लियर क्षमता से लैस 18 बमवर्षक थे. रिपोर्ट के मुताबिक, इसे ताइवान के हवाई क्षेत्र में चीन के विमानों की अब तक की सबसे बड़ी घुसपैठ माना जा रहा है.
क्या है चीन-ताइवान विवाद?
दरअसल ताइवान खुद को अलग देश मानता है जबकि चीन इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है. चीन किसी भी देश के ताइवान के साथ राजनायिक संबंधों को नकारता रहा है. ताइवान का अपना संविधान है और यहां लोगों की चुनी हुई सरकार है. लेकिन इस बीच ताइवान पर लगातार चीन के हमले का डर बना हुआ है.
ताइवान में 2016 के चुनाव के बाद से ही चीन ने उस पर सैन्य, राजनयिक और आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है. ताइवान पर दबाव बढ़ाने के लिए पिछले हफ्ते चीन ने देश में ताइवान के फूड, शराब और मछली से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध भी लगा दिया था. इसके बाद चीन की राष्ट्रपति सू सेंग चांग ने चीन पर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करने और ताइवान के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया.
क्या है H-6 बमवर्षक?
H-6 सबसे लंबी दूरी से मार करने वाले चीन का बमवर्षक है और यह परमाणु बम ले जाने की क्षमता रखता है. ऐसा दुर्लभ ही देखने को मिलता है कि चीन किसी के हवाई क्षेत्र में एक दिन में पांच से अधिक H-6 बमवर्षक भेजे. लेकिन हाल के हफ्तों में चीन की इस तरह की गतिविधियां बढ़ी हैं. अक्टूबर 2021 तक चीन ने 16 H-6 बमवर्षक भेजे थे. लेकिन पिछले महीने चीन ने 21 बमवर्षक भेजे और दिसंबर में यह संख्या बढ़कर 23 हो गई है.
