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Wednesday, April 29, 2026
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हिज्बुल्लाह हमास नहीं है… ग्राउंड अटैक पर इजरायल को क्यों चेता रहे हैं सिक्योरिटी एक्सपर्ट

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तेल अवीव

गाजा में लगभग एक साल तक हमास के साथ लड़ने के बाद अब इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ नया मोर्चा खोल दिया है। लेबनान में पेजर विस्फोट के बाद अब इजरायल ने बेरूत में हिजबुल्लाह के गढ़ पर बमबारी शुरू कर दी है, जिसमें 500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इस बीच खबर आ रही है कि हवाई हमले के बाद अब इजरायल लेबनान में जमीनी अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन इस बीच यह महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या इजरायल इस समय दूसरा मोर्चा संभाल सकता है? लेबनान में इजरायल का सामना हिजबुल्लाह से है जो ईरान का सबसे ताकतवर प्रॉक्सी है।

हिजबुल्लाह की ताकत को समझने से पहले ये ध्यान देना जरूरी है कि हमास के खिलाफ करीब एक साल से जारी लड़ाई ने इजरायली सेना पर बहुत दबाव डाला है। सैनिकों को बहुत कम आराम मिल रहा है। इजरायली अधिकारी सैनिकों की कमी का हवाला दे रहे हैं। अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है और युद्ध विराम और बंधक समझौते के लिए जनता का दबाव बढ़ रहा है। हमास के इजरायल पर घातक अगले के अगले दिन से ही हिजबुल्लाह और इजरायली सेना के बीच बॉर्डर गोलीबारी हो रही है।

हिजबुल्लाह के साथ चरम पर तनाव
पिछले सप्ताह यह तनाव चरम पर पहुंच गया जब इजरायल ने हिजबुल्लाह के इस्तेमाल किए जाने वाले पेजर और वॉकी-टाकी में विस्फोट करके हजारों लोगों को घायल कर दिया। इसके बाद से दोनों ने एक दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं। इस बीच विशेषज्ञों का कहना है कि इजरायल अगर हिजबुल्लाह के साथ सीधे युद्ध में उतरता है तो उसके लिए यह जंग हमास के साथ हुए मुकाबले से बहुत अलग होगी। विशेषज्ञों ने इजरायल को कीमत चुकाने के लिए तैयार रहने को कहा है।

हमास नहीं है हिजबुल्लाह
योल गुजांस्की तेल अवीव स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन संस्थान में वरिष्ठ शोधकर्ता हैं। वे तीन प्रधानमंत्रियों के अधीन इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में काम कर चुके हैं। उन्होंने सीएनएन से कहा, हिजबुल्लाह देश के अंदर एक अलग देश है, जिसके पर विशिष्ट सैन्य क्षमता है। आइए हिजबुल्लाह के साथ जंग शुरू होने पर इजरायल के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में समझते हैं।

मजबूत सैन्य क्षमता
ईरान के सबसे करीबी प्रॉक्सी के रूप में शिया चरमपंथी समूह हिजबुल्लाह ने पिछले कुछ सालों में न केवल एडवांस हथियारों का प्रदर्शन किया है, उसने यमन और इराक समेत मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों के साथ इजरायल के खिलाफ एक रणनीतिक घेरा भी बनाया है। सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि हिजबुल्लाह के पास 30,000 से 50,000 लड़ाके हैं। हालांकि, इसी साल हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह ने दावा किया था कि समूह के पास 100,000 से ज्यादा लड़ाके और रिजर्व सैनिक हैं।

हिजबुल्लाह के हथियार
विशेषज्ञों का अनुमान है कि समूह के पास 120,000 से 200,000 रॉकेट और मिसाइल मौजूद हैं। हिजबुल्लाह का सबसे बड़ा सैन्य हथियार बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसके हजारों में होने का अनुमान है। इसमें 250-300 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली 1500 मिसाइलें शामिल हैं। बीते सप्ताह के आखिर में हिजबुल्लाह ने कहा कि उनसे फादी 1 और फादी 2 मिसाइल से इजरायल के रामट डेविड एयरबेस को निशाना बनाया। यह बेस लेबनान सीमा से 48 किलोमीटर अंदर है।

पूरे इजरायल पर हमला करने की क्षमता
इजरायल के पास हिजबुल्लाह के मुकाबले बहुत बेहतर सैन्य शक्ति है, लेकिन ईरान समर्थित समूह के पास 500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली मिसाइलें हैं। यह पूरे इजरायल को कवर कर सकता है। हालांकि, इसे इजरायल के आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम को बायपास करना होगा। हिजबुल्लाह के पास जो रॉकेट और मिसाइले हैं, वो 500 किलोमीटर तक रेंज को निशाना बनाने में सक्षम है। इसका मतलब है कि वह पूरे इजरायल को कवर कर सकता है।

इजरायल के सामने चुनौती
इजराइल एक छोटा सा देश है और इसकी सैन्य शक्ति असीमित नहीं है। गुजांस्की ने इजरायल की चुनौती का जिक्र करते हुए बताया कि लेबनान की ओर संसाधनों को मोड़ने का मतलब यह नहीं है कि गाजा युद्ध खत्म हो गया है। इजरायली विश्लेषकों और सेना के अधिकारियों ने भी बार-बार कहा है कि आईडीएफ कमी से जूझ रहा है। हमास के साथ युद्ध की शुरुआत में आईडीएफ ने 295,000 रिजर्विस्ट की भर्ती की, लेकिन यह संख्या अपर्याप्त साबित हो रही है। ऐसे में हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी जंग शुरू करने में इजरायल को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

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